अशोक मिश्रमानसून आने में मुश्किल से दो-ढाई महीने ही बचे हैं। मानसून के दौरान होने वाली परेशानियों से निपटने के लिए सैनी सरकार ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं। वैसे तो सैनी सरकार ने जनवरी महीने में भी संबंधित विभागों से सूखा और बाढ़ राहत से जुड़े कामों की तैयारियां करने का निर्देश दिया था। इसका कारण यह था कि पिछले साल बरसात के दिनों में पंजाब और हरियाणा में बाढ़ से जो तबाही हुई थी, दोनों राज्यों की एक बड़ी आबादी इससे प्रभावित हुई थी, उसकी याद उन दिनों सीएम सैनी के दिमाग में ताजा थी।
यही वजह थी कि जब पूरा उत्तर भारत कड़ाके की ठंड में ठिठुर रहा था, तभी उन्होंने संबंधित विभागों को मानसून के दौरान होने वाली दिक्कतों से निपटने की तैयारियां करने का आदेश दिया था। लेकिन अधिकारियों और कर्मचारियों ने उनके आदेश को कितनी गंभीरता से लिया, यह तो नहीं पता चला है, लेकिन शुक्रवार को सिंचाई, जनस्वास्थ्य एवं स्थानीय निकाय विभाग के साथ हुई समीक्षा बैठक में सीएम नायब सिंह सैनी ने एक बार फिर अधिकारियों को चेताया कि वह मानसून आने से पहले ही सभी ड्रेन, नदियों और नालों की सफाई कर लें।
आबादी क्षेत्र में आने वाले ड्रेनों और नहरों के किनारों को ऊंचा करने के साथ-साथ तटबंधों को मजबूत कर लें। उन्होंने सख्त आदेश देते हुए कहा कि प्रदेश में इस बार मानसून से पहले सभी ड्रेन, नहरों एवं नालों की सफाई का कार्य पूरा कर लिया जाए। शहरी क्षेत्रों में बढ़ती आबादी के अनुसार नई जल निकासी परियोजनाओं के प्रस्ताव तैयार किए जाएं ताकि भविष्य में उन क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति न बनें।
पिछले साल पंजाब और हरियाणा में आई बाढ़ की वजह से पैदा हुए जलभराव के चलते किसानों को बहुत नुकसान उठाना पड़ा था। काफी लोग संक्रामक रोगों के शिकार भी हुए थे। बैठक के दौरान अधिकारियों ने सीएम सैनी को बताया कि 87 स्थानीय निकायों में 2655 किलोमीटर लंबाई की 2382 ड्रेनों में से 1116 किलोमीटर लंबी ड्रेनों की सफाई की कार्य कर लिया गया है।
शेष ड्रेनों का कार्य जून तक पूरा कर लिया जाएगा। जनस्वास्थ्य विभाग की 85 शहरों में 100 किलोमीटर लंबी ड्रेनों की सफाई का कार्य मई के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। शेष के लिए अप्रैल अंत तक टेंडर पूरे कर लिए जाएंगे। जलभराव की स्थिति में निकासी हेतु 1678 क्यूसेक क्षमता के 839 डीजल पंप, 4466 क्यूसिक क्षमता के 1389 इलेक्ट्रिक पंप तथा 3465 क्षमता के 495 मोबाइल पंप तैयार हैं।
इस प्रकार प्रदेश में 9609 क्यूसेक क्षमता के 2723 पंप तैयार कर लिए गए हैं। अभी तक जिन ड्रेनों में सफाई का कार्य कर लिया गया है, वह जनवरी में दिए गए निर्देश का नतीजा भी हो सकता है। बहरहाल, सैनी सरकार की सक्रियता को देखते हुए लगता है कि इस बार पिछले साल जैसी कहानी नहीं दोहराई जाएगी।

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