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Wednesday, May 6, 2026

अंतत: इंडिया गठबंधन के सारे पीएम मटेरियल ध्वस्त

संजय मग्गू

याद कीजिए, 23 जून 2023 को पटना में जब विपक्षी दलों के नेताओं का जमावड़ा हुआ था, तब नीतीश कुमार की भावभंगिमा क्या थी? यह बैठक नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई थी। दूसरी बैठक 17-18 जुलाई 2023 को कर्नाटक के बेंगलुरु में मल्लिकार्जुन खड़गे की अध्यक्षता में हुई। तब नीतीश कुमार और उनके चेले-चपाटे उन्हें पीएम मटेरियल कहकर हवाई किले बांध रहे थे। 

बाद में जब विपक्षी दलों ने एकजुट होकर कांग्रेस को इंडिया गठबंधन का नेता चुना, तो उसके कुछ ही दिनों बाद नीतीश कुमार ने अपनी राह अलग कर ली। इसके बाद बंगाल की तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुद को पीएम मटेरियल माना। वह कांग्रेस के नेतृत्व में भाजपा से लड़ने को तैयार नहीं थीं। क्षेत्रीय दल भी बेमन से इंडिया गठबंधन में शामिल हुए। आम आदमी पार्टी के केजरीवाल भी कांग्रेस को स्वीकार नहीं कर पा रहे थे। मुंडे-मुंडे मतिर्भिन्न: वाली स्थिति थी।  

इंडिया गठबंधन में अपने आपको पीएम मटेरियल या कांग्रेस को अपने नेतृत्व लायक न समझने वाले नीतीश कुमार, ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल, एमके स्टालिन आज कहां हैं? और कांग्रेस? सन 2023 के मुकाबले कांग्रेस आज कहीं ज्यादा मजबूत होकर उभरी है। तीन राज्यों में कांग्रेस की सरकार है। चौथी में बनने जा रही है। तब नीतीश कुमार इंडिया गठबंधन में पीएम का चेहरा बनने से कमतर पर राजी नहीं थे, लेकिन भाजपा में क्या गए। मुख्यमंत्री पद तो गया ही, केवल राज्यसभा सांसद बनकर रह गए। केजरीवाल आज भारतीय राजनीति में अप्रांसगिक होते प्रतीत हो रहे हैं।

सात राज्यसभा सांसदों को भाजपा ने हड़प लिया। दिल्ली की सत्ता भी चली गई। पंजाब सरकार कब और कितने दिन चलेगी? अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में क्या हालत होगी? कौन जानता है। उत्तर भारत में अपने बयानों से कांग्रेस के लिए मुसीबत खड़ी कर देने वाले एमके स्टालिन चुनाव हार गए हैं। तमिलनाडु में सन 1971 के बाद पैदा हुई द्रविड़ राजनीति को पलीता लग चुका है। जोसेफ विजय तमिलनाडु की सत्ता पर काबिज होने जा रहे हैं। कोई ताज्बुब नहीं है कि कांग्रेस स्टालिन का दामन छोड़कर विजय थलापति के साथ खड़ी हो जाए। वैसे उसे यह बहुत पहले कर लेना चाहिए था। 

रही बात ममता बनर्जी की। आज उन्होंने प्रेस काफ्रेंस में कहा कि मेरा लक्ष्य बिल्कुल साफ है। अब मैं एक आम व्यक्ति की तरह इंडिया गठबंधन को मजबूत करूंगी। अभी मेरे पास कोई पद नहीं है, इसलिए मैं एक सामान्य नागरिक हूं। ममता को चुनाव हारने के बाद इंडिया गठबंधन याद आ रहा है। अगर दो साल पहले ममता, नीतीश कुमार, अरविंद केजरीवाल, एमके स्टालिन, उमर अब्दुल्ला जैसे लोग अपना अहम त्यागकर खुले मन से इंडिया गठबंधन में शामिल हुए होते, तो शायद इस तरह अधोगति को प्राप्त नहीं हुए होते। 

लेकिन उस समय तो सब पीएम मटेरियल बनने का ख्याब देख रहे थे। भाजपा ने एक-एक करके सबको निपटा दिया। अब पीएम मोदी ने अखिलेश की ओर इशारा किया है। अगले साल उत्तर प्रदेश में होने वाले चुनाव में देखते हैं क्या होता है?