Sunday, August 30, 2026

समाज को संगठित अपराध और गैंगस्टरों के खिलाफ आगे आना होगा


अशोक मिश्र

संगठित गिरोह, गैंगस्टर नेटवर्क और फिरौती के लिए आने वाले फोन काल्स के खिलाफ हरियाणा में विशेष एसटीएफ ने कमर कस ली है। उसने अपराधियों के खिलाफ अपना अभियान तेज कर दिया है। स्पेशल टास्क फोर्स ने 2024 से अब तक करीब 1972 आरोपियों को गिरफ्तार किया है जिनमें 1063 गैंगस्टर और गैंग सदस्य शामिल हैं। अकेले 2026 में जनवरी से अगस्त के बीच 512 आरोपी पकड़े गए जिनमें 270 गैंगस्टर या उनके सहयोगी तथा 55 मोस्ट वांटेड अपराधी थे। 

ऑपरेशन ट्रैकडाउन जैसे अभियानों में एक ही दिन में दर्जनों कुख्यात अपराधियों को गिरफ्तार कर हिस्ट्री शीट खोली गईं। विदेश भागकर बैठे गैंगस्टरों के खिलाफ भी अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ा है। 2025-26 में 21 गैंगस्टरों को निर्वासन या प्रत्यर्पण के जरिए भारत लाया गया जिनमें 2026 में ही 14 शामिल हैं। कई अन्य विभिन्न देशों में हिरासत में हैं। जॉर्जिया, अमेरिका, यूएई, थाईलैंड, फिलीपींस और अन्य जगहों से अपराधियों की वापसी ने नेटवर्क को झटका दिया है।  हरियाणा में गैंगस्टर पनपने के कारण संरचनात्मक और सांस्कृतिक दोनों हैं। 

राज्य में तेजी से बढ़ा जमीन का बाजार, देहात में बेरोजगारी के बीच कम समय में अधिक पैसा कमाने की चाह, शराब और खनन जैसे नकद-बहुल धंधों पर नियंत्रण की होड़ और पंचायत से लेकर नगर निगम तक के ठेकों में वर्चस्व की राजनीति ने अपराध को आर्थिक प्रोत्साहन दिया। सात राज्यों के डीजीपी की चंडीगढ़ में हुई बैठक में हरियाणा पुलिस ने खुद स्वीकार किया कि प्रदेश में करीब 80 आपराधिक गैंग सक्रिय हैं, जिनमें से आठ बड़े गैंग दिल्ली-एनसीआर में फिरौती वसूलते हैं और सभी ने विदेश में अपने पॉइंट आॅफ कॉन्टैक्ट बना रखे हैं। संगठित अपराध समाज पर गहरी और बहुआयामी चोट पहुंचा रहा है।

यह केवल हिंसा या हत्या तक सीमित नहीं रह जाता, बल्कि व्यापारियों, बिल्डरों और आम नागरिकों से रंगदारी वसूली, संपत्ति विवादों में हस्तक्षेप तथा भय का माहौल पैदा कर आर्थिक गतिविधियों को बाधित करता है। व्यवसायी और उद्यमी लगातार धमकियों के साए में रहते हैं, जिससे निवेश प्रभावित होता है और स्थानीय अर्थव्यवस्था कमजोर पड़ती है। हरियाणा पुलिस की वर्तमान रणनीति गिरफ्तारी के साथ-साथ नेटवर्क को आर्थिक और लॉजिस्टिक रूप से तोड़ने पर केंद्रित है। 

यह स्वीकार करना होगा कि सिर्फ पुलिस कार्रवाई से संगठित अपराध खत्म नहीं होगा। जब तक जमीन-शराब-ठेकेदारी के विवादों का निपटारा त्वरित अदालती प्रक्रिया से नहीं होगा, युवाओं के लिए कौशल और रोजगार के विकल्प नहीं बनेंगे और गैंगस्टर संस्कृति का सामाजिक बहिष्कार नहीं होगा, तब तक हर गिरफ्तार गैंगस्टर की जगह दूसरा तैयार होता रहेगा। प्रत्यर्पण और सख्ती एक जरूरी विराम है, स्थायी समाधान नहीं। समाज को गैंगस्टरों के खिलाफ आगे आना होगा।


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