Friday, July 24, 2026

हरियाणा में भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़नी होगी एक लंबी लड़ाई

अशोक मिश्र

हरियाणा सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कमर कस ली है। एंटी करप्शन ब्यूरो ने प्रदेश के 140 भ्रष्ट अधिकारियों की बाकायदा सूची भी बना ली है। भ्रष्टाचार किसी भी राज्य में हो, उस प्रदेश की शासन और अर्थव्यवस्था को दीमक की तरह खोखला कर देता है। भ्रष्टाचार हमेशा गरीब जनता के लिए हानिकारक साबित होता है। रिश्वत देकर अमीर और अपराधी प्रवृत्ति के लोग अपना काम करा लेते हैं। इसका खामियाजा उन लोगों को भुगतना पड़ता है, जो कमजोर और गरीब होते हैं। यह स्थिति किसी भी कल्याणकारी राज्य के लिए अच्छी नहीं होती है। सैनी सरकार ने भी सरकारी भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश एंटी करप्शन ब्यूरो को दे दिया है। 

ब्यूरो प्रमुख अरशिंदर सिंह चावला की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में राज्य भर के ऐसे 140 अधिकारियों और कर्मचारियों की सूची तैयार की गई है जिनके खिलाफ बिना रिश्वत लिए काम न करने की बार-बार शिकायतें मिल रही हैं। इन सभी अधिकारियों पर विशेष खुफिया निगरानी रखी जा रही है। पिछले दिनों राज्य में अब तक का एक बहुत बड़ा 661 करोड़ रुपये का वित्तीय घोटाला सामने आया था जिसमें सरकारी विभागों के फंड को निजी बैंकों में अवैध रूप से डायवर्ट किया गया था। 

इस करोड़ों के घोटाले में कथित संलिप्तता और अनियमितताओं के कारण वरिष्ठ आईएएस अधिकारी पंकज अग्रवाल, राम कुमार सिंह (आरके सिंह) और प्रदीप कुमार (प्रदीप डागर) को निलंबित किया जा चुका है। पंचकूला नगर निगम के पूर्व कमिश्नर आरके सिंह और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पूर्व सदस्य सचिव प्रदीप कुमार को गिरफ्तार किया है। इन पर सरकारी पैसों की फर्जी एफडी बनाकर शेल कंपनियों में ट्रांसफर करने का आरोप है। प्रदेश के 140 अधिकारियों की सूची सामने आने से यह उम्मीद जगी है कि अब शिकंजा ऊपर तक जाएगा। इनमें राजस्व, पीडब्ल्यूडी, नगर निगम, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी शामिल हैं। 

वैसे तो एसीबी हर महीने स्टिंग करती है, रिश्वत लेते पटवारी, क्लर्क और इंजीनियर पकड़े जाते हैं। दिक्कत यह है कि पकड़े जाने वाले हमेशा निचले और मध्य स्तर के कर्मचारी होते हैं। हरियाणा युवा और औद्योगिक प्रदेश है। यहां निवेश तभी आएगा जब फाइलें समय पर चलेंगी। जब एक उद्यमी को ठडउ के लिए महीने भर चक्कर काटने पड़ें और अंत में चाय-पानी की मांग हो, तो वह उद्योग दूसरे राज्य में चला जाता है। 

हरियाणा ने खेल, कृषि और स्टार्टअप में नाम कमाया है। पर एक भ्रष्ट अधिकारी पूरे विभाग की छवि खराब कर देता है। हरियाणा को भ्रष्टाचार मुक्त बनाना है तो भ्रष्टाचार के खिलाफ लंबी लड़ाई लड़नी होगी। शुरुआत नीचे से नहीं ऊपर से करनी होगी, तभी व्यवस्था सुधरेगी।

No comments:

Post a Comment