संजय मग्गूइन दिनों जो माहौल है, उसको देखते हुए कुछ लोगों को अब यह डर सताने लगा है कि कहीं लोकतंत्र भीड़तंत्र में न बदल जाए। उनकी आशंका का आधार शायद बांग्लादेश, श्रीलंका और नेपाल जैसे देशों में हुए जेन जेड के आंदोलन हैं। इन देशों में हुए आंदोलन के दौरान युवा अनियंत्रित हो गए थे और जो कुछ हुआ, उसे पूरी दुनिया ने देखा। इन देशों को यदि आधार बनाकर बात की जाए, तो लोकतंत्र को भीड़तंत्र में तब्दील होने की उनकी आशंका गलत नहीं है। लेकिन हमें यह बात भी याद रखनी चाहिए कि हर आंदोलनकर्ता हिंसक नहीं होता है, बलवाई नहीं होता है।
पिछले दिनों दिल्ली के जंतर मंतर पर हुए जेन जेड के आंदोलन ने यह साबित कर दिया है। संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारी तब उग्र हुए, जब पुलिस और अराजकतत्वों ने उन्हें बुरी तरह मारा-पीटा। बिना वर्दी और बैच पहने लोगों ने युवाओं को जिस तरह निशाना बनाया, लड़कियों के निजी अंगों पर प्रहार किया, उसके मुकाबले युवाओं का प्रतिरोध कुछ भी नहीं था। सच तो यह है कि पुलिस को बार-बार यह बताया-समझाया जाता है कि सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने वाला उनका शत्रु है। ब्रिटिश पीरियड से ही यह मानसिकता चली आ रही है।
शायद अब पुलिस की ऐसी मानसिकता बहुत दिन तक नहीं रहने वाली है। जैसे-जैसे समाज बदल रहा है, लोगों की मानसिकता बदल रही है, वैसे-वैसे जेन जेड और जेन अल्फा का व्यवहार भी बदल रहा है। यह बदलाव बहुत तेजी से हो रहा है। इस बात को राज्य सत्ता, प्रशासन और समाज के लोग बहुत शिद्दत से महसूस कर रहे हैं। इन दिनों तो रोज किसी न किसी प्रांत से, किसी जिले से या गांव से यह खबर आ रही है कि छोटे-छोटे बच्चों ने अपनी लड़ाई खुद लड़ने का निर्णय लिया है।
वह अब किसी संगठन या किसी सहारे का इंतजार नहीं कर रहे हैं। वह अपनी लड़ाई खुद लड़ने को तैयार हैं। उन्हें किसी किस्म का भय भी नहीं है। कल्पना कीजिए, उस बच्ची में कितना साहस होगा, जो अपने स्कूल में होने वाली असुविधा और अनियमितताओं को लेकर डिस्ट्रिक मजिस्ट्रेट कार्यालय के सामने खड़ी होकर कह रही थी कि डीएम को बुलाओ। हम उनसे ही बात करेंगे। यह बदलाव है। यही बदलाव नए और पारदर्शी शासन व्यवस्था की नींव बनने वाला है। निकट भविष्य में व्यवस्था को या तो खुद सुधरना होगा या फिर मिटना होगा।
निडर जेन अल्फा जब बड़े होकर कार्य क्षेत्र में प्रवेश करेंगे, तो निश्चित है कि वह न तो खुद गलत करेंगे और न किसी को करने देंगे। इस बदलाव को सकारात्मक रूप से लेना चाहिए। जो काम हमारी पीढ़ी नहीं कर सकी, यदि जेन जेड और जेन अल्फा करने में सफल हो गई, तो यकीन मानिए, हमारे सामने एक नया भारत होगा जिसमें भ्रष्टाचार, शोषण, दोहन और उत्पीड़न को कोई जगह नहीं मिलने वाली है। यह पीढ़ी लोकतंत्र को भीड़तंत्र में नहीं बदलने देगी। बस, हमें अपनी नई पीढ़ी पर विश्वास करना सीखना होगा।
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