अशोक मिश्रहिमाचल और उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश हो रही है। इसकी वजह से पहाड़ी इलाकों से अचानक पानी आ जाने से हरियाणा में बहने वाली नदियां उफान पर हैं। बारिश और नदियों के उफान में आने से हरिया के कई जिलों में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। पहाड़ों में हो रहे भूस्खलन और मूसलाधार बारिश के कारण नदियों का जलस्तर खतरे के निशान तक पहुंच रहा है। हालात यह है कि हरियाणा की लगभग सभी प्रमुख नदियां उफान पर बह रही हैं। इसका सबसे पहला दबाव यमुना नदी पर बने हथिनीकुंड बैराज पर पड़ा है। मंगलवार को यमुनानगर स्थित हथिनी कुंड बैराज पर नदी का बहाव अचानक तेज हो गया था।
कुछ ही घंटों में जल प्रवाह 34,364 क्यूसेक से बढ़कर 79,629 क्यूसेक तक पहुंच गया था। बढ़ते जलस्तर को देखते हुए सिंचाई विभाग को एहतियात के तौर पर बैराज के 18 में से 16 गेट खोलने पड़े और अतिरिक्त पानी को दिल्ली की ओर छोड़ना पड़ा। अब यह पानी दिल्ली तक पहुंचने वाला है। इसी तरह शिवालिक पहाड़ियों से निकलने वाली बरसाती नदियां घग्गर, मारकंडा, टांगरी, सोम, पाथराला और कौशल्या भी पूरे उफान पर हैं। अंबाला में मारकंडा खतरे के निशान के आसपास और टांगरी तीन फीट ऊपर बह रही थी।
कुरुक्षेत्र के शाहाबाद में मारकंडा 26 हजार क्यूसेक से ज्यादा के वेग से बह रही है, तो कैथल में घग्गर का जलस्तर डेंजर लेवल के आसपास है। सिरसा के ओटू हेड पर भी घग्गर में लगातार बढ़ोतरी की खबर है। हरियाणा की नदियां जब भी उफान पर आती हैं, तो इन नदियों के आसपास बसे शहरों में सबसे ज्यादा खतरा पैदा हो जाता है। यमुना के रास्ते में पड़ने वाले यमुनानगर, करनाल, पानीपत, सोनीपत, फरीदाबाद और पलवल में सबसे ज्यादा खतरा होता है। हरियाणा में बाढ़ आने पर सबसे ज्यादा खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ता है। अगस्त का महीना धान की फसल के लिए बेहद अहम होता है।
इस बार खेतों में पानी भरने से सैकड़ों एकड़ से ज्यादा में लगी खरीफ की फसल जलमग्न होने की खबर है। इससे हजारों किसान प्रभावित हुए हैं। यमुनानगर, करनाल, सोनीपत और अंबाला-कुरुक्षेत्र बेल्ट में धान के साथ-साथ चारा और सब्जियों की फसलें भी डूब गई हैं। हर साल नदियों के साथ आई रेत खेतों में जमा हो जाती है जिससे जमीन की उर्वरता पर लंबे समय तक असर पड़ता है। किसान चिंतित हैं कि पानी उतरने के बाद भी खेतों में नमी और कीचड़ के कारण दोबारा बुवाई करना मुश्किल होगा। आम लोगों की परेशानी भी कम नहीं है। नदी किनारे बसे निचले गांवों में रहने वाले लोगों को प्रशासन ने सतर्क रहने को कहा है। जलभराव के कारण पशुओं के लिए चारे की कमी हो गई है और मच्छरों के बढ़ने से बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है।
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