बोधिवृक्ष
अशोक मिश्र
आदमी को प्रयास करना नहीं छोड़ना चाहिए। कई बार ऐसा भी होता है कि सौ-दो सौ बार प्रयास करने के बाद भी सफलता नहीं मिलती है, लेकिन यदि मन में दृढ़ता हो, तो सौ-दो सौ बार प्रयास करने वाले को भी अगली बार के प्रयास में सफलता मिल जाती है।एक बार की बात है। एक राजा के दरबार में एक विदेशी नागरिक आया। राजा ने उसका बड़ा आदर सम्मान किया। विदेशी नागरिक कुछ दिन राजा के राज्य में रहा भी, लेकिन चलते समय उसने राजा को एक बड़ा सा सुंदर पत्थर भेंट किया। राजा उस पत्थर को देखकर बहुत खुश हुआ। विदेशी नागरिक के जाने के बाद राजा ने सोचा कि इस पत्थर से भगवान की एक सुंदर सी मूर्ति बनवाई जाए।
उसने अपने एक मंत्री को मूर्ति बनाने का काम सौंप दिया। उस पत्थर को लेकर मंत्री राज्य के एक सबसे प्रसिद्ध मूर्तिकार के पास गया और उससे सात दिन में मूर्ति बनाने को कहा। उस मूर्तिकार ने सहर्ष अनुमति दे दी। मंत्री ने मूर्ति बनाने के बदले पचास स्वर्ण मुद्राएं देने का वचन दिया। उस मूर्तिकार ने पत्थर को तोड़ने के लिए हथौड़ा मारा। पत्थर नहीं टूटा। पचास बार हथौड़े का प्रहार करने का बाद भी जब पत्थर नहीं टूटा, तो मूर्तिकार थक गया।
उसने मंत्री से कहा कि इस पत्थर से मूर्ति नहीं बन सकती है, आप इसे ले जाएं। मंत्री उस पत्थर को लेकर दूसरे मूर्तिकार के पास गया। उसने मंत्री के सामने ही हथौड़े का प्रहार किया और पत्थर टूट गया। उसने मूर्ति बनानी शुरू कर दी। ऐसा होने पर मंत्री सोचने लगा कि पहले वाला मूर्तिकार यदि एक बार और प्रयास करता तो वह अपने काम में सफल हो जाता और 50 स्वर्ण मुद्राओं का अधिकारी होता। लेकिन जल्दबादी में उसने यह मौका गंवा दिया।

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