अशोक मिश्रहरियाणा की जीडीपी में असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों का बहुत बड़ा योगदान है। जून 2022 की एक रिपोर्ट के अनुसार, हरियाणा में लगभग 52 लाख (25 प्रतिशत से अधिक) अनौपचारिक श्रमिक हैं, जो घर, प्रतिष्ठानों, निर्माण और अन्य अनौपचारिक क्षेत्रों में काम करते हैं। इनका कोई आधिकारिक लेखा-जोखा तो नहीं होता है, लेकिन अनुमान लगाया जाता है कि हरियाणा की जीडीपी में असंगठित कार्यबल का 30 प्रतिशत कृषि में, 24 प्रतिशत निर्माण में और 21 प्रतिशत अन्य क्षेत्रों में एक बहुत बड़ी भूमिका है।
इनके असंगठित होने की वजह से इनकी समस्याओं का निस्तारण भी बहुत मुश्किल से हो पाता है। प्रदेश में इन असंगठित श्रमिकों के छिटपुट रजिस्टर्ड संगठन तो पाए जाते हैं, लेकिन वह उनकी समस्याओं को सुलझाने में उतने प्रभावी नहीं पाए जाते हैं। इनको मजदूरी भी बहुत कम दी जाती है जिसको महसूस करते हुए सैनी सरकार ने अकुशल, अर्धकुशल, कुशल और अति कुशल श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी में बढ़ोतरी की है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में चारों श्रेणियों के मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी में बढ़ोतरी करने का निर्णय लिया गया। अकुशल मजदूरों की न्यूनतन मजदूरी को 11 हजार 257 रुपये से बढ़ाकर 15 हजार 220 रुपये मासिक किया गया है। न्यूनतम मजदूरी में 35 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की गई है, जो कि एक अप्रैल 2026 से लागू होगी। एक्सपर्ट कमेटी ने श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी में बढ़ोतरी के लिए रिपोर्ट दी थी, जिसे राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूरी प्रदान कर दी गई है।
इससे प्रदेश में कार्यरत लगभग साठ लाख से अधिक असंगठित श्रमिकों को लाभ मिलेगा। सरकार इन्हें सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने हेतु विशेष कल्याण बोर्ड, ई-श्रम पोर्टल के माध्यम से पंजीकरण और पीएम श्रम योगी मान-धन योजना जैसी योजनाओं के तहत सहायता प्रदान कर रही है। हरियाणा में असंगठित श्रमिक ज्यादातर रेहड़ी-पटरी, घरेलू कार्य, भवन निर्माण, आटो-रिक्शा, टी स्टालों और ढाबों पर काम करते हुए पाए जाते हैं। जो लोग विशेष कल्याण बोर्ड, ई श्रम पोर्टल आदि पर अपना रजिस्ट्रेशन करवा लेते हैं, उन्हें तो सरकारी सहायता का लाभ मिल जाता है, बाकी श्रमिकों को कोई पूछने वाला नहीं है।
इन लोगों को नौकरी या काम देने वाला नियोक्ता कम वेतन देने के साथ-साथ निर्धारित समय से ज्यादा काम करवाता है। इनकी सामाजिक सुरक्षा की भी कोई जिम्मेदारी नियोक्ता नहीं उठाता है। ऐसी स्थिति में अगर नियोक्ता जब चाहे इन्हें काम से निकाल भी देता है। नतीजा यह होता है कि कई दिनों तक इन्हें कोई काम ही नहीं मिलता है। ऐसी स्थिति देश के लगभग हर राज्य में है। अगर छोटी-मोटी पूंजी जुटाकर यह अपना कोई रोजगार करना चाहें, तो इनके सामने कई तरह की परेशानियां खड़ी हो जाती हैं।

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