अशोक मिश्र
पश्चिमी एशिया में पिछली 28 फरवरी से चल रहे युद्ध का प्रभाव अब विश्व स्तर पर दिखाई देने लगा है। इससे हरियाणा अछूता कैसे रह सकता है। हरियाणा में भी एलपीजी और डीजल-पेट्रोल का संकट गहराने लगा है। लोगों में एलपीजी, डीजल पेट्रोल को लेकर दहशत फैलती जा रही है। इसमें अफवाह फैलाने वाले लोगों का बहुत बड़ा हाथ है। प्रदेश सरकार बार-बार एलपीजी, डीजल-पेट्रोल भरपूर होने की बात कह रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर ऐसा दिखाई नहीं दे रहा है।हां, यह बात सही है कि युद्ध से पहले जहां लोग जरूरत पड़ने पर एलपीजी बुकिंग कराते थे, वहीं अब लगभग हर आदमी गैस सिलेंडर भरवा कर रख लेना चाहता है ताकि भविष्य में किसी प्रकार की परेशानी न हो। ऐसी स्थिति में उन लोगों को ज्यादा दिक्कत होने लगी है जिसके पास वैध एलपीजी कनेक्शन नहीं है। ऐसे लोगों में ज्यादातर वह लोग शामिल हैं, जो दूसरे राज्यों से हरियाणा में नौकरी या मजदूरी करने आए हैं। अपना घर-बार छोड़कर हरियाणा में रोजगार की तलाश में आए लोग स्थायी नहीं रहते हैं।
यह कुछ दिनों तक काम करते हैं, फिर अपने घर लौट जाते हैं। कुछ महीनों बाद यह फिर काम की तलाश में लौटते हैं। ऐसे लोगों का कोई स्थायी पता नहीं होता है। ऐसे लोग वैध एलपीजी कनेक्शन लेने की जगह छोटे गैस सिलेंडर से अपना काम चलाते हैं। गैस और तेल संकट की वजह से पिछले लगभग एक महीने से छोटा वाला सिलेंडर भरा नहीं जा रहा है। जब वैध वालों को ही गैस नहीं मिल पा रही है, ऐसे में छोटे गैस सिलेंडर वालों को जरूर परेशानी हो रही है।
कालाबाजारी करने वालों ने भी आपदा में अवसर तलाश लिया है। वह महंगे दाम पर गैस बेच रहे हैं। राज्य में कुछ जगहों पर पांच सौ रुपये प्रति किलो गैस बिकने की खबरें अखबारों में छप रही हैं। ऐसी स्थिति में रोजाना कमाकर खाने वाले दिहाड़ी मजदूरों, दूसरे राज्यों से आने वाले कामगारों के लिए परेशानी खड़ी हो गई है। पहली बात तो इन्हें रोज काम भी नहीं मिल पाता है। युद्ध के चलते काम-धंधा भी मंदा चल रहा है। ऐसी स्थिति में तीन-चार सौ रुपये किलो गैस खरीद पाना दिहाड़ी मजदूरों और निजी संस्थानों में काम कर रहे अस्थायी कर्मचारियों के लिए मुश्किल हो रहा है।
ऐसी स्थिति में अपने घर लौट जाने के अलावा कोई विकल्प भी नहीं बच रहा है। हालात इतने विकट हैं कि डीजल-पेट्रोल और एलपीजी की वजह से लाकडाउन जैसे हालात पैदा हो गए हैं। उद्योग-धंधे बंद होते जा रहे हैं। इन उद्योगों में काम कर रहे लोग बेरोजगार होने लगे हैं। ऐसी हालत में इनके पास अपने घर लौट जाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प भी नहीं बचा है। यही वजह है कि दूसरे राज्यों से आए मजदूरों में भगदड़ मची हुई है। गैस महंगी होने से खाना भी महंगा होता जा रहा है। ऐसी हालत में उन्हें घर लौटने के अलावा कुछ सूझ नहीं रहा है।

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