अशोक मिश्र
हरियाणा में लगातार दो बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले नायब सिंह सैनी ने एक मीडिया संस्थान से बात करते हुए दावा किया कि पिछले 21 माह के कार्यकाल में उनकी सरकार ने साठ हजार युवाओं को बिना किसी खर्ची-पर्ची के नौकरियां दी हैं। हाल में ही उन्होंने 1500 शिक्षकों को नौकरी देने की बात कही। सीएम सैनी का कहना है कि युवाओं को रोजगार देना, उनकी सरकार की प्राथमिकताओं में है। वह राज्य के हर युवा को रोजगार देने का प्रयास कर रहे हैं। भविष्य में भी राज्य के बेरोजागर युवाओं को बिना पर्ची-खर्ची के पारदर्शिता के साथ रोजगार के अवसर मिलते रहेंगे।
हरियाणा में बेरोजगारी एक प्रमुख मुद्दा है। इस मुद्दे को लेकर विधानसभा और सड़क पर सत्ता पक्ष और विपक्ष एक दूसरे पर हमलावर रहते हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक हरियाणा बेरोजगारी में पड़ोसी राज्यों से बेहतर स्थिति में है। विधानसभा में उन्होंने अक्टूबर-दिसंबर 2024 की पीरियाडिक लेबर फोर्स सर्वे रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया था कि हरियाणा की बेरोजगारी दर 4.7 प्रतिशत, जबकि राष्ट्रीय औसत 6.4 प्रतिशत है। सरकार पीएलएफएस की रिपोर्ट को ही सही मानती है। जबकि विपक्ष जब भी प्रदेश में बेरोजगारी की बात करता है, तो वह सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) के आंकड़े को उद्धृत करता है। सीएमआईई के आंकड़ों में हरियाणा की बेरोजगारी दर कई बार देश में सबसे ऊंची, 35.7 प्रतिशत से लेकर 37.4 प्रतिशत तक दिखाई गई है, जबकि सरकार के अपने पीएलएफएस में सितंबर 2025 तक यह 15.4 प्रतिशत बताई गई थी।
दोनों सर्वेक्षणों की पद्धति अलग है, इसलिए अंतर स्वाभाविक है, राज्य के युवाओं में जिस तरह रोजगार को लेकर बेचैनी है, उससे यह बात साफ हो जाती है कि राज्य सरकार को अभी रोजगार सृजन के मामले में और मेहनत करनी होगी। सरकारी नौकरी हरियाणा में सामाजिक प्रतिष्ठा का सवाल है। जिसे सरकारी नौकरी मिल जाती है, उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा काफी बढ़ जाती है। लोग उसको सम्मान की निगाह से देखने लगते हैं। इसलिए सीएम सैनी द्वारा 60,000 भर्तियां बेरोजगार युवाओं के लिए बड़ी राहत जरूर हैं, खासकर ग्रुप सी और डी जैसी भर्तियों में।
लेकिन हर साल लाखों युवाओं के अपनी पढ़ाई पूरी करके रोजगार बाजार में आने के कारण सरकारी नौकरी से ही बेरोजगारी खत्म नहीं होती। इसके लिए निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ाने होंगे, तभी बेरोजगारी को दूर करने में सफलता मिलेगी। उद्योगों में निवेश, एमएसएमई को बढ़ावा, कौशल को बाजार की जरूरत से जोड़ना और निजी क्षेत्र में पारदर्शी भर्ती जरूरी है। हरियाणा के पास लोकेशन, इंफ्रास्ट्रक्चर और कुशल कार्यबल बहुत ज्यादा है। अगर इसे रोजगार से जोड़ने में राज्य सरकार सफल हो जाती है, तो नारा नौकरी का संकट बदलकर नौकरी का अवसर बन सकता है।
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