Showing posts with label #खनन माफिया #अरावली पहाड़ियां #अवैध खनन #प्रशासन #तकनीक सर्वेक्षण. Show all posts
Showing posts with label #खनन माफिया #अरावली पहाड़ियां #अवैध खनन #प्रशासन #तकनीक सर्वेक्षण. Show all posts

Sunday, May 10, 2026

हरियाणा के इकोसिस्टम को बचाने के लिए अवैध खनन रोकना जरूरी

अशोक मिश्र

पहाड़ हो, नदी हो, खेत हो या खलिहान, खनन माफियाओं की नजर से कुछ भी नहीं बचा है। पिछले कई वर्षों से खनन माफिया अरावली पहाड़ियों का सीना छलनी कर रहे हैं। नदियों से रेत निकालकर मुनाफा कमा रहे हैं। खेत की मिट्टी तक चोरी करके बेच रहे हैं। इन पर रोक लगाने के कई प्रयास सरकार और कोर्ट कर चुकी है। लेकिन शासन-प्रशासन की सक्रियता से कुछ दिनों तक खनन माफिया चुप बैठ जाते हैं, उसके बाद उनका कारोबार फिर चालू हो जाता है। हरियाणा में अवैध खनन के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। 

खनन माफिया मुख्य रूप से यमुनानगर, पलवल, मेवात और अरावली पहाड़ियों में सक्रिय हैं। एक आंकड़े के अनुसार, अप्रैल 2019 से अक्टूबर 2024 तक 10,676 से अधिक मामले दर्ज किए गए। अवैध खनन करने वालों से इन वर्षों में सरकार ने लगभग 345.74 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अवैध खनन में लगे वर्ष 2025 में 1,186 से अधिक वाहन जब्त किए गए। इसके बावजूद प्रदेश में अवैध खनन पर रोक नहीं लग पाई है। सच कहा जाए, तो अवैध खनन पर कोई भी सरकार या प्रशासन तब तक रोक नहीं लगा सकती है, जब तक शहर और ग्रामीण क्षेत्र के लोग जागरूक नहीं होंगे। 

सरकार चप्पे-चप्पे पर पहरा नहीं बिठा सकती है। अवैध खनन रोकने के लिए जरूरी है कि जिस क्षेत्र में अवैध खनन हो रहा है, उसकी जानकारी प्रशासन तक पहुंचाएं। यदि कोई कार्रवाई नहीं होती है, तो वह शासन से संपर्क करें। सरकार उनकी शिकायत पर कार्रवाई जरूर करेगी। वैसे पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने भी पिछले दिनों आदेश दिया है कि प्रदेश की सभी खनन साइट्स की अनिवार्य रूप से हर वर्ष ड्रोन मैपिंग करवाई जाए, ताकि अवैध खनन की गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी रखी जा सके। 

कोर्ट का यह भी कहना है कि केवल तकनीक सर्वेक्षण और वैज्ञानिक रिकॉर्डिंग के जरिए ही खनन नियमों के उल्लंघन को सही ढंग से पकड़ा और रोका जा सकता है। हाई कोर्ट ने हरियाणा के मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि वह तुरंत आवश्यक आदेश जारी कर राज्य की सभी खनन साइट्स की वार्षिक ड्रोन मैपिंग सुनिश्चित करें। हरियाणा स्पेस एप्लीकेशन सेंटर ड्रोन और सैटेलाइट इमेजरी के जरिए पूरे राज्य के खनन क्षेत्रों का वैज्ञानिक डेटा जुटा सकता है। 

इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता है कि अवैध खनन के कारण राज्य के पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) को भारी नुकसान हो रहा है। प्रदेश में बाढ़ का खतरा बढ़ता जा रहा है। प्रदेश में हो रहे अवैध खनन से सरकारी खजाने को भी भारी नुकसान हो रहा है। हालात यह है कि अरावली के जंगलों में अनुमत सीमा (78 मीटर) से कहीं अधिक, 250 मीटर तक खुदाई की जा रही है। प्रदेश के इकोसिस्टम को बचाने के लिए प्रदेश में हो रहे अवैध खनन को रोकना बहुत जरूरी है।