Friday, April 24, 2026

मेरे पास एक ही फटा पुराना वस्त्र है

फोटो साभार गूगल

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

अट्ठारहवीं शताब्दी में इसाइयत धर्मजागरण के क्षेत्र में सबसे ज्यादा चर्चित रहे संत जान वेस्ली का जन्म 17 जून 1703 में इंग्लैंड में हुआ था। वह एक पादरी, धर्मशास्त्री और ईसाई प्रचारक थे। उन्हें मेथोडिस्ट संप्रदाय का संस्थापक और जनक माना जाता है। उनके पिता सैमुअल वेस्ली और माता सुजाना वेस्ली धार्मिक प्रवृत्ति के थे। इसका प्रभाव जान वेस्ली पर भी पड़ा। 

उन्होंने अपने भाई चार्ल्स वेस्ली के साथ मिलकर एक होली क्लब भी बनाया था जिसमें वह नियमित प्रार्थना, बाइबिल का अध्ययन और लोगों के प्रति सदभाव रखना सिखाया करते थे। वह चर्च या किसी के घर में उपदेश देने की जगह खुले में उपदेश देना पसंद करते थे। एक बार की बात है। एक दिन जॉन वेस्ली अपने घर बैठे कुछ सोच रहे थे। तभी  उनके घर में काम करने वाली एक महिला आई। 

महिला उदास थी। उसकी परेशानी उसके चेहरे से झलक रही थी। जब वेस्ली ने उससे उदासी का कारण पूछा, तो उसने बताया कि उसके पास पहनने के लिए एक ही फटा पुराना वस्त्र है। इसकी वजह से वह बाहर नहीं निकल पाती है। यह बात सुनकर उन्होंने एक बार उस महिला के वस्त्रों को देखा और फिर उनकी नजर अपने कमरे में टंगे पर्दों पर गई। पर्दे काफी कीमती थे। 

महिला की दशा देखकर उन्हें बहुत दुख हुआ। उन्होंने उस महिला को वस्त्र खरीदने के लिए पैसे दिए। इसके बाद उन्होंने अपने जीवन का लक्ष्य ही बना लिया दूसरों की मदद करने का। धीरे-धीरे  उन्होंने लोगों को यह कहना शुरू किया कि कमाओ, बचाओ और दान कर दो। उन्होंने अपनी भी संपत्ति काफी हद तक दान कर दी थी। यही वजह है कि ईसाई धर्मावलंबियों में वह आज भी याद किए जाते हैं।

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