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Tuesday, April 15, 2025

मेहनत और दृढ़ संकल्प से हुए शिक्षित

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

अगर कोई व्यक्ति पढ़ना लिखना चाहता है, तो वह अपनी शिक्षा का कोई न कोई मार्ग अवश्य तलाश लेगा। दुनिया भर में बहुत सारे ऐसे उदाहरण आपको मिल जाएंगे, जब गरीब से गरीब व्यक्ति ने पढ़ने के जुनून को पूरा करने के लिए ढेर सारा परिश्रम किया और जीवन में कुछ बनकर दिखाया। 

हमारे देश के भी कई महापुरुषों ने गरीबी से लड़ते हुए शिक्षा हासिल की और दुनिया में अपना नाम रोशन किया। ठीक इसी तरह अमेरिका के राष्ट्रपति जार्ज वाशिंगटन ने उदाहरण पेश किया था बचपन में। जब वह छोटे थे, तो उनमें पढ़ने की बहुत ललक थी। उनके माता-पिता बहुत गरीब थे। एक दिन वे एक स्कूल के प्रिंसिपल के पास पहुंचे और उनसे बोले कि मैं पढ़ना चाहता हूं, लेकिन मेरे माता-पिता स्कूल की फीस नहीं भर सकते हैं।

स्कूल में निशुल्क पढ़ने का कोई तरीका है तो बताएं। प्रिंसिपल ने कहा कि यदि तुम्हें स्कूल में पढ़ने को मिल जाए, तो तुम स्कूल के लिए क्या करोगे। इस पर बालक वाशिंगटन ने कहा कि मैं स्कूल के बगीचे और फर्श आदि की सफाई कर दिया करूंगा। प्रिंसिपल ने कहा कि ठीक है। कल से तुम पढ़ने आ जाओ। उस दिन जार्ज वाशिंगटन ने पूरे स्कूल की सफाई की और बगीचों को भी साफ सुथरा बना दिया।

अगले दिन से वह स्कूल जाने लगा। सुबह वह मन लगाकर पढ़ाई करता और स्कूल खत्म होने के बाद स्कूल के गार्डन और फर्श आदि की सफाई करता। यह सिलसिला काफी दिनों तक चलता रहा। अपनी क्लास के अच्छे छात्रों में गिने जाने वाले जार्ज वाशिंगटन अपनी प्रतिभा और लगन के चलते एक दिन अमेरिका के राष्ट्रपति बने, लेकिन वह उस प्रिंसिपल को आजीवन नहीं भूले।

Thursday, April 10, 2025

बुद्ध बोले, कांटों पर भी आ जाती है नींद

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

महात्मा बुद्ध पूरी दुनिया में शायद पहले दार्शनिक थे जिन्होंने दुख का कारण खोजने का प्रयास किया था। उन्होंने इस बात का पता तो लगा लिया था कि सांसारिक दुखों का कारण निजी संपत्ति है, तभी तो उन्होंने अपने बनाए संघ में निजी संपत्ति के नाम पर एक भिक्षा पात्र और दो जोड़ी कपड़ों को ही मान्यता दी। महात्मा बुद्ध ने लोगों को पाखंड और तमाम तरह के कर्मकांड से दूर रहने की सलाह दी। अहिंसा उनके उपदेशों का मूल आधार हुआ करता था। एक बार की बात है। वे अपना चातुर्याम मास जेतवन में बिता रहे थे।

एक दिन जब वे पर्णशय्या पर लेटे हुए थे, तो उनके एक शिष्य ने कहा कि प्रभु! आज आपको अच्छी नींद आई? बुद्ध ने शांत भाव से कहा कि हां, आज मुझे अच्छी नींद आई। तब शिष्य ने कहा कि लेकिन प्रभु! कल रात तो ठंडा बहुत था, बर्फ भी गिर रही थी। आपकी पर्णशय्या भी बहुत पतली थी। फिर आपको किस तरह अच्छी नींद आई? महात्मा बुद्ध मुस्कुराते हुए कहा कि यदि किसी धनिक के पुत्र को एक अच्छे कमरे में सोने दिया जाए जिसमें खूब मुलायम बिस्तर हो। सुख-सुविधा के सारे साधन मौजूद हों। कमरे में इत्र छिड़का गया हो, तो क्या उसे अच्छी नींद आएगी? शिष्य ने तत्काल उत्तर दिया कि यकीनन अच्छी नींद आएगी।

महात्मा बुद्ध ने अगला सवाल किया कि यदि उस धनिक पुत्र को कोई गंभीर बीमारी हो जाए, तब? शिष्य ने कहा कि तब वह अच्छी नींद या सुकून की नींद नहीं सो सकेगा। महात्मा बुद्ध ने फिर अगला सवाल किया, यदि उस धनिक पुत्र को कोई मानसिक रोग हो जाए, तब? शिष्य ने फिर वहीं जवाब दिया, जो दूसरे प्रश्न के समय दिया था। 

तब  बुद्ध बोले कि महत्वपूर्ण शैय्या नहीं है, जरूरी है मन की शांति। यदि चित्त शांत हो, तो पर्णशय्या पर भी नींद आ जाएगी। नींद तो कहते हैं कि कांटों पर भी आ जाती है। यह सुनकर शिष्य की जिज्ञासा शांत हो गई।

Sunday, April 6, 2025

टैरिफ युद्ध और वैश्विक मंदी की सुगबुगाहट

अशोक मिश्र

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को झकझोरने की बात जैसे ठान रखी है। इसकी वजह से निकट भविष्य में वैश्विक मंदी की आहट सुनाई देने लगी है। ट्रंप के फैसले से जहां अमेरिकी शेयर बाजार में घबराहट है, भारत सहित अन्य देशों के शेयर बाजार डावांडोल हो रहे हैं। किसी दिन एकाएक शेयर बाजार धराशायी हो रहे हैं, तो अगले दिन कुछ ऊपर उठ जाते हैं। शेयर बाजार का यह उतार-चढ़ाव कब संभलेगा, इसके बारे में कुछ भी निश्चित नहीं कहा जा सकता है। पिछले दिनों जब अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप ने सौ देशों की सूची जारी करते हुए रेसिप्रोकल टैरिफ की घोषणा की थी, तब यह लगने लगा था कि पूरी दुनिया में एक वॉर ट्रेड की शुरुआत होने जा रही है। आशियान देशों और यूरोपियन यूनियन के बाद अब चीन ने भी जवाबी टैरिफ की घोषणा कर दी है।
अमेरिका के चीन पर 34 प्रतिशत रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने के बाद चीन पर कुल टैरिफ 34 प्रतिशत हो गया है। एक तरह से देखा जाए तो यह अमेरिका का चीन पर बहुत बड़ा ट्रेड हमला है। चीन ने भी अब अमेरिका पर 34 प्रतिशत जवाबी टैरिफ लगाकर एक नए व्यापार युद्ध की मानो घोषणा कर दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप अपने पिछले कार्यकाल में भी टैरिफ-टैरिफ की रट लगाते रहे। उन्होंने पिछले कार्यकाल में भी चीन पर व्यापार घाटे का आरोप लगाते हुए टैरिफ लगाने की बात कही थी।
ट्रंप ने सन 2017 में 479 अरब डॉलर के अमेरिकी व्यापार घाटे की बात कही थी। पूरे चार साल तक ट्रंप हर बात पर टैरिफ-टैरिफ जपते रहे। लेकिन नतीजे उनके पक्ष में कतई नहीं आए। लाख कोशिशों के बाद भी वह अमेरिकी व्यापार घाटे को कम नहीं कर पाए। जब उनका कार्यकाल पूरा हुआ, तो अमेरिका का व्यापार घाटा 643 अरब डॉलर तक पहुंच चुका था। राष्ट्रपति बनने के तुरंत बाद ही ट्रंप ने कहा था कि चीन के साथ 200 अरब डॉलर व्यापार घाटा कम किया जाएगा। चीन के खिलाफ उन्होंने हर तरह का पैंतरा आजमाया। लेकिन हर तरह की कवायद के बाद भी व्यापार घाटा कम होने की जगह 643 अरब डॉलर पर जाकर रुका था। चीन ने सन 2020 में अमेरिका से 200 अरब डॉलर के उत्पादों को खरीदने का वायदा किया, लेकिन बाद में यह वायदा झूठा निकल गया।
वर्तमान परिस्थितियों में माना जा रहा है कि निकट भविष्य में कुछ और भी देश जवाबी टैरिफ की घोषणा कर सकते हैं। हालांकि इनमें भारत शामिल नहीं होगा। भारत अभी अपने हितों की पड़ताल में लगा हुआ है। वह इस मामले में पहले अमेरिकी पक्ष से बातचीत करके समस्या को सुलझाने की कोशिश करेगा, उसके बाद ही कोई फैसला लेगा।
निकट भविष्य में वैश्विक मंदी की बात इसलिए नहीं कही जा रही है कि टैरिफ की घोषणा के बाद डॉलर टूट गया। डाऊ जोंस करीब चार प्रतिशत गिर गया जो सन 2020 के बाद की सबसे बड़ी गिरावट है। दुनिया भर के देशों के शेयर बाजार गिर रहे हैं। असल में जिन देशों में जिस क्षेत्र में अमेरिकी टैरिफ ज्यादा होगा, उन देशों में जितने भी छोटे कारोबारी है, मध्यम दर्जे के कारोबारी हैं, वह टैरिफ बढ़ने की वजह से धीरे-धीरे बाजार की प्रतिस्पर्धा से बाहर हो जाएंगे।

नतीजा यह होगा कि एक समय बाद यह कारोबारी अपना कारोबार बंद करने के लिए मजबूर होंगे। इन क्षेत्रों में काम करने वाले लाखों लोग बेरोजगार होंगे। कमाई न होने की वजह से इनकी क्रयशक्ति में ह्रास होगा। क्रय शक्ति कम होने से बाजार में मांग निश्चित रूप से घट जाएगी। पूंजी का प्रवाह बाधित होगा। बाजार में मांग घटने का मतलब है कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी का छा जाना। आज जब दुनिया के अस्सी-नब्बे फीसदी देश अपने यहां महंगाई और बेरोजगारी की समस्या से जूझ रहे हों, उनकी अर्थव्यवस्था पर ट्रंप का टैरिफ एक मुसीबत बनकर टूटेगा।

Saturday, April 5, 2025

लोगों की मदद करने वाला ही सच्चा इंसान

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

इस दुनिया में बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो दूसरों का दुख-दर्द समझते हैं और उसकी मदद करने को तैयार होते हैं। ज्यादातर लोग दूसरों को दुखी देखकर भले ही मुंह से कुछ न कहें, लेकिन मन ही मन आनंदित होते हैं। दूसरों का दुख समझने और उसकी सहायता करने वाला ही महान कहलाता है। 

जापान में एक कवि हैं नोबारू इगुची। वह जापान में अत्यंत लोकप्रिय हैं। लोग उन्हें बुद्धिजीवी और दार्शनिक मानते हैं। वह स्वभाव से अत्यंत फक्कड़ और मनमौजी आदमी हैं। वह हमेशा प्रसन्न रहने में ही विश्वास करते हैं। कहा जाता है कि वह लोगों की मदद करने में भी बहुत आगे रहते हैं। एक बार की बात है। एक व्यक्ति आत्महत्या करने जा रहा था। वह अपनी परेशानियों से काफी तंग आ चुका था। 

तीन दिन से उसके परिवार में खाना नहीं बना था। अपनी गरीबी से तंग आकर उसने आत्महत्या करने की सोची। तभी उसकी मुलाकात इगुची से हो गई। मनमौजी स्वभाव के इगुची ने उसको समझाते हुए कहा कि मानव जीवन आत्महत्या के लिए नहीं मिला है। आत्महत्या तो कायर लोग किया करते हैं। यदि जीवन में कोई परेशानी है, तो उसे दूर करने का प्रयास करो। 

उस व्यक्ति ने अश्रुपूर्ण नेत्रों से इगुची को बताया कि उसके घर में तीन दिन से खाना नहीं बना है। उसका पूरा परिवार भूख से छटपटा रहा है। ऐसी हालत में मेरे पास आत्महत्या करने के अलावा  कोई विकल्प नहीं है। यह सुनकर कवि इगुची की आंखों में आंसू आ गए। 

उन्होंने रास्ते में एक गुप्तदान की पेटी लगवाकर लिख दिया कि जो भी जरूरतमंद हो, वह यहां से पैसे निकालकर अपना काम चला सकता है। इगुची ने उस व्यक्ति की भी मदद की। जब जापान के लोगों को इगुची के इस काम की चर्चा हुई तो वह बहुत प्रसन्न हुए।