Monday, April 13, 2026

गैस संकट के चलते उद्योगों को हो रहा भारी नुकसान, उत्पादन ठप

अशोक मिश्र

मध्य एशिया में चल रहा युद्ध भले ही एक पखवाड़े के लिए रुक गया हो, लेकिन होर्मुज स्ट्रेट विवाद नहीं सुलझने से यह उम्मीद भी क्षीण होती जा रही है कि कुछ दिनों बाद शायद हालात सामान्य हो जाएं। वैसे तो ईरान का रवैया भारतीय तेल टैंकर जहाजों के प्रति नरम है, लेकिन बहुत ज्यादा राहत मिलती हुई नहीं दिख रही है। इसका नतीजा यह है कि हरियाणा सहित सभी राज्यों में एलपीजी, डीजल और पेट्रोल की किल्लत बनी हुई है। 

हरियाणा में एलपीजी को लेकर भले ही थोड़ा बहुत दबाव कम हुआ हो, लेकिन हालात अभी तक काबू में नहीं हैं। गैस और तेल की कालाबाजारी करने वालों की इन दिनों चांदी है। वह परेशान नागरिकों को दोनों हाथों से लूट रहे हैं। हजार-ग्यारह सौ में मिलने वाली गैस की कीमत तीन से पांच हजार रुपये वसूली जा रही है। इस मामले में सबसे ज्यादा परेशानी में वह लोग हैं जो पांच किलो वाला सिलेंडर भरवाकर काम चलाते थे। 

हालांकि सैनी सरकार ने कुछ दिन पहले घोषणा की थी कि पांच किलो वाला सिलेंडर गरीबों को पहचान पत्र दिखाने पर आसानी से उपलब्ध कराया जाएगा। लेकिन इस मामले में भी व्यवस्था संतोषजनक नहीं है। सिलेंडर बुक कराने पर भी लोगों के मोबाइल पर डीएसी यानी डिलिवरी अथेंटिकेशन कोड तक नहीं आ रहा है जिसकी वजह से लोगों को काफी परेशानी होती है। 

वह लोग बार-बार बुकिंग सेंटर की दौड़ लगा रहे हैं। वैसे तो एलपीजी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए प्रदेश सरकार हर संभव प्रयास कर रही है। कालाबाजारियों के खिलाफ सख्ती भी बरती जा रही है, लेकिन यह भी सच है कि लोगों की जरूरत के हिसाब से एलपीजी उपलब्ध नहीं है। प्रशासन इस बात पर भी नजर रख रहा है कि घरेलू सिलेंडरों का उपयोग व्यावसायिक मामलों में न होने पाए। इसके बावजूद होटल, ढाबा और रेस्टोरेंट संचालक घरेलू सिलेंडर का ही उपयोग कर रहे हैं। 

गैस उपलब्ध न होने की वजह से ज्यादातर होटल, ढाबे और रेस्त्रां या तो बंद हो चुके हैं, बंदी के कगार पर पहुंच गए हैं। सबसे ज्यादा परेशानी राज्य के औद्योगिक क्षेत्रों में उद्यमियों को हो रही है। प्रदेश के लाखों उद्यमी अपने प्रतिष्ठानों को बंद करने पर मजबूर हो गए हैं। राज्य में कई फैक्टरियों में उत्पादन पचास प्रतिशत से भी कम रह गया है। सबसे ज्यादा प्रभावित वे फैक्टरियां हैं जिनका काम लोहे की कटिंग, लोहे को पिघलना या गैस वेल्डिंग है। ऐसी फैक्टरियां या तो बंद कर दी गई हैं या फिर फैक्टरियों में कार्यरत मजदूरों की छंटनी कर दी गई है। 

जिन वर्कशाप या छोटी इकाइयों में दस से पंद्रह मजदूर गैस की किल्लत पैदा होने से पहले काम करते थे, अब ऐसी इकाइयों में तीन-चार मजदूर ही बचे हैं। बाकी लोगों की छुट्टी कर दी गई है। उद्यमी अपने आर्डर पूरा कर पाने में असमर्थ हैं। इससे उनको आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।

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