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Tuesday, May 27, 2025

महात्मा बुद्ध का संदेश

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

महात्मा बुद्ध अपने जीवन काल में कई बार श्रावस्ती आए थे। कहा तो यह भी जाता है कि वे चौबीस चौमासा उन्होंने श्रावस्ती के जेतवन में बिताथा। बाइस या तेईस बार तो वे लगातार आए थे। वे अपने शिष्यों और लोगों को अहिंसा, त्याग और प्रेम का संदेश देते थे। वे कहते थे कि जरूरत से ज्यादा का संग्रह करके रखना, एक तरह से दूसरों का हक मारना है। 

एक बार जब जेतवन में वह रुके हुए थे, तो श्रावस्ती का एक अमीर आदमी उनके पास आया और पूछने लगा कि भगवन! कोई ऐसा उपाय बताएं जिससे मन को शांति मिल सके। मैं काफी बेचैन रहता हूं। महात्मा बुद्ध जानते थे कि इस व्यक्ति को हमेशा धन संग्रह की चिंता रहती है। यह अपना कारोबार बढ़ाने और धन संग्रह के चक्कर में कई बार परिजनों से भी बातचीत नहीं करता है।

इसके पास परिवार के लिए समय ही नहीं होता है। महात्मा बुद्ध ने कहा कि बिना परिश्रम से कमाया गया धन  सभी पुण्यों को नष्ट कर देता है। ऐसा धन व्यक्ति को चैन से बैठने नहीं देता है। इस वजह से ऐसे व्यक्ति से देवता भी प्रसन्न नहीं होते हैं। यदि तुम सुख से जीवन बिताना चाहते हो, तो परिश्रम करो। पसीना बहाओ। बिना श्रम किए कमाए गए धन का उपयोग सद्कार्यों में करो।

जितनी जरूरत हो, उतना रखकर बाकी सब जनकल्याण में खर्च कर दो। ऐसा करने पर तुम्हारे मन को शांति अवश्य मिलेगी। बिना परिश्रम से कमाए गए धन को छोड़कर यदि फकीर भी बन जाओगे, तब भी चैन नहीं मिलेगा। आलस्य त्यागो और जन सेवा में जुट जाओ, तभी तुम्हारा कल्याण संभव है। यह सुनकर वह व्यक्ति महात्मा बुद्ध के चरणों में गिर पड़ा और लोककल्याण में जुटने का वचन दिया।

Monday, April 14, 2025

धर्म प्रचार के लिए कलिंग जाने की इच्छा

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

महात्मा बुद्ध ने अहिंसा का संदेश जन-जन को दिया था। उन्होंने लोगों को हमेशा मिल जुलकर रहने और किसी भी तरह के विवाद से दूर रहने का संदेश दिया करते थे। उन्होंने संघ की स्थापना करके धर्म का प्रचार करने के लिए अपने शिष्यों को दूर-दूर तक भेजा। 

वह लोगों में अहिंसा का प्रचार करते हुए धर्मानुसार जीवन यापन करने की प्रेरणा देते थे। एक दिन उनका शिष्य यशोवर्मन ने आकर महात्मा बुद्ध से कहा कि वह कलिंग जाकर धर्म का प्रचार करना चाहता है। बुद्ध ने कहा कि कलिंग के लोग ईष्यालु और क्रोधी हैं। वे तुम से झगड़ा करेंगे। तुम्हारा वहां जाना उचित नहीं है। इस पर शिष्य ने कहा कि वे झगड़ा ही तो करेंगे? मारेंगे तो नहीं। कलिंग के लोग तो बहुत दयालु हैं। मैं झगड़ा ही नहीं करूंगा।

यह सुनकर बुद्ध बोले कि वे मारपीट भी कर सकते हैं। तुम कलिंग वालों को नहीं जानते हो। यह सुनकर शिष्य ने कहा कि कलिंग वाले सचमुच दयालु हैं। वे मारपीट ही करेंगे, जान से तो नहीं मारेंगे। मैं धर्म के प्रचार के लिए मार खा लूंगा। बुद्ध मन ही मन मुस्कुराए और बोले, वे तुम्हें जान से भी मार सकते हैं। 

तुम्हारा वहां जाना उचित नहीं है। यशोवर्मन भी अड़ा रहा। उसने कहा कि यदि धर्म का प्रचार करने के लिए जान भी देनी पड़े, तो समझिए कि जीवन सार्थक हो गया। आपने ही तो कहा है कि यदि लोगों की भलाई के लिए जान चली जाए, तो बुरा नहीं है। बुद्ध ने कहा कि तुम सचमुच प्रचार के लिए जाने लायक हो। 

बौद्ध प्रचारक को सहिष्णु, क्षमाशील और दयालु होना चाहिए। तुममें यह तीनों गुण हैं। इसके बाद महात्मा बुद्ध ने यशोवर्मन को धर्म प्रचार के लिए कलिंग जाने की अनुमति दे दी।