Friday, April 24, 2026

जब लाखों पौधे हर साल रोपे जाते हैं तो क्यों नहीं बढ़ रहा वन क्षेत्र?


अशोक मिश्र

दो दिन पहले पृथ्वी दिवस था। पूरी दुनिया में पृथ्वी दिवस सन 1970 से मनाया गया था। इसका उद्देश्य मानव जीवन के लिए अनिवार्य संसाधनों को नष्ट होने से बचाना और पृथ्वी को हरा भरा रखना। हरियाणा में भी पृथ्वी दिवस मनाया जा रहा है। इस बार भी हरियाणा में पौधरोपण को लेकर ढेर सारी योजनाएं बनाई गई हैं। कुछ पर अमल किया जा चुका है, तो कुछ पर अमल होना अभी बाकी है। कहा जा रहा है कि हरियाणा में बीते कुछ वर्षों में जिला प्रशासन और जनभागीदारी से अरावली की पहाड़ियों, जल स्रोतों और शहरी पर्यावरण को दुरुस्त करने के लिए कई स्तरों पर कार्य किया गया है। 

हरियाणा में जल संरक्षण के लिए 55 गांवों में 115 सोक पिट तैयार किए जा रहे हैं जिनका उद्देश्य अतिरिक्त पानी को सोखकर जल स्तर को बनाए रखना है। मिशन अमृत सरोवर के तहत पुराने तालाबों का पुनर्निर्माण किया जा रहा है, उन्हें सुधारा जा रहा है ताकि बरसात के दिनों में अतिरिक्त पानी को संग्रहीत किया जा सके। इसके अलावा अटल भूजल योजना के तहत किसानों को प्रेरित किया जा रहा है कि वह टपका विधि से अपने फसलों की सिंचाई करें ताकि कम से कम पानी का उपयोग करके फसलों से अधिक लाभ उठाया जा सके। अरावली क्षेत्र में भी हरित आवरण बढ़ाने के लिए बड़े स्तर पर पौधरोपण अभियान चलाया जा रहा है। 

दुर्गम पहाड़ियों पर सीड बॉल का छिड़काव करके वहां हरित आवरण बढ़ाने की कोशिश हो रही है। सीड बॉल बरसात के दिनों में उग आते हैं और दुर्गम जगहों पर इस तरह नए पौधों को उगाया जाता है। सरकारी आंकड़ा बताता है कि पिछले साल अरावली और उसके आसपास के शहरी क्षेत्र में कुल एक लाख 63 हजार 517 पौधों को लगाया गया था। सरकार हर साल लाखों पौधों को सरकारी कर्मचारियों और निजी संस्थाओं के माध्यम से लगवाती है, इसके बावजूद प्रदेश में वन क्षेत्र अगर घटता जा रहा है, तो फिर सवाल यह है कि इतने अधिक प्रयास करने के बावजूद वन क्षेत्र बढ़ क्यों नहीं रहा है। 

भारतीय वन सर्वेक्षण की ताजा द्विवार्षिक रिपोर्ट के अनुसार फरीदाबाद, पलवल और नूंह जिलों में कुल मिलाकर करीब चार फीसदी तक वन क्षेत्र कम हुआ है। यह आंकड़ा किसी भी पर्यावरण प्रेमी के लिए चिंता की बात है। वन क्षेत्र कम होने से अरावली पहाड़ियों के इर्द-गिर्द बसे शहरों का तापमान बढ़ रहा है। रिकार्ड बताते हैं कि फरीदाबाद जिले में कुल 78.43 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र में से 1.08 वर्ग किलोमीटर की कमी आई है। वर्तमान में यहां 25.98 वर्ग किलोमीटर मध्यम घना जंगल और 52.45 वर्ग किलोमीटर खुला जंगल बचा है। 

इसी तरह पलवल जिले में भी 0.21 वर्ग किलोमीटर हरियाली कम हुई है। सबसे भयावह स्थिति नूंह जिले की है जहां 108.96 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र में से रिकॉर्ड 4.05 वर्ग किलोमीटर जंगल खत्म हो चुका है। जंगलों के इस तरह सिमटने का सीधा असर शहर की हवा और सेहत पर पड़ना तय है। 


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