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Monday, May 18, 2026

आलसी आदमी से कुछ नहीं हो सकता

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

पंचतंत्र का एक सूत्र वाक्य है-उद्योगिनं पुरुषसिंहमुपैति लक्ष्मी:, दैवेन देयमिति कापुरुषा वदन्ति। उद्यम करने वाले पुरुषों को ही लक्ष्मी प्राप्त होती है। कायर लोग ही यह कहते हैं कि जो भाग्य में लिखा होगा, वही होगा। भाग्य किसी को धनवान या सुखी नहीं बनाता है। उद्यम करने से ही मनुष्य सफल होता है। किसी गांव में एक व्यक्ति रहता था। वैसे तो वह भला आदमी था। 

लोगों की समय-समय पर सहायता भी किया करता था। लोगों के साथ हिल मिलकर रहने में विश्वास करता था। मृदुभाषी भी था। लेकिन उसमें एक ही अवगुण था। वह हर काम को टालता रहता था। जब तक मजबूरी न हो जाए, तब तक वह हर काम को टाल देता था। एक बार की बात है। उसके गांव में एक साधु आया। उस व्यक्ति ने साधु की सात दिनों तक खूब सेवा की। 

वह साधु की बातों से काफी प्रभावित था। जब साधु गांव से जाने लगा तो उसने उस व्यक्ति को पारस पत्थर देते हुए कहा कि तुम सात दिनों तक पारस पत्थर की सहायता से जितना चाहो, लोहे को सोने में बदल सकते हो। उस आदमी ने अगले दिन घर में लोहा खोजा तो बहुत कम लोहा मिला। उसने उस लोहे को सोने में बदलकर और लोहा खरीदने बाजार गया। 

बाजार में लोहे के दाम उसे बहुत ज्यादा लगे। वह लौट आया। अगले दिन गया, तो लोहे के भाव पिछले दिन से भी ज्यादा लगे। उसने लोहा नहीं खरीदा। इस तरह सात दिन बीत गया। आठवें दिन साधु दरवाजे पर आ खड़ा हुआ और पारस पत्थर वापस मांगा। उस आदमी ने कहा कि मैं तो अभी तक कुछ कर भी नहीं पाया। साधु ने कहा कि तुम्हारीजगह कोई दूसरा होता, तो न जाने कितने लोहे को सोने में बदल चुका होता। तुम जैसे आलसी से कुछ नहीं हो सकता है। उस आदमी ने साधु से एक दिन की मोहलत मांगी, लेकिन साधु तैयार नहीं हुआ। अपना पारस पत्थर लेकर चला गया।