Saturday, March 28, 2026

नवरात्र में कंजकों को पूजने के साथ उन्हें पैदा भी होने दीजिए


अशोक मिश्र

कल अष्टमी और आज नवमी को देश भर में कन्यापूजन किया गया। जिन कंजकों को साल भर में कोई महत्व नहीं दिया जाता है, उन्हें चैत्र और शारदीय नवरात्र की अष्टमी और नवमी को बडेÞ आदर सम्मान के साथ घर बुलाया जाता है, उन्हें भोजन कराया जाता है, उनके पांव धोए जाते हैं और चलते समय अपनी आर्थिक स्थिति के अनुसार दक्षिणा भी दिया जाता है। साल में दो बार नवरात्र का व्रत रखने वाले लोग नौ दिनों तक मातृशक्ति की पूजा करते हैं। उनसे आशीर्वाद की कामना करते हैं। 

शतायु होने के साथ-साथ धन-धान्य का वरदान मांगते हैं, लेकिन जैसे ही नवरात्र के नौ दिन बीतते हैं, कन्याओं की अवहेलना शुरू हो जाती है। कुछ लोग तो नवरात्र बीतते ही अपनी गर्भवती पत्नी को लेकर अस्पताल की ओर चल देते हैं ताकि चोरी-छिपे लिंग परीक्षण कराया जा सके। यदि गर्भस्थ शिशु कन्या है, तो भ्रूण हत्या कराया जाए। वैसे तो लड़कियों की बेकदरी के कई सामाजिक और आर्थिक कारण हैं, लेकिन कन्या भ्रूण हत्या किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। 

समाज को उन प्रथाओं और मान्यताओं को बदलने की कोशिश करनी चाहिए जिनकी वजह से लोग अपने घर में बेटी को जन्म देना नहीं चाहते हैं। सबसे ज्यादा परेशानी लड़कियों के विवाह के समय होती है। देश के सत्तर फीसदी लोग जीवन भर पेट काटकर बेटी के विवाह के लिए रुपये जोड़ते हैं, ताकि वह अपनी बेटी का अच्छे से विवाह कर सकें। छोटी मोटी नौकरी करने वाले लड़के के मां-बाप दहेज के नाम पर इतना मुंह फाड़ते हैं कि लड़की का बाप दहल जाता है। 

जिसके पास जितना अधिक पैसा है, उसको उसी हिसाब से कमाऊ दामाद मिलता है। यही वजह है कि लोग दहेज न दे पाने की वजह से लड़कियों को जन्म नहीं देना चाहते हैं। वैसे तो सरकार ने दहेज लेना और देना अपराध घोषित कर रखा है, लेकिन समाज में अपनी नाक बचाने के नाम पर इसे सामान्य व्यवहार मानकर देना पड़ रहा है। जब तक पूरे समाज की मानसिकता में बदलाव नहीं आएगा, तब तक बात बनने वाली नहीं है। लोग अपनी बेटियों को गर्भ में ही मारते रहेंगे। 

इस मामले में हरियाणा बहुत पीछे नहीं है। सरकार की तमाम नीतियों और सख्ती के बावजूद साल 2025 में एक हजार लड़कों के पीछे 923 लड़कियों का ही जन्म हरियाणा में हुआ है। वर्ष 2024 में यह आंकड़ा 910 था। यही नहीं, साल 2014 में लड़कियों का लिंगानुपात 871 था। प्रदेश सरकार ने हर तरह का उपाय आजमा लिया है, इसके बावजूद कन्या भ्रूण हत्या नहीं रुक रही है। 

प्रदेश में जगह-जगह खुले अवैध क्लीनिकों में यह काम जारी है। जानकारी मिलने पर सरकार कार्रवाई करती है, संबंधित लोगों को पड़ककर जेल में डालती है, लेकिन आरोपी जमानत करवाकर अपने काम में फिर जुट जाते हैं। जब तक समाज कंजक पूजन के साथ-साथ कंजकों को जन्म देना नहीं सीखेगा, तब तक लिंगानुपात सुधरने वाला नहीं है।

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