अशोक मिश्रअरावली की पहाड़ियों में प्रस्तावित जंगल सफारी पर रोक लगा दी गई है। सुप्रीमकोर्ट ने हाल ही में अरावली की ऊंचाई को लेकर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की थी। इसके बाद जब वैज्ञानिकों और पर्यावरण प्रेमियों ने इसका विरोध किया और मामले को लेकर दोबारा सुप्रीमकोर्ट में गए, तो सुप्रीम कोर्ट ने अपने पुराने फैसले पर न केवल रोक लगा दी, बल्कि अब जंगल सफारी के निर्माण पर भी रोक लगा दी है।
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान अरावली की पहाड़ियों में किसी भी तरह के गैर वानिकी कार्य पर रोक लगाते हुए कहा है कि अगली सुनवाई तक अरावली क्षेत्र में कोई भी अंतिम निर्णय नहीं लिया जाए या विस्तृत कार्य योजना जमा की जाए। वैसे सरकार जंगल सफारी विकसित करने के लिए प्रारंभिक सर्वे और कॉन्सेप्ट प्लान तैयार करा रही थी। भूमि की पहचान के साथ-साथ मास्टर प्लान का प्रारूप तैयार कर लिया था। सरकार अब सुप्रीमकोर्ट के निर्देश के बाद सभी पहलुओं पर दोबारा विचार करेगी, समीक्षा करेगी।
यह भी संभव है कि सरकार जरूरत पड़ने पर परियोजना के स्वरूप में थोड़ा बहुत बदलाव लाए। सरकार का कहना है कि जंगल सफारी के निर्माण के बाद पर्यावरण संरक्षण होता। सफारी की वजह से अरावली क्षेत्र में हो रहा पेड़ों का अवैध कटान ही नहीं रुकता, बल्कि खनन पर भी रोक लगती। वन और खनन माफिया लोगों की मौजूदगी की वजह से अपना काम नहीं कर पाते। उनकी गतिविधियों पर लगाम लग जाती। इतना ही नहीं, नूंह और गुरुग्राम के दस हजार एकड़ क्षेत्र में जंगल सफारी विकसित होने से प्रदेश में पर्यटकों का आवागमन बढ़ेगा। इससे प्रत्यक्ष और परोक्ष रोजगार बढ़ेगा, राज्य के लोगों की आय में भी बढ़ोतरी होगी।
दुनिया के सबसे बड़े जंगल सफारी के चलते प्रदेश राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन नक्शे पर अपनी जगह और पहचान बनाने में सफल होगा। सरकार का यह तर्क कहीं से भी गलत नहीं है, लेकिन जंगल सफारी बनने से नुकसान भी कम नहीं होता। अरावली क्षेत्र में रहने वाले वन्य जीवों को लोगों के आने से जो परेशानी होती, वह भी ध्यान रखना होगा। वन्यजीवों को प्राकृतिक वातावरण नहीं मिल पाता, इससे वह मानव बस्तियों की ओर भी रुख कर सकते थे।
इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता है कि अरावली की पहाड़ियां हजारों साल से गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली के लिए फेफड़े का काम करती रही है। अरावली की पहाड़ियों की वजह से ही लोगों को स्वस्थ हवा मिलती रही है। प्रदूषण पर काफी हद तक रोक लगती रही है, लेकिन मोटर गाड़ियों, कल-कारखानों के साथ-साथ पराली जलाने जैसी घटनाओं ने प्रदूषण की समस्या को काफी हद तक बढ़ा दिया है। अरावली की पहाड़ियों पर होने वाले पेड़ों की अवैध कटान से भी बुरा प्रभाव पड़ा है। प्रदूषण की समस्या गहराई है।

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