Thursday, August 27, 2026

मरीज की जान से खिलवाड़ करते हैं नकली दवाओं के कारोबारी

अशोक मिश्र

दिल्ली एनसीआर और हरियाणा में नकली और अवैध दवाओं का कारोबार अपनी जड़ें जमाता जा रहा है। इसका ताजा और चिंताजनक उदाहरण दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच द्वारा फरीदाबाद निवासी डॉ. मनीष शर्मा की गिरफ्तारी है। कुछ दिनों पहले दिल्ली पुलिस ने एक बड़े अंतरराज्यीय सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया था और इस मामले में 17 लोगों को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तार किए गए लोगों के पास से करीब नौ करोड़ रुपये मूल्य की कैंसर रोधी दवाएं बरामद हुई थीं। 

इस मामले में फरीदाबाद के नर्सिंग स्टाफ और अस्पताल कर्मचारियों की सक्रिय भूमिका सामने आई। अस्पताल से दवाएं चुराकर तस्करों के जरिए बाजार में पहुंचाने का तरीका इस नेटवर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा था। कैंसर, डायबिटीज और वजन नियंत्रण की दवाएं असल में लाखों रुपये की होती हैं, इसलिए नकली या डायवर्ट की गई दवाएं सस्ती दर पर उपलब्ध कराकर या असली कीमत पर बेचकर अपराधी बेतहाशा कमाई करते हैं। अस्पतालों और सरकारी गोदामों से दवाओं का डायवर्जन है, जहां नर्सिंग स्टाफ या प्राइवेट असिस्टेंट मरीजों के लिए रखी वायल निकालकर बाहर सप्लाई करते हैं। 

राज्य ड्रग्स कंट्रोलर ने फील्ड अधिकारियों को सख्त निगरानी, त्वरित निरीक्षण, सैंपलिंग और कानूनी कार्रवाई के आदेश दिए हैं। पिछले दस महीनों में 16 लोगों को ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया, जिसमें गुरुग्राम इकाई ने 12 गिरफ्तारियां कीं और कई अंतरराज्यीय सिंडिकेट ध्वस्त किए। अप्रैल 2026 में गुरुग्राम के डीएलएफ फेज-4 और सेक्टर-69 में नकली मौनजारो इंजेक्शन का रैकेट पकड़ा गया, जिसमें करीब 70 लाख रुपये मूल्य की दवाएं जब्त हुईं। जुलाई में नकली टेल्मा-एएम गोलियों का नेटवर्क उजागर हुआ, जिसकी सप्लाई चेन दिल्ली के बिना लाइसेंस वाले थोक व्यापारी और उत्तर प्रदेश-बिहार तक पहुंची।  

एसोचैम का अनुमान है कि देश में नकली दवाओं का बाजार 15 हजार करोड़ रुपये सालाना से अधिक हो गया है। यह कारोबार 20-25 प्रतिशत सालाना की दर से बढ़ रहा है। इस मामले में हरियाणा का कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। यह भी सच है कि देश का बड़ा फार्मा उत्पादन हरियाणा के सोनीपत, पानीपत, अंबाला बेल्ट में होता है। हर बड़ी बरामदगी में हरियाणा का नाम आने से विशेषज्ञ चिंतित हैं। 

उनका अंदाजा है कि अकेले प्रदेश में सालाना चार सौ से छह सौ करोड़ रुपये का अवैध कारोबार चल रहा है। इसकी बड़ी वजह विभाग में स्टाफ की भारी कमी है। नकली दवाओं का यह कारोबार सिर्फ  आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि मरीजों की जान से जानबूझकर किया जाने वाला खिलवाड़ है। कैंसर जैसे रोगों में नकली दवा देने से इलाज विफल हो सकता है और मौत का खतरा बढ़ जाता है। 

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