बोधिवृक्ष
अशोक मिश्र
आम्रपाली वैशाली नगर की राजनृत्यांगना थी। बौद्ध साहित्य में उसका नाम अंबपाली और अंबापालिका भी मिलता है। कहा जाता है कि किसी ने आम्रपाली को जन्म लेते ही शाही उपवन में आम के पेड़ के नीचे लाकर डाल दिया था। इसलिए उसका नाम आम्रपाली पड़ा। उसे सबसे पहले राजा के माली महानामन ने देखा। वह उसे अपने गांव ले गया और उसका पालन पोषण करने लगा।वह उस समय निस्संतान था। वह जब किशोरावस्था में पहुंच तो उसके सौंदर्य की ख्याति पूरे राज्य में फैल गई। वैशाली में राजनृत्यांगना के लिए प्रतियोगिता आयोजित की जाती थी, उस प्रतियोगिता में आम्रपाली ने नृत्य किया और उसे उसकी मर्जी के बिना जनपदकल्याणी पद के लिए चुन लिया गया। हालांकि उस समय वह पुष्पक कुमार नामक युवक से प्यार करती थी और उसकी शादी होने वाली थी।
मजबूरन उसे राज गणिका जैसे कर्म के लिए विवश होना पड़ा। यही वजह है कि वह लिच्छवि पुरुषों से घृणा करती थी। एक दिन सबने सुना कि वैशाली नगर में महात्मा बुद्ध पधार रहे हैं। आम्रपाली ने महात्मा बुद्ध से उसके यहां भोजन करने का निमंत्रण दिया जिसे तथागत ने स्वीकार कर लिया। यह सुनकर वैशाली नगर के सामंत और धनाढ्य लोग क्रोधित हो उठे।
उन्होंने एक लाख कार्षापण (तत्कालीन मुद्रा) देने का लोभ दिया, लेकिन आम्रपाली ने स्वीकार नहीं किया। नियत समय पर बुद्ध ने उसके यहां भोजन किया। बाद में बुद्ध ने उसके त्याग और भक्ति को देखते हुए भिक्षुणी होने की अनुमति प्रदान कर दी। वह अपना सब कुछ त्यागकर एक भिक्षुणी हो गई। हिंदी साहित्य में आम्रपाली को लेकर बहुत कुछ लिखा गया है।
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