Wednesday, August 12, 2026

पैदल चलने वालों के लिए कब सुरक्षित होंगी सड़कें?


अशोक मिश्र

तेज रफ्तार गाड़ियों से लोगों के कुचले जाने की घटनाएं अब लोगों में भय पैदा करने लगी हैं। सड़क पर चलने वाले लोग अब अपने आपको असुरक्षित महसूस करने लगे हैं। कब और कहां सड़क पर चलती हुई गाड़ी कुचल दे, इसका कोई ठिकाना भी नहीं है। फरीदाबाद के मेवला महाराजपुर में सड़क के किनारे खड़े तीन लोगों को तेज रफ्तार थार ने रविवार को कुचल दिया था। यह तीनों लोग मार्निंग वॉक पर निकले थे। इनमें से एक व्यक्ति की मौत हो गई। मार्निंग वॉक पर निकले इन तीन लोगों को सपने में भी यह अंदेशा नहीं रहा होगा कि उनके साथ ऐसी घटना होने वाली है। 

ऐसी घटनाओं के पीछे सबसे बड़ा कारण गाड़ी को ताकत और स्टेटस सिंबल समझने की मानसिकता है। थार जैसी बड़ी एसयूवी युवाओं में काफी लोकप्रिय है। इन गाड़ियों से वह शो ऑफ, दबंगई और सड़क पर अपना वर्चस्व कायम करने की कोशिश करते हैं। थार जैसी गाड़ियों से स्टंट करने, खाई में गिरने, नशे में लोगों को कुचलने और ड्रिफ्ट करते हुए लोगों की जान जोखिम में डालने जैसी कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। सड़क पर होने वाले ज्यादातर हादसों के पीछे वाहन चालकों का नशे में होना है। 

इसके साथ ही हमारे शहरों में बुनियादी ढांचे की कमी भी जिम्मेदार है। राज्य के कई जिलों की घनी आबादी वाले इलाकों में सड़क पर चलने वालों के लिए न तो सुरक्षित फुटपाथ है, न फुट ओवर ब्रिज, न स्पीड ब्रेकर और न ही स्पीड कैमरे। लोग मजबूरन मुख्य सड़क या सर्विस लेन पर ही चलते हैं। इसका समाज पर असर बहुत गहरा और खतरनाक है। जब सुबह टहलने निकला एक बुजुर्ग या एक आम कर्मचारी सड़क पर ही कुचल दिया जाता है, तो लोगों के मन में असुरक्षा बैठ जाती है। 

लोग अपने बच्चों को साइकिल चलाने या बुजुर्गों को पार्क तक अकेले भेजने से डरने लगते हैं। इससे एक पूरी पीढ़ी का खुली हवा में निकलना, पैदल चलना और स्वस्थ रहना बंद हो जाता है। ऐसी घटनाएं कानून और सिस्टम पर से भरोसा कमजोर करती हैं। लोग सोचने लगते हैं कि सड़क पर चलने वाला गरीब पैदल यात्री और बड़ी गाड़ी में बैठा अमीर चालक कानून की नजर में बराबर नहीं हैं। यह खाई जब बढ़ती है, तो गुस्सा, आक्रोश और सड़क पर ही बदला लेने की प्रवृत्ति पैदा होती है। 

ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए केवल चालान काटना काफी नहीं है। सबसे पहले लाइसेंस सिस्टम को सख्त करना होगा। चालक की पहली गलती पर ही कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। टेस्ट के बिना लाइसेंस और बिना हेलमेट-बेल्ट के गाड़ी चलाने वाले को गिरफ्तार करके जेल भेज देना चाहिए। शराब पीकर या नशे में गाड़ी चलाने पर गाड़ी को तुरंत सीज और लंबे समय के लिए लाइसेंस रद्द करने का नियम लागू हो ताकि लोगों को सबक मिल सके।

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