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Saturday, May 31, 2025

बीथोवन ने कहा, हटो मैं सिखाता हूं बजाना

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

जर्मनी के महान संगीतकार और पियानो वादक थे लुडविग वान बीथोवन। बीथोवन का जन्म 17 दिसंबर 1770 में हुआ था। वह जीवन भर स्वभावगत समस्याओं से जूझते रहे। जीवन भर अत्यंत शराब पीने की वजह से वह बुढ़ापे में लिवर सिरोसिस जैसी बीमारी से पीड़ित हो गए थे। उनका लिवर सिकुड़कर चौथाई रह गया था। कहा जाता है कि उनका पूरा परिवार शराब पीने के लिए काफी मशहूर था। 

उनकी दादी भी खूब शराब पीती थीं। उनके पिता की तो ख्याति ही शराबी के रूप में थी। इसके साथ-साथ उन्हें जवानी में ही बहरेपन की बीमारी हो गई थी। बीथोवन की मृत्यु 26 मार्च 1827 में हो गई थी। कहा जाता है कि उनके अंतिम संस्कार के समय दस हजार लोग उपस्थित थे। जिनमें अपने समय के प्रसिद्ध संगीतकार, लेखक और गणमान्य लोग शामिल थे। एक बार की बात है। 

वह कहीं जा रहे थे। रास्ते में एक झोपड़ी से एक लड़की उनकी बनाई धुन पर अभ्यास कर रही थी। वह लड़की दृष्टिहीन थी। सामने उसका पिता बैठा हुआ था। उस लड़की ने थोड़ी देर बात कहा कि पिता जी, कितना अच्छा होता कि इस धुन को बजाना सिखाने के लिए कोई संगीतकार होता। लड़की के पिता ने कहा कि हम गरीबों को कौन संगीतकार सिखाएगा। तब लड़की ने कहा कि पिताजी, मैं वायदा करती हूं कि एक दिन इस धुन को अच्छी तरह से बजाना सीख लूंगी। 

बीथोवन ने झोपड़ी में घुसकर कहा, हटो, मैं तुम्हें यह धुन बजाना सिखाता हूं। उन्होंने एक घंटे तक धुन बजाई और उस लड़की को सिखाया। लड़की ने कहा कि इतना अच्छा बजाना तो वह संगीतकार भी नहीं सिखा सकता था जिसने यह धुन बनाई है। बीथोवन ने कहा कि यह मेरी धुन है जिसे तुम बजा रही थी। यह सुनकर लड़की की आंखों में आंसू आ गए।

Saturday, April 19, 2025

मार्टिन लूथर ने चलाया सुधार आंदोलन

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

संत मार्टिन लूथर जर्मनी में ईसाई धर्म में सुधार आंदोलन चलाने के लिए जाना जाता है। उनका जन्म 10 नवंबर 1486 को जर्मनी के इस्लीडेन राज्य में हुआ था। इनके पिता हैंस लूथर किसी खान में मजदूरी करते थे। वह चर्चों में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ थे। वह ईसाई धर्म की रूढ़ियों के भी विरोधी थे। कहा जाता है कि संत लूथर को संगीत बहुत पसंद था। वह वीणा बजाते थे। 

उन्होंने अपना पहला भजन सन 1524 में लिखा था जो काफी प्रसिद्ध हुआ था। 1525 में जब मार्टिन लूथर ने ईसाई धर्म में सुधार का आंदोलन चलाया, उसी दौरान उन्होंने कैटरीना वॉन बोरा से विवाह कर लिया था। उनके छह बच्चे थे जिसमें से एक नवजात पुत्र और तेरह वर्षीय एक पुत्री की मौत हो गई थी। कहते हैं कि लूथर ने ही बाइबिल का जर्मन भाषा में अनुवाद किया था जिसकी वजह से जर्मनी में ईसाई धर्म के प्रचार-प्रसार में आसानी हुई थी। 

जब वह ईसाई धर्म में सुधारवादी आंदोलन चला रहे थे, तो ईसाई धर्म के ही कुछ लोग उनसे नाराज हो गए। इन लोगों ने लूथर के बारे में कुछ गलत कहना शुरू किया। इससे उनके शिष्य काफी नाराज हो गए। एक दिन उनके एक शिष्य ने लूथर से कहा कि आपके विरोधी आपके बारे में ऊटपटांग प्रचार कर रहे हैं। आप उनको श्राप दे दें ताकि वह नष्ट हो जाएं। 

तब मार्टिन लूथर ने कहा कि मैं कोई सर्वशक्तिमान तो हूं नहीं कि मैं उन्हें श्राप दे दूं। तब शिष्य ने कहा कि आप ईश्वर से प्रार्थना करें कि उनका मन बदल जाए। तब लूथर ने कहा कि यदि वह अपने मन से राग और द्वेष को निकालना ही नहीं चाहें, तो कोई उनकी कैसे सहायता कर सकता है। इसके लिए तो उन्हें खुद प्रयास करना होगा। ईश्वर ही उनको सच्ची राह दिखा सकता है। यह सुनकर शिष्य चुप रह गया।

चित्र--साभार गूगल