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Tuesday, May 12, 2026

मौत का सौदागर अल्फ्रेड नोबेल मर गया

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

डायनामाइट के आविष्कार अल्फ्रेड नोबेल की आम जनता में मौत का सौदागर के नाम से ख्याति थी। स्वीडन में 21 अक्टूबर 1833 को पैदा हुए अल्फ्रेड नोबेल एक उद्योगपति, रसायनज्ञ और वैज्ञानिक थे। अपने माता-पिता की आठ संतानों में वह और उनके दो भाई ही जीवित बच पाए थे। 

वह कठिन परिस्थितियों में अपनी शिक्षा पूरी कर पाने में सफल हुए थे। नोबेल ने स्वीडिश, फ्रेंच, रूसी, अंग्रेजी, जर्मन और इतालवी भाषाओं में दक्षता हासिल कर ली थी। वह अंग्रेजी में कविताएं भी लिखते थे। ​​एक बार की बात है। जब डायनामाइट का आविष्कार करने के बाद अल्फ्रेड नोबेल काफी बड़े उद्योगपति बन गए। उन्हीं दिनों उनके भाई लुडविग नोबेल की मृत्यु हो गई। 

मृत्यु का समाचार सुनकर लोगों ने शोक व्यक्त करने के लिए आना शुरू किया। मगर वह रोज की तरह अपनी बालकनी में बैठकर अखबार पढ़ रहे थे। तभी उनकी नजर एक हेडिंग पर पड़ी। लिखा था-मौत के सौदागर, डायनामाइट के आविष्कार अल्फ्रेड नोबेल का निधन। अखबार के रिपोर्टर ने लुडविग की जगह अल्फ्रेड की मौत का समाचार लिखकर भेजा था जिसे संपादक ने प्रकाशित कर दिया था। 

खबर में सारी बातें लिखी थीं, बस मरने वाले का नाम ही गलत था। यह समाचार पढ़ने के बाद नोबेल सोचने लगे कि मौत के बाद मैं मौत का सौदागर नाम से पहचाना जाऊंगा। इस खबर का उन पर प्रभाव यह हुआ कि उन्होंने उस दिन से लोगों की समस्याओं का निदान करना शुरू कर दिया। 

उन्होंने अपनी पूरी संपत्ति एक ट्रस्ट बनाकर सौंप दी। उसी ट्रस्ट ने नोबेल की मौत के पांच साल बाद भौतिक, रसायन, शांति, चिकित्सा और साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार देना शुरू किया।