अशोक मिश्र
हरियाणा में साइबर अपराधियों का जाल फैलता जा रहा है। इनके चंगुल में फंसने वालों में जहां अधेड़ लोग होते हैं, वहीं युवा भी इनके शिकार हो रहे हैं। फरीदाबाद में पिछले ढाई साल में साइबर ठगों ने 42 हजार से अधिक लोगों से 2.12 अरब रुपये ठग लिए हैं। इसके बावजूद ठगी का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा है। इस मामले में विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकतर लोग शेयर बाजार में भारी मुनाफा, घर बैठे कमाई, क्रेडिट कार्ड लिमिट बढ़ाने और आनलाइन निवेश के झांसे में आकर अपनी जमा पूंजी गंवा रहे हैं।कभी नूंह-मेवात का इलाका साइबर ठगी का पर्याय था। आज गुरुग्राम, फरीदाबाद, हिसार से लेकर पंचकूला तक कोई जिला अछूता नहीं है। डिजिटल इंडिया की चमक के पीछे एक काला साया बहुत तेजी से पसर रहा है और हरियाणा इसका सबसे बड़ा गवाह बन रहा है। अब ठगी की दुकान सड़क पर नहीं, मोबाइल की स्क्रीन पर लगती है। एक कॉल, एक लिंक, एक ओटीपी और पल भर में बैंक खाता साफ, साइबर ठगों की यही कार्य प्रणाली है।
पिछले पांच साल में साइबर ठगों ने राज्य के आम लोगों से करोड़ों रुपये लूटे हैं और यह जाल हर साल और फैलता गया। वैसे तो साइबर ठगी के जरिये लोगों ने कितनी रकम गंवाई है, इसका आधिकारिक आंकड़ा तो सभी सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन एक मोटे अनुमान के अनुसार पिछले पांच साल में हरियाणा के लोगों से 2,200 से 2,500 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी हो चुकी है। यह सरकारी पोर्टल पर दर्ज आंकड़ा है, असली नुकसान इससे कहीं ज्यादा है क्योंकि शर्म और झंझट के कारण 70 प्रतिशत लोग रिपोर्ट ही नहीं करते हैं।
साइबर ठगों को गिरफ्तार करने और पीड़ित व्यक्ति का पैसा वापस दिलाने के मामले में हरियाणा पुलिस ने सराहनीय कार्य किया है। उसने राष्ट्रीय स्तर पर एक मिसाल कायम की है। साइबर ठगी के मामले में केंद्र का औसत रिफंड रेट 3.85 से आठ प्रतिशत है, जबकि हरियाणा का रिफंड रेट 31 से 38 प्रतिशत तक पहुंच गया है। यानी हर तीन में से एक पीड़ित को उसका पैसा वापस मिला। हरियाणा पुलिस ने 2025 में ठगे गए पैसे का 36 प्रतिशत हिस्सा रियल टाइम में ब्लॉक कर दिया, जबकि दूसरे नंबर के राज्य की दर सिर्फ 27 प्रतिशत थी। शुरुआती छह घंटे में अगर पीड़ित व्यक्ति शिकायत कर देता है, तो हरियाणा पुलिस अब तक 70 प्रतिशत तक पैसा ब्लॉक करने में सफल रही है।
इसी सख्ती से 2025 में कुल ठगी की रकम 980 करोड़ से घटकर 630 करोड़ रुपये रह गई यानी 350 करोड़ रुपये ठगे जाने से बचा लिए गए थे। हरियाणा पुलिस ने देश के सामने यह साबित कर दिया है कि यदि इच्छाशक्ति हो तो साइबर अपराध में भी रिकवरी संभव है। इसके बावजूद हरियाणा पुलिस को अभी और सक्रिय होना पड़ेगा।
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