बोधिवृक्ष
अशोक मिश्र
बिहार में स्थित वैशाली को दुनिया के पहले गणतंत्र का जन्मदाता माना जाता है। कहते हैं कि महाभारत काल में इस नगर को विशाल नामक राजा ने बसाया था, जिसे कालांतर में वैशाली के नाम से जाना गया। इस नगर का संबंध जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थंकर स्वामी महावीर और महात्मा बुद्ध से भी है। स्वामी महावीर का यहीं जन्म हुआ था और महात्मा बुद्ध ने यहां अपने जीवन का अंतिम प्रवचन दिया था और अपने निर्वाण की घोषणा की थी।
एक बार की बात है। प्राचीन काल में वैशाली महानगर में पूरे उत्साह के साथ राज्य महोत्सव मनाया जा रहा था। राजा से लेकर प्रजा तक महोत्सव में भाग ले रही थी। उसी समय पड़ोसी राज्य के सेनापति ने वैशाली पर आक्रमण कर दिया। अचानक हुए हमले की वजह से वैशाली वालों को संभलने का मौका ही नहीं मिला। वह हार गए। शुत्र सेनापति ने वैशाली की प्रजा पर जुल्म करना शुरू कर दिया।
इसे देखकर वैशाली का सेनापति बहुत विचलित था। वह शत्रु सेनापति के पास जाकर बोला कि आप हमारी प्रजा पर जुल्म करना बंद कर दीजिए। शत्रु सेनापति ने सामने बह रही नदी की ओर संकेत करते हुए कहा कि नदी में जितनी देर तक आपका सिर डूबा रहेगा, तब तक प्रजा पर कोई अत्याचार नहीं होगा। वैशाली का सेनापति नदी में कूद गया। काफी देर हो गई, सेनापति बाहर नहीं आया।
तब तक प्रजा पर अत्याचार रुका रहा। शत्रु सेनापति ने गोताखोरों को पानी में उतारा। गोताखोरों ने लौटकर बताया कि सेनापति ने नदी तल में एक बड़े से चट्टान को अपनी बाहों से जकड़ रखा है। अपनी प्रजा के प्रति इतना समर्पण देखकर शत्रु सेनापति का हृदय द्रवित हो गया। वह तुरंत अपने राज्य वापस लौट गया।

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