अशोक मिश्रसदियों से हरियाणा पशुपालन के मामले में अग्रणी रहा है। यहां लगभग हर घर में दूध-दही और मक्खन का उपयोग होता रहा है। सबसे ज्यादा पशु शायद आज भी हरियाणा में ही पाए जाते हैं। शहरीकरण और औद्योगिक विकास के चलते लोगों ने अब पशुओं को पालना कम कर दिया है। यहां दूध और दूध उत्पादों का कारोबार सबसे ज्यादा होता है। लेकिन पशुपालक जब तक पशु दूध देने लायक रहता है, तब तक उसकी देखभाल करते हैं। जहां पशु ने दूध देना बंद किया, उसे लावारिस सड़कों पर भटकने के लिए छोड़ दिया जाता है।
हरियाणा की सड़कों पर घूम रहे बेसहारा पशु अब जान-माल के लिए खतरा बनते जा रहे हैं। हाल के महीनों में रेवाड़ी में दुकान जा रहे युवक को गाय ने सींगों पर उछालने और करीब एक मिनट तक कुचला था। यह घटना सीसीटीवी में कैद हुई थी और सोशल मीडिया पर काफी वायरल भी हुई थी। इसी जिले में पिछले दिनों रिटायर्ड कैप्टन जगराम यादव गाय ने कुचल दिया था जिनकी आज मौत हो गई है। बुजुर्ग दुकानदार प्रताप सिंह यादव गाय के हमले में घायल हो गए थे जिनकी बाद में मौत हो गई थी।
फरीदाबाद में भी स्कूटी सवार कारोबारी आशु खत्री की मौत गोवंश की टक्कर के बाद हो गई थी। इस समस्या का निवारण केवल गौशाला खोलने से नहीं होगा। पूरे हरियाणा के लिए एक मुकम्मल व्यवस्था पैदा करना होगा। सबसे पहले तो पशुपालकों की जिम्मेदारी तय करनी होगी ताकि हर पालतू गोवंश की ईयर टैगिंग, उसका आधार जैसे रजिस्ट्रेशन और छोड़ने पर भारी जुर्माना लगना चाहिए। गौशालाओं को भी केवल दान पर निर्भर रहने वाला बनाने की जगह आत्मनिर्भर इकाई बनाना होगा। गोबर से बायो सीएनजी, खाद, अगरबत्ती और गौमूत्र से कीट नियंत्रक जैसे उत्पादों पर सरकारी खरीद गारंटी मिलनी चाहिए।
सरकारी स्तर पर प्रयास पिछले दो-तीन वर्षों में तेज हुए हैं। हरियाणा सरकार का स्पष्ट लक्ष्य प्रदेश को बेसहारा गो-मुक्त बनाना बताया गया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी कई बार हरियाणा की सड़कों को लावारिस पशु मुक्त बनाने की घोषणा कर चुके हैं। इसके लिए प्रशासन, गौशालाएं और समाज मिलकर काम करें, यह निर्देश दिया गया है। प्रदेश में 619 पंजीकृत गौशालाओं के लिए वित्त वर्ष 2025-26 में 228 करोड़ 58 लाख रुपये की चारा अनुदान राशि जारी की गई है और ढांचागत सुधार के लिए अलग से बजट दिया जा रहा है। इसके बावजूद हालत सुधर नहीं रही है।
सबसे बड़ा बदलाव मुआवजे की नीति में आया है। दीन दयाल उपाध्याय अंत्योदय परिवार सुरक्षा योजना यानी दयालु-2 के तहत अब बेसहारा गाय, सांड, भैंस, नीलगाय और आवारा कुत्तों के हमले से मृत्यु, चोट या दिव्यांगता होने पर प्रभावित परिवार को पांच लाख रुपये तक का मुआवजा देने का प्रावधान किया गया है, लेकिन इतना सब कुछ करने के बाद भी हादसे कम नहीं हो पा रहे हैं।