अशोक मिश्र
रेलवे ट्रैक पार करने की आदत लोगों में बहुत पुरानी है। जब से रेल गाड़ियों का परिचालन शुरू हुआ है, तब से लोग रेलवे ट्रैक को पार करते चले आ रहे हैं। तीन चार दशक पहले तक रेल विभाग के पास इतनी सुविधाएं नहीं थीं, लेकिन अब रेलवे ने बहुत सारा विकास कर लिया है। देश के लगभग हर रेलवे स्टेशन पर जरूरत के अनुसार फुट ओवरब्रिज का निर्माण कर लिया है। इसके बावजूद लोग स्टेशन पर रेलवे ट्रैक पार करने से नहीं चूकते हैं। यह प्रवृत्ति हरियाणा में भी पाई जाती है।अक्सर हरियाणा में रेलवे ट्रैक पार करते समय होने वाले हादसे की खबरें आती रहती हैं। अकेले दिल्ली-एनसीआर सर्कल में, जिसमें हरियाणा के फरीदाबाद, गुड़गांव, पानीपत, सोनीपत और अंबाला जैसे बड़े जिले आते हैं, साल 2024 में रेलवे ट्रैक पार करने पर 2210 मामले दर्ज किए गए और इतने ही लोगों की गिरफ्तारी हुई, वहीं ट्रेन से कटकर 2562 लोगों की मौत हुई और 666 लोग घायल हुए। साल 2025 में यह संख्या और बढ़ी, 4260 केस दर्ज हुए और ट्रेन की चपेट में आने से 2402 मौतें और 582 लोगों के घायल होने की खबर है।
लोगों को रेलवे ट्रैक पार करने की इतनी जल्दी क्यों रहती है, यह सवाल मनोवैज्ञानिक से ज्यादा सामाजिक है। रेलवे ट्रैक पार करते समय व्यक्ति को लगता है कि ट्रेन अभी दूर है, वह निकल जाएगा। रिपोर्ट बताती है कि आज सबसे बड़ा कारण मोबाइल पर बात करते हुए या गाना सुनते हुए ट्रैक पार करना है। हरियाणा के कई स्टेशनों पर फुट ओवर ब्रिज या अंडरपास एक किलोमीटर दूर है, भारी सामान, बच्चों या बुजुर्गों के साथ कोई इतना घूमना नहीं चाहता, इसलिए वह पटरियों को ही शॉर्टकट बना लेता है।
भीड़ का अनुसरण की आदत लोगों को संकट में डाल देती है। जब एक व्यक्ति कूदता है तो दस उसके पीछे कूदते हैं। रेलवे प्रशासन खुद मानता है कि लोग सुरक्षा निर्देशों का उल्लंघन करते हैं, ओवरब्रिज से बचते हैं और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स का उपयोग करते हुए ट्रैक पार करते हैं। इस मामले में बचाव का रास्ता केवल सजा नहीं, बल्कि रोकथाम और आदत में बदलाव है।
रेलवे ने पिछले कुछ सालों में 6,191 किमी ट्रैक पर फेंसिंग लगाई है और पटरियों के किनारे बाड़ लगाया है, पर हरियाणा जैसे सघन आबादी वाले राज्य में यह अभी काफी नहीं है। सबसे जरूरी है हर छोटे-बड़े स्टेशन के पास 300-500 मीटर की दूरी पर फुट ओवर ब्रिज और अंडरपास बनाना, स्टेशनों के नजदीक खुले एरिया में तार और बाउंड्री वॉल लगाना, जिसके लिए रेलवे लगातार सिफारिश करती रही है। लोगों को खुद समझना होगा कि दो मिनट की बचत के लिए पूरा जीवन दांव पर लगाना कोई समझदारी नहीं। वीणा के तार की तरह जीवन भी मध्यम गति में ही सुरक्षित और मधुर रहता है, अति की जल्दबाजी में वह टूट ही जाता है।
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