Friday, February 13, 2026

हरियाणा में प्रदूषित जल लोगों के लिए साबित हो रहा जानलेवा


अशोक मिश्र

पलवल के छांयसा गांव में पिछले एक पखवाड़े में 14 लोगों की अस्वाभाविक रूप से मौत हो चुकी है। प्रदूषित पानी की वजह से लोगों के मरने की बात कही जा रही है। स्थानीय स्वास्थ्य विभाग ने कुछ लोगों की मौत का कारण हेपेटाइटिस बी बताया है। हरियाणा में प्रदूषित पानी की वजह से लोगों की हो रही मौत काफी चिंताजनक है। 

हरियाणा के अधिकतर जिलों के कुछ इलाकों में लोगों को प्रदूषित जल का उपयोग दैनिक जीवन में करना पड़ रहा है। इसकी वजह से केवल इंसान ही नहीं, पालतू पशुओं की भी मौत हो रही है। नूंह के तावडू उपमंडल के अंतर्गत गोयला गांव के नजदीक कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेसवे और रेलवे लाइन के बीच जहरीले केमिकल युक्त पानी पीने से नौ फरवरी को तीन गायों की मौत हो गई थी, वहीं 40 से अधिक गायों की हालत गंभीर बनी हुई थी। 

फरवरी 2026 की रिपोर्टों के अनुसार, हिसार के हांसी और उसके आसपास के क्षेत्रों में दूषित पानी पीने से बीमारियां फैलने के कारण 50 से अधिक लोगों की मौतें हो चुकी हैं।  फरीदाबाद के झाड़सेतली और मांगर गाँव में औद्योगिक प्रदूषण के कारण भूजल जहरीला हो चुका है। इस क्षेत्र में कैंसर, किडनी और लीवर की बीमारियों के कारण अब तक 30 से अधिक लोगों की मौतें हो चुकी हैं। 

हरियाणा में प्रदूषित जल की वजह से इंसान और पशुओं को अपनी जान गंवानी पड़ रही हैं। शायद ही कोई दिन ऐसा बीतता हो, जब किसी न किसी जिले में प्रदूषित जल की वजह से बीमार पड़ने या मौत होने की खबर न आती हो। राज्य में प्रदूषित पानी एक गंभीर स्वास्थ्य संकट बन चुका है। इस समस्या का समाधान जितनी जल्दी खोज लिया जाए, उतना ही अच्छा है। प्रदूषित जल के कारण हर साल पूरे राज्य में काफी मौतें हो रही हैं, जो काफी चिंताजनक है। इसका कारण औद्योगिक कारखानों से निकला अपशिष्ट, सीवर का गंदा पानी और कृषि रसायनों हैं। इनके कारण ही राज्य के अधिकतर जिलों में भूजल पीने योग्य नहीं रहा है। 

दक्षिणी और पश्चिमी हरियाणा के जिले खासतौर पर प्रदूषित जल संकट के शिकार हैं। हरियाणा के कई जिलों भिवानी, फतेहाबाद, करनाल, जिंद, सोनीपत के भूजल में यूरेनियम, नाइट्रेट और आर्सेनिक की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक पाई गई है। इसकी वजह से लोगों को कई तरह की गंभीर बीमारियां हो रही हैं। डाइंग और प्लेटिंग इकाइयों का केमिकल युक्त पानी सीधे भूमिगत जल में मिल रहा है। इसे रोकने का प्रयास उद्योगों के मालिक नहीं कर रहे हैं। सरकारी मशीनरी भी इस ओर ध्यान नहीं दे रही है। जब किसी जिले में कोई हादसा होता है, तो सरकारी मशीनरी सक्रिय होती है। कुछ दिनों तक सावधानी बरती जाती है। मरीजों को दवाइयां दी जाती हैं, लोगों में क्लोरिन के टेबलेट्स बांटे जाते हैं। उसके बाद वही पुराना रवैया अख्तियार कर लिया जाता है।

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