अशोक मिश्रदिल्ली एनसीआर में ग्रैप चार की पाबंदियां लागू कर दी गई हैं। दिल्ली के कुछ इलाकों में रविवार को साढ़े चार सौ से ज्यादा वायु गुणवत्ता सूचकांक पहुंच गया था। यह स्थिति इंसानों के लिए काफी खतरनाक मानी जाती है। हवा में मौजूद कण धीरे-धीरे इंसान के लंग्स, हार्ट और ब्रेन पर असर डालते हैं। इसके शुरुआती संकेत अक्सर सामान्य थकान या सर्दी-खांसी जैसे लगते हैं, इसलिए लोग इन्हें इग्नोर कर देते हैं। लेकिन धीरे-धीरे यही प्रदूषक अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक और यहां तक कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ा देते हैं।
लोगों को पता भी नहीं चलता है। कई बार तो लोग इसे सामान्य मौसमी बीमारी समझकर टालते रहते हैं, लेकिन जब परेशानी बढ़ जाती है, तब उन्हें पता चलता है कि वह कितनी बड़ी परेशानी से जूझ रहे हैं। यही वजह है कि वायु प्रदूषण को साइलेंट किलर कहा जाता है। दिल्ली एनसीआर सहित पूरे हरियाणा में वायु प्रदूषण काफी गंभीर स्थिति में पहुंच चुका है। ग्रैप चार की पाबंदियां लागू होने के बावजूद राज्य के कई शहरों में उल्लंघन किया जा रहा है। वैसे तो पूरे राज्य में भवन निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। लेकिन कई शहरों में न केवल भवन निर्माण किए जा रहे हैं, बल्कि खुले में ही बालू, मौरंग और भवन निर्माण में काम आने वाली वस्तुएं रखी जा रही हैं।
वैसे तो डीजल से चलने वाले वाहनों पर रोक लगा दी गई है, लेकिन सड़कों पर डीजल से चलने वाले वाहन धड़ल्ले से दौड़ रहे हैं। प्रदेश में पराली जलाने को लेकर पूरी तरह रोक है। खुशी की बात यह है कि पराली जलाने के मामले में काफी कमी आई है। वैसे भी अब खेतों में पराली रह भी नहीं गई है क्योंकि पराली का निस्तारण करके अब गेहूं की बुआई हो चुकी है, लेकिन इतना होने के बाद भी कभी-कभार पराली जलाने की घटनाएं प्रकाश में आ ही जाती हैं। सड़कों का कूड़ा जलाना हर मौसम में प्रतिबंधित रहा है, लेकिन वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच जाने के बावजूद कूड़ा जलाया जा रहा है।
स्थानीय निकाय के कर्मचारी या जिन कंपनियों को कूड़ा उठाने का ठेका दिया गया है, कूड़े को जला देने में ही अपनी भलाई समझ रहे हैं। वे यह बात अच्छी तरह जानते हैं कि इससे पर्यावरण प्रदूषित होगा और वे भी इसकी चपेट में आएंगे। इसके बावजूद वे लापरवाही करते हैं। विभिन्न शहरों में कबाड़ का काम करने वाले लोग शाम बीत जाने के बाद सड़क किनारे या किसी खाली जगह पर कबाड़ ले जाकर उसे आग के हवाले कर देते हैं। इसके बाद मौके से वह गायब हो जाते हैं ताकि कानून की गिरफ्त में न आ सकें। प्रदूषण की स्थिति में सड़कों पर पानी के छिड़काव का नियम बनाया गया है, लेकिन कुछ ही शहरों में इस नियम का पालन किया जाता है।

No comments:
Post a Comment