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Tuesday, May 12, 2026

चोरी छिपे पेड़ कटते रहेंगे तो कैसे हरियाणा में बढ़ेगा वनक्षेत्र

अशोक मिश्र

दुनिया भर की सरकारें, प्रकृति प्रेमी और पर्यावरणविद चीख-चीख कर लोगों को सचेत कर रहे हैं कि प्रकृति में कार्बन डाई आक्साइड गैस का उत्सर्जन रोको। ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन जितना कम होगा, पर्यावरण संतुलन बरकरार रहेगा। जीवाश्म ईंधन का उपयोग तो बिल्कुल बंद करना होगा। इसके लिए सबसे ज्यादा जरूरी है कि हर क्षेत्र में लगभग बीस प्रतिशत क्षेत्रफल हराभरा हो यानी पेड़-पौधों की बहुलता हो। यही वजह है कि भारत में हर साल जून और जुलाई महीने में पौधरोपण कार्यक्रम चलाया जाता है। 

स्कूली बच्चों से लेकर सरकारी संस्थाएं पौधरोपण कार्यक्रम में भाग लेते हैं। बच्चों को हर साल रटवाया जाता है कि पौधरोपण करो, पर्यावरण बचाओ। हरियाणा भी पौधरोपण के मामले में किसी भी दूसरे राज्य से पीछे नहीं है। राज्य में हर साल करोड़ों पौधे रोपे जाते हैं। यदि इस हिसाब से देखा जाए, तो पिछले एक दशक में जितने पौधे रोपे गए हैं, उसके बाद तो प्रदेश में जंगल ही जंगल होने चाहिए थे, लेकिन ऐसा नहीं है। बल्कि कुछ रिपोर्ट तो बताती हैं कि राज्य का वन क्षेत्र घटता जा रहा है। 

इसका कारण यह माना जा सकता है कि पौधरोपण अभियान तो चलाए गए, लेकिन पौधों को रोपने के बाद उनकी देखभाल नहीं की गई। इसकी वजह से पौधे या तो सूख गए या फिर उन्हें जानवर चर गए। ऐसा भी हो सकता है कि कुछ संस्थाओं ने पौधरोपण के आंकड़े ही गलत दिए हों। वन क्षेत्र ने बढ़ने का कारण यह भी है कि राज्य में जितने वन क्षेत्र हैं उनमें पेड़ों की कटाई अवैध तरीके से की जा रही है। यमुनानगर स्थित कलेसर के जंगल में खैर के 3253 पेड़ काट दिए गए। 

अखबारों में रिपोर्ट छपने के बाद वन विभाग की नींद खुली। पर्यावरण, वन एवं वन्यजीव विभाग ने मामले की जांच की तो कलेसर जंगल में 1473 पेड़ों के ठूंठ नए पाए गए। इसका मतलब यह है कि यह पेड़ हाल ही में काटे गए हैं। जांच में 1780 ठूंठ पुराने मिले हैं यानी इतने सारे पेड़ बहुत पहले ही काटे गए थे। पर्यावरण, वन एवं वन्यजीव विभाग ने अपनी जांच रिपोर्ट में संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच और आवश्यक कार्रवाई करने की सिफारिश की है। 

अवैध पेड़ कटान के मामले में कई बार संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है। संबंधित विभाग ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन देता है। ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ जांच के बाद कार्रवाई भी की जाती है, लेकिन कुछ दिनों बाद फिर से अवैध कटान शुरू हो जाती है। ऐसी स्थिति में यही किया जा सकता है कि पेड़ों की अवैध कटान को लेकर लोगों को जागरूक किया जाए। अधिक से अधिक पौधों को रोपने के बाद उनकी सुरक्षा की जाए। जब तक लोग जागरूक नहीं होंगे, राज्य में बीस प्रतिशत वन क्षेत्र का सपना अधूरा ही रहेगा।