बोधिवृक्ष
अशोक मिश्र
आदमी को हमेशा समय की कद्र करनी चाहिए। दुनिया में सबसे कीमती समय होता है। यदि इसे गंवा दिया, तो आदमी के पास कुछ भी नहीं बचता है। इसी तरह धैर्य इनसान की सबसे बड़ी खूबी होती है। यदि मनुष्य धैर्यवान नहीं है, तो वह जीवन में कुछ भी हासिल नहीं कर सकता है।एक बार की बात है। एक साधु नदी के किनारे बैठकर चिल्लाता रहता था, जो चाहोगे, सो पाओगे। लोग उधर से गुजरते। साधु को चिल्लाते हुए सुनते और मुस्कुराकर निकल जाते थे। लोग उस साधु की बात पर विश्वास नहीं करते थे। उसे पागल मानते थे। लेकिन साधु नियम से नदी के किनार आता और यही रट लगाता, जो चाहोगे, सो पाओगे। एक दिन की बात है। एक युवक ने साधु की बात सुनी, तो उसके पास गया।
उसने साधु को प्रणाम किया और उसके बगल में बैठ गया। थोड़ी देर बाद साधु ने उससे पूछा, बेटा! तुम भी किसी कामना के साथ यहां आए हो? युवक ने कहा कि मैंने आपकी बात सुनी थी। मैं भी जो चाहता हूं, वह पाना चाहता हूं। साधु ने कहा कि तुम क्या चाहते हो? युवक ने कहा कि मैं जो कुछ भी चाहता हूं, वह पूरा हो सकता है? साधु ने कहा कि हां बेटा! जो चाहते हो, वह तुम्हें हासिल हो सकता है।
उस युवक ने कहा कि मैं हीरों का बहुत बड़ा व्यापारी बनना चाहता हूं, क्या यह संभव है? साधु ने उसकी एक हथेली पर अपना हाथ रखते हुए कहा कि मैं तुम्हें एक हीरा दे रहा हूं। इससे तुम हजारों हीरे बना सकते हैं। वह हीरा है समय। इसे कसकर पकड़े रहना। दूसरे हाथ पर अपनी हथेली रखते हुए साधु ने कहा कि इस हाथ में दुनिया सबसे बढ़िया मोती धैर्य दे रहा हूं। इन दोनों की बदौलत तुम दुनिया के सबसे बड़े व्यापारी बन सकते हो। साधु की बात सुनकर युवक ने उसे प्रणाम किया और अपना रास्ते चला गया।

























