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Monday, May 11, 2026

बेहतर है, जमीन उसे वापस कर दो

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

बिहार के सीवान जिले में कायस्थ परिवार में जन्मे डॉ. राजेंद्र प्रसाद भारत के पहले राष्ट्रपति थे। उनका जन्म 3 दिसंबर 1884 को हुआ था। इनके पिता महादेव सहाय संस्कृत और फारसी दोनों भाषाओं के विद्वान थे। इनकी मां कमलेश्वरी देवी ने हमेशा गरीबों की मदद करने, एक आदर्श जीवन जीने की प्रेरणा दी। हालांकि राजेंद्र बाबू को अपनी मां का साथ ज्यादा दिनों तक नहीं मिला। 

मां की मौत के बाद इनका पालन पोषण बड़ी बहन ने किया। डॉ. राजेंद्र बाबू बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि के थे। सन 1905 में कलकत्ता विश्वविद्यालय से राजेंद्र बाबू ने प्रथम श्रेणी की डिग्री हासिल की। राजेंद्र बाबू कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, कुशल अधिवक्ता और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। 

बात उन दिनों की है, जब वह वकालत कर रहे थे। बचपन में मां से मिली शिक्षा और बड़ी बहन के पालन-पोषण का प्रभाव यह हुआ कि वकालत के दिनों में भी उन्होंने गरीबों के साथ किसी प्रकार का अन्याय नहीं होने दिया। वह गरीबों और असहायों का मुकदमा कई बार मुफ्त लड़े थे और जीत भी दिलाई थी। एक दिन एक व्यक्ति राजेंद्र बाबू के किसी परिचित का पत्र लेकर उनसे मिला और उनसे मुकदमा लड़ने की गुजारिश की। 

राजेंद्र बाबू ने उससे कागजात मांगे जिसको पढ़ने के बाद पता चला कि वह आदमी जिस जमीन का मुकदमा लड़ने के लिए उसके पास आया है, किसी विधवा का है। राजेंद्र बाबू ने उस व्यक्ति से कहा कि तुमने कागजात तो बहुत चतुराई से बनवाया है। तुम मुकदमा जीत भी सकते हो, लेकिन अच्छा होगा कि उस विधवा को उसकी जमीन वापस कर दो। वह जमीन ही उसकी जीविका का आधार है। यह सुनकर उस व्यक्ति पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा। उसने विधवा की जमीन उसे वापस कर दी।