Friday, September 5, 2025

जो भी आता, मंदिर में टंगे घंटे की तरह बजा जाता

शिक्षक दिवस पर बचपन को याद किया

अशोक मिश्र

आज शिक्षक दिवस है। माता-पिता के बाद अगर जीवन में किसी की सबसे बड़ी भूमिका होती है, तो वह शिक्षक ही होता है। शिक्षक केवल स्कूल-कालेज में ही नहीं होता है, जीवन के किसी भी मोड़ पर यदि कोई जीवन की शिक्षा दे जाए, वह भी गुरु होता है। आज जब मैं पीछे लौटता हूं, तो मुझे याद आता है लखनऊ के आलमबाग थाना क्षेत्र में स्थित छोटा बरहा मोहल्ले का बरहा जूनियर हाई स्कूल। अनगिनत दृश्य इस समय मेरी आंखों के सामने चलचित्र की तरह दिखाई दे रहे हैं। सत्या दीदी, सुरेंदर कौर, बीना सिंह, मुन्ना सिंह राठौर, हरिश्चंद्र यादव,  एसपी शुक्ल यानी शिव प्रसाद शुक्ल आदि। स्कूल से बाहर बाबू जी और भइया।

दरअसल, इन लोगों ने मेरे शरीर में समाए हुए खोट को गढ़ि-गढ़ि काढ़ने का भरसक प्रयास किया। जब-जब मौका मिला, काढ़ा, खूब काढ़ा, लेकिन खोट मुहझौंसा कुछ ऐसा समाया हुआ था कि आठवीं में रिजल्ट देते समय पांचवीं से आठवीं तक क्लास टीचर रहीं सुरेंद्र कौर को भी कहना पड़ा, भइया! मुझसे जितना बन पड़ा, जैसा बन पड़ा, तुम्हें इंसान बनाने की कोशिश की। अब आगे तुम पर और तुम्हारे नए अध्यापकों पर निर्भर है कि वह तुम्हें कितना इंसान बना सकते हैं। मार्कशीट लेते हुए मैं रो पड़ा था। आज का समय होता तो शायद ‘दुनिया को सुधारकर, धरती का बोझ उतारकर,पर हम नहीं सुधरेंगे’ गाते हुए कह देता-दीदी, आपने जितना इंसान बना दिया, उससे आगे काम चला लूंगा। इससे ज्यादा इंसान बनने की वैसे भी जरूरत नहीं है।सुरेंद्र दीदी हमें साइंस और अंग्रेजी पढ़ाती थीं। एसपी शुक्ल जी हमें भूगोल, हिंदी और संस्कृत पढ़ाते थे। वह अक्सर कहा करते थे जैसे राम को हनुमान पसंद थे, वैसे ही मुझे अशोक पसंद है। वैसे मैं अपनी कक्षा का होशियार (हो-सियार) विद्यार्थी था, लेकिन कोई ऐसा भी दिन शायद जाता हो जिस दिन मैं पिटता नहीं था।

अब मुझे याद आ रहा है। रिसेस चल रहा है। सारे लड़के-लड़कियां या तो खेलने में मस्त हैं, या फिर घर से लाया गया टिफिन खत्म करने में लगे हैं। लड़कियां ग्रुप बनाएं बाहर धीमे-धीमे स्वर में पता नहीं क्या फुसफुसा रही हैं। बीच-बीच में उनकी खिलखिलाहट भी सुनाई दे रही है। और मैं? पूरी तरह खाली क्लास में बीना की साइंस कापी दिनेश के बस्ते में, सलीम का ज्यामेट्री बाक्स मालती सिंह के बस्ते में रखने के बाद अभी-अभी कंचन का बस्ता क्लास की छत पर फेंककर आया हूं। शांति का बस्ता दिनेश की जगह और दिनेश का बस्ता छठी क्लास में रखकर अभी अभी लौटा हंू। अभी पूरी क्लास को अस्त-व्यस्त भी नहीं कर पाया था कि रिसेस खत्म होने की घंटी बज गई। घंटी बजते ही मैं बाहर की ओर भागा। जब सारे बच्चे क्लास में पहुंचे, तो मैंने प्रवेश किया ताकि लोग जान जाएं कि मैं सबसे बाद में आया हूं।

साइंस पढ़ाने सुरेंद्र मैडम आई हैं। वहीं क्लास सब्जी मंडी बना हुआ है। कोई अपनी भूगोल की कापी को  रो रहा है, तो किसी को अपना ज्यामेट्री बाक्स नहीं मिल रहा है। कोई पगलाया हुआ है कि उसका बस्तवै गायब है। सुरेंद्र कौर के सामने दिक्कत यह है कि वह पढ़ाएं या यहां जो महाभारत मची है, उसको शांत कराएं। पंद्रह-बीस मिनट बाद जब सब कुछ शांत हुआ, तो अपराधी को खोजा जाने लगा। किसने किया, किसने किया की राग भैरवी के बीच दिनेश ने कहा, दीदीजी, जब मैं रिसेस में पानी पीकर खेलने जा रहा था, तो अशोक कंचन के बस्ते से कुछ निकाल रहा था। बस क्या था? मुझ जैसे मासूम पर टूट पड़ा सुरेंद्र कौर का कहर। कितने बेंत पड़े यह न मैडम ने गिने न मुझे गिनने की फुरसत थी। सजा मिली, दो क्लास बाहर कान पकड़कर खड़े होने की। फिर तो दो पीरियड तक जो भी टीचर उधर से गुजरता। मंदिर में टंगे घंटे की तरह बजा जाता। यह लगभग रोज का सीन था। घर पहुंचता तो अगर भइया होते, तो राजेश जाकर उनके सामने कच्चा चिट्ठा खोल देता। फिर भइया भी मुझे इंसान बनाने पर तुल जाते। तस्मै श्री गुरवे नम:।

Thursday, September 4, 2025

मेरी लगन ने मुझे वैज्ञानिक बनाया

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

अल्बर्ट आइंस्टीन ने सापेक्षता का सिद्धांत देने के साथ साथ द्रव्यमान ऊर्जा समीकरण (e=mc2) भी दिया था जिसने विज्ञान के क्षेत्र में तहलका मचा दिया था। आइंस्टीन का जन्म 14 मार्च 1879 में जर्मनी के एक यहूदी परिवार में हुआ था। हालांकि इनके पिता धर्म को नहीं मानते थे। 

यही वजह है कि  इन्हें पढ़ने के लिए कैथोलिक स्कूलों में भेजा गया। आइंस्टीन को बचपन में बोलने में कठिनाई होती थी। पढ़ने-लिखने में भी कोई बहुत ज्यादा अच्छे छात्र नहीं थे, लेकिन कठिन मेहनत और लगन की वजह से ही वह दुनिया के महान वैज्ञानिक बन पाए। बचपन में उनका खूब मजाक भी उड़ाया जाता था। कुछ लोग और उनके सहपाठी तो बचपन में उन्हें मंदबुद्धि कहकर मजाक भी उड़ाते थे। 

घटना तब की है, जब आइंस्टीन का नाम पूरी दुनिया में फैल गया। एक दिन इनके पास एक युवक आया और उसने कहा कि मुझे आप कोई ऐसा गुरुमंत्र दें जिससे मैं आपकी ही तरह जीवन में सफलता पा सकूं। तब आइंस्टीन ने उस युवक को अपने बचपन का किस्सा बताया। उन्होंने कहा कि मैं पढ़ने-लिखने में अच्छा नहीं था। गणित में तो फेल हो जाया करता था। मेरे मित्र मेरा खूब मजाक उड़ाते थे। मैं सोचता रहता था कि आखिर मुझ में कौन सी कमी है जिससे मैं गणित में फेल हो जात हूं। 

गणित के भय को दूर करने के लिए मैंने गणित में रुचि लेनी शुरू की। पहले तो कुछ समझ में नहीं आया। लेकिन लगे रहने के बाद थोड़ा-थोड़ा समझ में आने लगा। कठिन सवाल फिर भी परेशान करते थे। फिर मैंने कठिन सवालों को भी हल करना शुरू किया और नतीजा तुम्हारे समाने है। मैंने लगन से ही सब कुछ हासिल किया है। तुम भी लगन से अपने लक्ष्य में जुट जाओ, सफलता जरूर मिलेगी। यह सुनकर युवक ने उन्हें धन्यवाद दिया और लौट गया।

पानी की कमी को दूर करने को नदियों के किनारे सौ टैंक बनाने की योजना

अशोक मिश्र

हरियाणा, पंजाब और दिल्ली के कई इलाकों में पानी भर जाने से बुरी तरह प्रभावित हैं। खेती बरबाद हो गई है। किसानों के सामने आर्थिक समस्या पैदा होने की आशंका है। बरसात के दिनों में जिस पानी की अधिकता यानी बाढ़ से लोग परेशान रहते हैं, वही पानी जब गर्मियों के दिनों में कम हो जाता है, तब भी लोग परेशान रहते हैं। यदि पानी की मात्रा कम रहे, तो दिक्कत और पानी की मात्रा अधिक हो जाए, तब भी दिक्कत। 

ऐसी स्थिति में यदि बरसात के दिनों में जरूरत से ज्यादा पानी को सहेज लिया जाए, तो इस पानी का उपयोग गर्मी के दिनों में किया जा सकता है। बरसात के दिनों में जो जरूरत से ज्यादा पानी है, उसको यदि तालाबों, टैंकों आदि में भरकर रख लिया जाए, तो मई जून में इसका उपयोग पीने, पशुओं को पिलाने और खेती के कामों में आ सकता है। इससे भूमि का जलस्तर भी बना रहेगा। 

वैसे आम तौर पर हरियाणा में गर्मी के दिनों में बारह लाख करोड़ लीटर पानी की कमी पड़ती है। बरसात के दिनों में इससे कहीं अधिक पानी नदियों और नालों के माध्यम से बहकर बेकार चला जाता है। वैसे जैसे-जैसे लोगों की जनसंख्या बढ़ेगी, खेती का रकबा बढ़ेगा, पानी की जरूरत बढ़ती जाएगी। इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखकर सैनी सरकार ने प्रदेश में सौ टैंक बनवाने का फैसला किया है जिसमें बरसात के दिनों का अतिरिक्त पानी सहेजा जाएगा। प्रदेश में अभी माना जाता है कि पानी की मांग 42,07,267 करोड़ लीटर पानी की मांग है। प्रदेश में विभिन्न स्रोतों से अभी कुल 30,05,930 करोड़ लीटर पानी ही लोगों को उपलब्ध हो पाता है। 

यानी लगभग 12 लाख करोड़ लीटर पानी की प्रदेश में कमी है। सरकार का मानना है कि सौ टैंक बनाकर यदि छह लाख करोड़ लीटर पानी दो साल में बचा लिया जाए, तो पानी की कमी केवल पचास प्रतिशत ही रह जाएगी। वैसे सरकारी आंकड़े के अनुसार प्रदेश में उपलब्ध कुल पानी का 84.45 प्रतिशत पानी कृषि कार्यों में ही खर्च होता है। सरकार यमुना, मारकंडा और घग्गर नदियों के किनारे टैंक बनाने की योजना बना रही है। हालांकि पचास टैंक बनाए भी जा चुके हैं। जो बन गए हैं उनका मेंटिनेंस भी चालू है। 

प्रदेश के 7403 गांवों में भूजल का स्तर काफी गिर चुका है। इनमें से रेड कैटेगरी में 2246 गांव आ चुके हैं, जबकि 52 नए गांव इनमें और जुड़ गए हैं। इन गांवों का जलस्तर 30 मीटर से नीचे जा चुका है। यदि इन गांवों में जलस्तर नहीं बढ़ा, तो हालात काफी बदतर हो जाएंगे। वहीं 20 से 30 मीटर नीचे जलस्तर वाले गांव 1243 गांव पिंक कैटेगरी में आ चुके हैं। हालांकि सुखद बात यह है कि 7403 गांवों में से 2147 गांवों में जलस्तर बढ़ रहा है।

Wednesday, September 3, 2025

राजा से करवा ली अपनी सेवा

प्रतीकात्मक चित्र
बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

व्यक्तियों के समूह से ही परिवार और परिवारों के समूह से गांव और शहर का निर्माण होता है। गांवों और शहरों के समुच्चय से ही प्रदेश और देश अस्तित्व में आते हैं। देश और प्रदेश के विकास में वहां रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका होती है। किसी की कम और किसी की ज्यादा। लेकिन किसी भी नागरिक की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता है। 

प्राचीनकाल में अफ्रीका में एक राजा हुआ करता था कमेराका। वह बहुत घमंडी और क्रूर था। अपने राजदरबार में बैठकर वह केवल अपनी प्रशंसा किया करता था और गप्पें हांकता था। यदि उसकी बात का कोई विरोध करता था, तो वह मौत या दूसरी किस्म की क्रूर सजाएं दिया करता था। उसे अपनी बुद्धि पर बहुत अभिमान था। वह मानता था कि उसके बराबर बुद्धिमान व्यक्ति दुनिया में कोई दूसरा नहीं है। 

एक दिन उसने अपने दरबार में कहा कि सब लोग मेरे सेवक हैं। उसी दरबार में बैठे बुजुर्ग बोकबार ने कहा कि दुनिया का हर आदमी एक दूसरे का सेवक है। बुजुर्ग बोकबार काफी बुद्धिमान आदमी थे  और वह अपने अध्ययन के लिए प्रसिद्ध थे। राजा नाराज हो उठा। उसने कहा कि यदि तुम आज शाम तक मुझसे अपनी सेवा नहीं करवा पाए, तो मैं तुम्हें मृत्यु दंड दूंगा। यह सुनकर दरबारी सहम गए। 

बोकबार ने कहा, ठीक है। शाम को जब राजा और बोकबार दरबार से निकलने लगे, तो सामने एक भिखारी को खड़े देखकर बोकबार ने कहा कि यदि आप कहें, तो इस भिखारी को भोजन दे दूं। जब बोकबार उस भिखारी को भोजन देने को आगे बढ़े, उनकी छड़ी गिर गई। यह देखकर राजा ने तुरंत छड़ी उठाकर बोकबार को दे दी। तब बोकबार ने कहा कि देखा, आपने मेरी सेवा की या नहीं। यह सुनकर राजा प्रसन्न हो गया। उसने बोकबार को अपना मंत्री बना लिया।

भारी बारिश के चलते उफान पर नदियां, हरियाणा सरकार सतर्क

अशोक मिश्र

पिछले काफी दिनों से हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भारी बारिश होने से हालात बदतर होते जा रहे हैं। पंजाब और हरियाणा के कई जिले बाढ़ की चपेट में हैं। दिल्ली में भी बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। पंजाब में एक हजार से अधिक गांव बाढ़ की चपेट में हैं। हरियाणा में यमुना, घग्गर, मरकंडा और टांगरी सहित  अन्य छोटी-छोटी नदियां उफान पर हैं। इन नदियों के किनारे बसे गांवों और शहरों को बाढ़ का सामना करना पड़ रहा है। मौसम विभाग ने हरियाणा के 18 जिलों के लिए यलो अलर्ट जारी किया है। 

हरियाणा में यमुना नदी किनारे के पांचों जिलों यमुनानगर, करनाल, पानीपत, सोनीपत व फरीदाबाद में प्रशासन ने अलर्ट घोषित किया है। यमुना में उफान आने के बाद इन्हीं जिलों को बाढ़ झेलनी पड़ती है। अगर थोड़ी नदियां और उफान पर आती हैं, तो हरियाणा के पांच जिलों में बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है जिनमें यमुनानगर, करनाल, पानीपत, सोनीपत व फरीदाबाद शामिल हैं। इसके बाद पानी दिल्ली में प्रवेश करता है। वैसे भी यमुनानगर, करनाल और फरीदाबाद जैसे शहर के कुछ इलाकों में पहले से ही पानी भर गया है। 

यदि बरसात नहीं रुकी, तो इन शहरों में हालात और भी बदतर हो सकते हैं। वैसे तो जिला प्रशासन को सभी आवश्यक उपाय करने के निर्देश दिए जा चुके हैं। जलभराव वाले इलाकों में पंचायत सचिवों और पटवारियों को हर समय सतर्करहने के निर्देश दिए जा चुके हैं। प्रदेश के सभी सरकारी और गैर सरकारी शिक्षा संस्थानों को चेतावनी दी जा चुकी है कि यदि कोई हादसा होता है, तो स्कूल का स्टाफ जिम्मेदार होगा। वैसे प्रदेश सरकार ने सभी जिलों में कंट्रोल रूम स्थापित कर दिया है। 

जरूरत पड़ने पर कंट्रोल रूम से लोगों की सहायता भी की जा रही है। इसके बावजूद सच्चाई यह है कि जिस इलाके में बाढ़ आती है, बहुत नुकसान करती है। बाढ़ से खासकर फसलों को नुकसान पहुंचता है। बाढ़ का पानी कई दिनों तक खेतों में भरा रहने की वजह से फसलें गल जाती हैं। यदि थोड़ी बहुत बचती भी हैं, तो उपज या तो होती ही नहीं है या फिर बहुत मामूली उपज होती है। जिससे किसानों को भारी नुकसान होता है।  कई गांवों का संपर्क भी कट जाता है। सबसे बड़ा खतरा भूमि कटाव का रहता है। 

घरों में ज्यादा दिनों तक पानी भरा रहने से दीवारें दरकने लगती हैं। ऐसी स्थिति में कई मकान गिर भी चुके हैं। बाढ़ क्षेत्र में सबसे ज्यादा परेशानी बीमारियों के फैलने से होती है। पानी में मच्छरों की तादाद बढ़ जाने से मच्छरजनित रोग फैलने लगते हैं। डेंगू, मलेरिया जैसे रोगियों की तादाद बढ़ जाती है। ज्यादा दिन तक माहौल में नमी होने की वजह से त्वचा संबंधी रोग भी फैलने लगते हैं।

Tuesday, September 2, 2025

मजाक उड़ाने वाले अंग्रेज रह गए हतप्रभ

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

एडावलथ कक्कट जानकी अम्मल ने भारतीय गन्ने की किस्मों पर शोध करके उसे जब लंदन के रायल हार्टिकल्चर सोसायटी में पेश किया, तो भारतीय उस पर लड़की होने की वजह के मजाक उड़ाने वाले अंग्रेजों को मुंह खुला का खुला रह गया। अम्मल का जन्म केरल के थलासेरी में 4 नवंबर 1897 में हुआ था। उनके पिता दीवान बहादुर एडावलाथ कक्कट कृष्णन मद्रास न्यायालय में उप न्यायाधीश थे। 

उन्हें पेड़ पौधों से काफी लगाव था। धीरे-धीरे यही लगाव उनकी बेटी अम्मल में भी पैदा होता गया। वह बचपन से ही पेड़-पौधों में रुचि लेने लगी थी। वैसे तो कृष्णन की अन्य बेटियों ने विवाह करके अपना घर बसाया, लेकिन अम्मल ने विवाह के बजाय पढ़ाई को तरजीह दी। उन दिनों लड़कियों की पढ़ाई पर कम ही लोग ध्यान देते थे। उन्होंने मिशनरीज स्कूल और कालेजों में पढ़ाई की। 

किताबों के साथ-साथ फूल, पत्ती और पेड़-पौधे उनके साथी बने। सन 1931 में उन्होंने गुणसूत्र अध्ययन पर शोध करके डॉक्टरेट की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने भारतीय गन्ने की किस्मों पर शोध करके रायल हार्टिकल्चर सोसायटी में बताया कि भारतीय गन्ने दूसरे देशों के गन्ने से कहीं ज्यादा मीठे और उत्पादनशील हैं। इसका फायदा भारतीय किसानों को काफी हुआ। भारतीय गन्ने की मांग दुनिया में बढ़ गई। अम्मल की लगन और प्रतिभा को देखते हुए जवाहर लाल नेहरू ने 1951 में उनसे भारत आने को कहा। 

भारत आने पर नेहरू ने उन्हें भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण की कार्याधिकारी बनाया। वनस्पति और कोशिका विज्ञान में अप्रतिम योगदान के लिए 1977 में अम्मल को पद्मश्री से सम्मानित किया गया। 4 फरवरी 1984 को मद्रास में उनकी मौत हो गई।

कृशकाय शरीर में अक्षय घट

कविता

-अशोक मिश्र
जब मैं पैदा हुआ तब
झूम उठा था मेरा बड़ा भाई
वह मुझे छूना चाहता था, दुलराना चाहता था
लेकिन डपट दिया था अम्मा ने, दादी, बुआ और काकी ने
हां, छूना नहीं, अभी बहुत छोटा है
थोड़े दिनों बाद जब अम्मा होती थीं इधर-उधर
चुपके से घुस आता था उस कमरे में
जहां या तो मैं सो रहा होता था
या पेट भरा होने पर चलाता रहता था हाथ पैर
तब चुपके से सहलाता था मेरे गाल
पकड़ता था मेरी नन्हीं-नन्हीं अंगुलियां
मैं भी जकड़ लेता था उसकी अंगुली
मानो मैं जकड़ लेना चाहता था भाई-भाई के रिश्ते को
जब मैंने पहली बार पकड़ी थी उसकी अंगुली
बहुत खुश हुआ था मेरा बड़ा भाई
उसने जब चूमा था मेरा माथा
तब मैं शायद मुस्कुराया था या नहीं
मुझे नहीं मालूम
जब मैं अपनी नरम-नरम अंगुलियों को
मुट्ठी का रूप देकर/चलाता था हाथ-पांव
तब खुश होकर तालियां बजाता था
मेरा बड़ा भाई
टूटा फूटा अपना झुनझुना मेरी मुट्ठी में थमाकर
ऐसे देखता था भाई कि मानो
मेरी मुट्ठी में थमा दी हो संपूर्ण संसृति की सकल संपदा
तब सचमुच/ उसकी सकल संपदा
हुआ करती थी
टूटे फूटे खिलौने, राखी के धागे,
पिछली दीवाली पर कुम्हार के घर से लाए गए
दीये, मिट्टी का अनगढ़ हाथी, बंदर, कंचे, प्लास्टिक के टुकड़े
सचमुच, उन दिनों उसका सारा संसार
यही खिलौने ही तो थे
अपनी संपूर्ण संपदा लुटाकर वह कितना खुश था।
जब मैंने सीखा था पहली बार चलना
तो लड़खड़ाने पर उसी ने बढ़ाई थी
अपनी बाहें/सहारा देने के लिए
फिर उसके ही सहारे चलना सीखा मैंने
फिर दौड़ना
और दौड़ते-दौड़ते इतना आगे निकल गया
कि वह भाई अकेला ही खड़ा रह गया
दृष्टि से विलीन होने तक
ताकता रहा मुझे/इस आस में
कि शायद मैं पीछे मुड़कर देखूंगा
लेकिन न मैं मुड़ा, न मुड़ने की जरूरत समझी।
इसके बावजूद कम नहीं हुआ उसका प्यार
समय के साथ-साथ वह लुटाता रहा अपनी संपदा
लेकिन कभी रीता नहीं भाई के प्यार का घट
और हम
साबित हुए वह अमरबेल
जो जिस के सहारे लसती है, पनपती है
उसी को सुखा देती है
चूस लेती है सारे पोषक तत्व।
आज जब बूढ़ा हो गया है मेरा भाई
कृशकाय हो चुका है पूरा शरीर
फिर भी नहीं रीता है हम भाइयों के प्रति
उसके प्यार का घड़ा
पता नहीं कैसे उस बूढ़े शरीर में
रिसती रहती हैं स्नेह और आशीर्वाद की बूंदें
ताज्जुब है न!

परिचय-----------
बलरामपुर जिले के नथईपुरवा घूघुलपुर गांव में 13 अप्रैल 1967 को मेरा जन्म हुआ। मेरे पिता दिवंगत रामेश्वर दत्त मानव मार्क्सवादी-लेनिनवादी विचारक और कवि थे। मैं पिछले 23-24 वर्षों से व्यंग्य लिख रहा हूं. कई छोटी-बड़ी पत्र-पत्रिकाओं में खूब लिखा. दैनिक स्वतंत्र भारत, दैनिक जागरण और अमर उजाला जैसे प्रतिष्ठित अखबारों में भी खूब लिखा. कई पत्र-पत्रिकाओं में नौकरी करने के बाद आठ साल दैनिक अमर उजाला के जालंधर संस्करण में काम करने के बाद लगभग दस महीने रांची में रहा. लगभग एक साल दैनिक जागरण और एक साल कल्पतरु एक्सप्रेस में काम करने के बाद साप्ताहिक हमवतन में स्थानीय संपादक, गोरखपुर से प्रकाशित न्यूज फॉक्स में समाचार संपादक और पंजाब केसरी देहरादून में उप समाचार संपादक पद पर कार्यरत रहने के बाद 27 अगस्त 2021 को पलवल से प्रकाशित होने जा रहे दैनिक देश रोजाना में समाचार संपादक के पद पर ज्वाइन किया। छह महीने बाद दैनिक देश रोजाना का संपादक बना दिया गया। तब से अद्यतन उसी पद पर कार्यरत हूं। मेरा एक व्यंग्य संग्रह 'हाय राम!...लोकतंत्र मर गया' दिल्ली के भावना प्रकाशन से फरवरी 2009 में प्रकाशित हुआ है. इसके बाद वर्ष 2013 में उपन्यास सच अभी जिंदा है भी भावना प्रकाशन से प्रकाशित हुआ। पुस्तक दयानंद पांडेय समीक्षकों की नजर में का संपादन और वर्ष 2018 को वनिका प्रकाशन से व्यंग्य संग्रह दीदी तीन जीजा पांच प्रकाशित हुआ।

हरियाणा शहर स्वच्छता अभियान में जनभागीदारी बहुत जरूरी

अशोक मिश्र

इन दिनों हरियाणा शहर स्वच्छता अभियान के तहत सफाई अभियान चलाया जा रहा है। रविवार को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सहित भाजपा के सांसदों, मंत्रियों, विभिन्न विभागों के अधिकारियों और स्थानीय निकाय के कर्मचारियों ने सफाई अभियान में भाग लिया। मंत्रियों और अधिकारियों के अभियान में शामिल होने लोगों में भी थोड़ा बहुत उत्साह रहा। भाजपा कार्यकर्ताओं ने भी अपने-अपने इलाकों में सफाई अभियान में भाग लेकर यह दिखाने का प्रयास किया कि वह भी शहर की सफाई को लेकर जागरूक हैं। 

यह अच्छी बात है कि सबने सफाई अभियान में भाग लेकर लोगों को यह संदेश देने का प्रयास किया कि प्रदेश को स्वच्छ रखना बहुत जरूरी है। शहर के गंदा रहने से लोगों के बीमारियों से ग्रसित होने की आशंका रहती है, वहीं शहर की छवि भी खराब होती है जैसी पिछले कुछ दिनों से गुरुग्राम में पिछले काफी दिनों से चारों फैली गंदगी को लेकर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बदनामी हो रही है। 

स्वच्छता अभियान की मंशा तो बहुत अच्छी है, लेकिन सवाल यह उठता है कि यदि यही स्वच्छता अभियान मई-जून महीने में चलाया गया होता तो शायद बहुत बेहतर होता। वैसे सैनी सरकार ने स्थानीय निकायों को यह चेतवानी बहुत पहले दे दी थी कि प्रदेश के सभी जिलों में नालों और सड़कों पर पड़ी गंदगी की सफाई 15 जून तक हो जानी चाहिए। यदि किसी इलाके में सफाई नहीं हुई, तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यदि उसी समय सफाई हो गई होती, तो आज जरा सी बारिश होने पर सड़कों और गलियों में जलजमाव नहीं दिखता। 

हालत यह है कि प्रदेश के लगभग सभी जिलों में थोड़ी सी बरसात होने पर सड़कों पर पानी जमा हो जाता है। सड़कों पर खुले मैनहोल और सीवेज बरसात में जानलेवा साबित हो रहे हैं। अब जब बरसात अपने चरम पर है,सड़कें पानी से भरी हुई हैं। ऐसी स्थिति में शहरों में स्वच्छता अभियान चलाने का कितना फायदा होगा, इस पर भी विचार करना होगा। आज बरसात के चलते सड़कों पर पानी और कीचड़ दिखने का कारण मई-जून में नालियों, सीवरेज की सफाई और मैनहोल की ठीक से देखभाल न होना है। वैसे यह स्वच्छता अभियान 25 नवंबर तक चलेगा। 

ऐसी स्थिति में बरसात खत्म होते ही यदि स्थानीय निकाय के अधिकारी-कर्मचारी सहित स्वयंसेवी संस्थाएं स्वच्छता अभियान चलाएं तो नगरों को साफ सुथरा रखा जा सकता है। इसके लिए जरूरी है कि जनभागीदारी के लिए स्कूलों और कॉलेजों के छात्रों को स्वच्छता के प्रति जागरूक किया जाए। साथ ही रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों और गैर-सरकारी संगठनों के सदस्यों को भी अभियान से जोड़ा जाए।

Monday, September 1, 2025

बिच्छू का चरित्र है डंक मारना

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

अगर मनुष्य में शील यानी चरित्र न हो, तो उसके सारे गुण बेकार समझे जाने चाहिए। चरित्र ही वह गुण है जिससे व्यक्ति के बारे में पूरी जानकारी मिल जाती है। अपने चरित्र से ही व्यक्ति महान बनता है और चरित्र अच्छा न होने की वजह से वह पूरी दुनिया में बदनाम होता है। यही वजह है कि हमारे धर्म ग्रंथों और पौराणिक ग्रंथों में सबसे ज्यादा सद्चरित्र की प्रशंसा की गई है। जिस व्यक्ति का चरित्र दूषित होता है, समाज में उसको प्रतिष्ठा नहीं मिलती है, भले ही वह व्यक्ति समाज के लिए कितना ही उपयोगी क्यों न हो? 

समाज के लोग दुष्चरित्र को अच्छी निगाह से नहीं देखते हैं। इंसान को अपने शील पर अडिग रहना चाहिए। एक बार की बात है। एक संत नदी में स्नान कर रहे थे। उन्होंने देखा कि एक बिच्छू पानी में बहा जा रहा है। बिच्छू को पानी में बहता देखकर संत को दया आ गई। 

उन्होंने सोचा कि इस निर्बल जीव के जीवन की रक्षा करनी चाहिए। यही सोचकर उन्होंने इधर उधर देखा और कोई वस्तु न मिलने पर उन्होंने हाथ से पकड़कर उसे नदी से बाहर करने की सोची। उन्होंने उस बिच्छू को हाथ से पकड़कर पानी से निकालने का प्रयास किया,तो उस बिच्छू ने उन्हें डंक मार दिया। इससे संत निराश नहीं हुए। उन्होंने अगली बार फिर प्रयास किया। इस बार भी वही हुआ। 

पांचवीं बार साधु को बिच्छू को बाहर निकालने में सफलता मिल गई। घाट के किनारे खड़ा एक शिष्य यह देख रहा था। शिष्य ने संत से पूछा-जब बिच्छू आपको डंक मार रहा था, तो आपने क्यों बचाया? संत ने कहा कि बिच्छू छोटा जीव है। उसका चरित्र डंक मारना है, लेकिन मनुष्य होने के नाते मेरा धर्म उसे बचाना था। सबको अपने चरित्र का पालन करना चाहिए।

भारी बारिश और बाढ़ जैसी समस्या से जूझ रहे पंजाब और हरियाणा

अशोक मिश्र

हरियाणा और पंजाब के बीच पानी को लेकर एक बार फिर तकरार के आसार पैदा हो रहे हैं। गर्मी के मौसम में पंजाब सरकार से अतिरिक्त पानी देने की मांग करने वाली हरियाणा सरकार ने पंजाब सरकार और भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड को पत्र लिखकर कहा है कि पंजाब की ओर से छोड़े जा रहे पानी की मात्रा कम की जाए। हरियाणा में भारी बारिश के चलते पानी की मांग कम हो गई है। इसकी वजह से ढाई हजार क्यूसेक पानी नहरों में कम किया जाए। पंजाब के ज्यादा पानी छोड़ने से हरियाणा के कई जिलों में जलभराव हो गया है। खेतों में पानी भर जाने से फसलें बरबाद हो रही हैं। बाढ़ की वजह से खेतों की मिट्टी बह रही है। 

यह कैसी विडंबना है कि अप्रैल महीने में हरियाणा सरकार पंजाब पर कम पानी छोड़ने का आरोप लगा रही थी। दरअसल, पर्वतीय राज्यों में पिछले काफी दिनों से हो रही भारी बारिश की वजह से दोनों राज्यों में बाढ़ का संकट पैदा हो गया है। पर्वतीय राज्यों के साथ-साथ पंजाब और हरियाणा में भी भारी बारिश हो रही है। इसकी वजह से पंजाब के ही नौ जिले बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं। इनमें फाजिल्का, फिरोजपुर, कपूरथला, पठानकोट, तरनतारन, होशियारपुर, मोगा, गुरदासपुर और बरनाला शामिल है। 

सरकारी आंकड़ों के अनुसार बाढ़ से अभी तक कुल 1312 गांव प्रभावित हुए हैं। ऐसा ही हाल हरियाणा का भी है। यमुनानगर, फरीदाबाद, हिसार, फतेहाबाद, जींद, सोनीपत और नारनौल जैसे जिले बाढ़ जैसी हालात से गुजर रहे हैं। इन जिलों में भारी बारिश और पंजाब द्वारा छोड़े गए पानी ने लोगों के सामने भीषण समस्या खड़ी कर दी है। इन जिलों में अच्छी खासी संख्या में गांव टापू जैसे हो गए हैं। लोगों को बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिल रहा है। खेतों में पानी भर जाने की वजह से फसलें बरबाद हो रही हैं। 

बाढ़ के प्रवाह में खेत की मिट्टी कटाव का सामना कर रही है। ज्यादा दिन जलभराव रहने की वजह से विभिन्न प्रकार की मौसमी बीमारियों के फैलने का अंदेशा भी है। बड़ी संख्या में मच्छरजनित रोगों से पीड़ित लोग अस्पताल पहुंच रहे हैं। यदि खेतों में भरा हुआ पानी जल्दी से नहीं निकाला गया, अगले महीने से होने से गेहूं आदि की बुआई भी प्रभावित हो सकती है। मिट्टी के ज्यादा गीले रहने से गेहूं की बुआई नहीं की जा सकती है। ऐसी स्थिति में दोहरी मार का सामना करना पड़ सकता है। एक तो वर्तमान बाढ़ और भारी बारिश की वजह से धान आदि की फसल बरबाद हो रही है, दूसरी खेत में ज्यादा नमी रहने से गेहूं की फसल भी नहीं बोई जा सकेगी। ऐसी स्थिति में किसान तो बरबाद हो जाएगा। प्रदेश सरकार का मुआवजा उनकी परेशानी को दूर करने के लिए पर्याप्त नहीं होगा।