Wednesday, August 26, 2026

बरसाती मौसम में बीमारियों से बचने के लिए बरतें सावधानी


अशोक मिश्र

हरियाणा में इन दिनों हो रही बरसात ने प्रशासन और व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। भारी बारिश ने कई शहरों और कस्बों को एक विचित्र और चिंताजनक तस्वीर में बदल दिया है। सड़कों पर खुले मैनहोल, कूड़ा-कचरा से पूरी तरह भरी नालियां, पानी के साथ तैरता कचरा और घरों में घुसता सीवर का गंदा पानी मिलकर एक ऐसा दृश्य रच रहे हैं जो न सिर्फ असुविधाजनक है बल्कि जानलेवा भी साबित हो सकता है। बड़े-बड़े गड्ढे सड़कों पर फैल गए हैं जो किसी भी समय किसी वाहन या पैदल यात्री के लिए दुर्घटना का कारण बन सकते हैं। 

फरीदाबाद, गुरुग्राम से लेकर हिसार और अंबाला तक एक ही तस्वीर है - सड़कों पर घुटनों तक पानी, उस पानी में तैरता पॉलीथीन और कचरा। किसी भी स्थान पर रुका हुआ पानी मच्छरों का प्रजनन स्थल बन जाता है। डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया जैसी बीमारियों को न्यौता देता है। घरों में घुसा सीवर का पानी और नालियों का ओवरफ्लो लोगों में हैजा, टाइफाइड, पीलिया और दस्त जैसी जल-जनित बीमारियों का कारण बनता है। गीली जमीन पर फिसलन और दूषित पानी में पैर रखने से चर्म रोग और लेप्टोस्पायरोसिस जैसी समस्याएं भी बढ़ जाती हैं। ऐसे में सावधानी ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।  ऐसी स्थिति में सबसे पहले तो पीने के पानी पर ध्यान देना बहुत जरूरी है।

 बरसात में नल का पानी सीधे पीने से बचें। उसे अच्छी तरह उबालकर या फिल्टर करके ही इस्तेमाल करें। बाहर का कटा फल, खुले में बिका जूस या चाट-पकौड़ी से परहेज करें। इनमें सीवर के पानी के सूक्ष्म कण मिले होने की आशंका रहती है। घर में पानी को ढक कर रखें और कूलर, गमले, पुराने टायर या छत पर रखी किसी भी चीज में पानी जमा न होने दें। हर दो दिन में उन्हें खाली कर सुखा दें। शाम के समय पूरी बाजू के कपड़े पहनें और मच्छरदानी या मच्छर भगाने वाली क्रीम का उपयोग करें। 

थोड़ी सी समझदारी, साफ-सफाई और एक-दूसरे का ख्याल रखकर हम इस मुश्किल मौसम को भी सुरक्षित निकाल सकते हैं। अगर बुखार, उल्टी, दस्त या त्वचा संबंधी कोई समस्या हो तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें और स्वयं दवा न लें। बरसात प्रकृति का वरदान है। बरसात की वजह से ही नए-नए पौधों का जन्म होता है। धरती हरी भरी हो जाती है। तपती धरती को बरसात ही शीतल करती है। लेकिन हमारी थोड़ी सी लापरवाही इसे अभिशाप बना देती है। थोड़ी सतर्कता, थोड़ी जागरूकता और थोड़ा सहयोग अपनाकर हम न सिर्फ खुद को बल्कि अपने परिवार और पड़ोसियों को भी सुरक्षित रख सकते हैं। हरियाणा के लोग कठिन परिस्थितियों में सदियों से एकजुट रहे हैं। उनका आपसी भाईचारा दूसरे राज्यों के लिए एक मिसाल की तरह है। इस बार भी वही एकजुटता हमें इन चुनौतियों से उबरने में मदद करेगी।


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