बोधिवृक्ष
अशोक मिश्र
इंसान चाहे जितना भी गुणी हो, लोग उसमें कोई न कोई दोष निकाल ही लेते हैं। यही इंसान की प्रवृत्ति होती है। यदि किसी को खुद के दोष खोजने को कहा जाए, तो वह अपने आपको दुनिया का सबसे अच्छा आदमी ही बताएगा। लोगों को अपने अवगुण और दूसरों में गुण कभी दिखाई नहीं देते हैं।एक बार की बात किसी जगह पर एक चित्रकार रहता था। वह बहुत अच्छा चित्रकार था। लोग उसके चित्रों के मुरीद थे। वह कई कला प्रतियोगिताओं में विजेता भी रह चुका था। उसके बावजूद उसके मन में भावना बार-बार घर कर जाती थी कि लोग उसकी कला को किस रूप में लेते हैं, इसका पता लगाया जाए। यदि उसकी कला में किसी प्रकार की कमी है, तो उसको सुधारा जाए।
एक दिन उसने एक बहुत सुंदर चित्र बनाया और उसे ले जाकर एक चौराहे पर यह लिखते हुए टांग दिया कि यदि कोई कमी रह गई हो, तो बताएं। अगले दिन वह जब उस जगह पहुंचा, तो देखा कि चित्र बदरंग हो चुका था और उस पर लोगों ने कमियां ही कमियां अंकित कर रखी थीं। लोगों ने कमी बताने में किसी प्रकार की कोताही नहीं बरती थी।
चित्रकार दुखी हुआ। उसने यह बात अपने एक मित्र से बताई। उस मित्र ने कहा कि अच्छा एक काम करो, एक चित्र दूसरी जगह लगाकर लिखों कि इस चित्र की कमियों को सुधार दो। चित्रकार ने ऐसा ही किया। दूसरे दिन उसने देखा कि चित्र ज्यों का त्यों था।
किसी ने उसे सुधारा नहीं था। जबकि यह चित्र पहले की अपेक्षा साधारण किस्म का था। तब चित्रकार को उसके मित्र ने समझाया कि लोग अच्छे भले आदमी में भी हजार कमियां निकाल देंगे, लेकिन अगर उसमें सुधार करना हो, तो कोई कुछ नहीं करेगा।

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