Tuesday, April 28, 2026

हरियाणा में दहेज की भेंट चढ़ती औरतों को कब मिलेगा न्याय?


अशोक मिश्र

देश में दहेज हत्या कोई नई बात नहीं है। एक अनुमान के मुताबिक पूरे देश में रोज लगभग बीस से तीस महिलाएं दहेज की बलिवेदी पर चढ़ा दी जाती हैं। हरियाणा भी दहेज हत्या के मामले में अछूता नहीं है। राज्य में दहेज हत्याओं का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है। तीन दिन पहले ही पलवल के किठवाड़ी गांव में विवाहिता और उसकी चार साल की बच्ची की निर्मम हत्या कर दी गई। 

मामला दहेज हत्या का बताया जा रहा है। मृतका के भाई का आरोप है कि उसकी बहन मितलेश की शादी साल 2020 में आरोपी धर्मवीर के साथ हुई थी। विवाह के कुछ ही दिनों बाद मितलेश का पति, देवर, सास ननदें जमीन और 25 लाख रुपये मायके से मांगकर लाने के लिए दबाव बनाते थे। मितलेश के साथ मारपीट भी की जाती थी। बार-बार उसे मायके से दहेज लाने के लिए प्रताड़ित किया जाता था। 

25 अप्रैल को ससुराल वालों ने मितलेश के साथ साथ उसकी चार साल की बच्ची की पीट-पीटकर हत्या कर दी। तीन महीने पहले पैदा हुए बेटे को लेकर पिता धर्मवीर फरार है। पुलिस मामले की सच्चाई पता लगाने की कोशिश कर रही है। हरियाणा में दहेज हत्या के मामलों में चिंताजनक आंकड़े सामने आ रहे हैं, जो राज्य में महिलाओं के खिलाफ अपराध की गंभीरता को दर्शाते हैं। 

साल 2025 में प्रकाशित एनसीआरबी डेटा पर आधारित एक रिपोर्ट के अनुसार, हरियाणा में दहेज हत्या के 207 मामले दर्ज किए गए जबकि साल 2021 में दहेज हत्या के 275 मामले दर्ज किए गए थे। वहीं, साल 2020 में 251 और 2019 में 248 मामले सामने आए थे। हरियाणा में दहेज हत्या के अलावा पति या ससुराल वालों द्वारा महिलाओं के साथ क्रूरता (दहेज उत्पीड़न) के भी हजारों मामले सामने आते हैं, जो कई बार हत्या में बदल जाते हैं। दहेज उत्पीड़न और हत्या रोकने के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने कड़े कानून बना रखे हैं। इसके बावजूद प्रदेश में दहेज हत्याओं का सिलसिला खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। 

दरअसल, प्राचीन काल में जब कोई अपनी बेटी का विवाह करता था, तो नवदंपति को अपनी गृहस्थी को व्यवस्थित करने के लिए लड़की का पिता या भाई अनाज, कपड़े, गृहस्थी के सामान आदि दूल्हे को देता था। यह सब कुछ करने का मकसद यह था कि नवदंपति को अपना वैवाहिक जीवन की शुरुआत में किसी प्रकार की परेशानी न हो। ऐसा करना भी कोई जरूरी नहीं था। लेकिन कालांतर में यही दाय भाग दहेज में कब परिवर्तित हो गया, किसी को पता ही नहीं चला। 

अब तो यह है कि लोग खुलेआम दहेज मांग लेते हैं और लड़की वालों को मजबूरन ऐसा करना पड़ता है। वैसे तो कानूनन दहेज मांगना और देना दोनों अपराध की श्रेणी में आते हैं, लेकिन लोग सामाजिक प्रतिष्ठा के नाम पर लड़की वालों को दहेज देने पर मजबूर कर देते हैं।

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