अशोक मिश्रउत्तर भारत में दिन और रात का तापमान बढ़ने लगा है। हाड़ कंपाती सर्दी से छुटकारा मिल चुका है। आने वाले दिनों में सर्दी बिलकुल खत्म हो जाएगी। तब शुरू होगी पानी की समस्या। हरियाणा के लगभग सभी जिलों में गर्मी के मौसम में पेयजल की समस्या तो होती ही है, नदियों, तालाबों और नालों का जलस्तर काफी कम हो जाने या सूख जाने की वजह से जानवरों को भी पीने के लिए पानी नहीं मिल पाता है। ऐसी स्थिति में जानवर पानी की तलाश में अपने रिहायशी क्षेत्र से निकल कर मानवीय आबादी की ओर चले जाते हैं।
शहर और गांवों में जानवरों के आ जाने की वजह से कई बार मानव और पशु दोनों को नुकसान पहुंचता है। इस समस्या से निपटने के लिए हरियाणा सरकार ने अरावली क्षेत्र में नए तालाबों के निर्माण और पुराने तालाबों की मरम्मत करके उन्हें उपयोगी बनाने का फैसला किया है। इस योजना के तहत फरीदाबाद में चार बड़े तालाब बनाने के साथ-साथ फरीदाबाद-गुरुग्राम को जाने वाली सड़क के आसपास पुराने तालाबों का जीर्णोद्धार किया जाएगा। इससे फायदा यह होगा कि इन तालाबों के आसपास रहने वाले वन्य जीवों को पानी पीने के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।
उन्हें अपने आसपास ही पीने का पानी उपलब्ध हो जाएगा जिससे उनके शहरों या गांवों में आने की आशंका भी कम हो जाएगी। वैसे भी राज्य सरकार अरावली ग्रीन वॉल योजना के जरिये पूरे अरावली क्षेत्र में नए नए तालाब बनाने और पुराने तालाबों की मरम्मत करने पर जोर दे रही है। इस योजना के तहत किसानों और अन्य लोगों को भी तालाब निर्माण के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। इस परियोजना के पहले चरण में गुरुग्राम, फरीदाबाद, नूंह, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, चरखी दादरी और भिवानी में 66 जल निकायों को विकसित और पुनर्जीवित करने की योजना है।
वैसे तालाबों के निर्माण से फायदा यह होगा कि जहां वन्य जीवों को पीने के लिए पानी मिलेगा, वहीं इन तालाबों के जरिये भूगर्भ जल स्तर में भी सुधार आएगा। तालाब और झीलों के जरिये धरती पानी सोखती रहेगी जिससे आसपास के इलाकों में पेड़-पौधों और वनस्पतियों को भी फलने-फूलने के लिए आवश्यक जल उपलब्ध हो सकेगा। अरावली क्षेत्र के आसपास बसे लोगों को सरकार की इस योजना से काफी उम्मीदें हैं। यदि इस परियोजना पर ईमानदारी से काम हुआ, तो अरावली क्षेत्र में बसी मानव आबादी को भी जल संकट से मुक्ति मिलने की पूरी उम्मीद है।
लोगों का तो यहां तक कहना है कि यदि जगह-जगह पर ऐसे तालाब बनाए जाएं, तो पूरे अरावली क्षेत्र को फिर से हराभरा किया जा सकता है। ऐसा होने पर जल संरक्षण का ध्येय तो पूरा होगा ही, पर्यावरण प्रदूषण से भी काफी हद तक निजात मिल जाएगी। लोगों को सांस लेने के लिए स्वच्छ भी मिलेगी।

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