बोधिवृक्ष
अशोक मिश्र
कहा जाता है कि मन के हारे हार है, मन के जीते जीत। अगर आप अपने मन में ठान लें कि आप जीते हुए हैं, तो यकीन मानिए, हारी हुई बाजी भी आप हर हालत में जीत सकते हैं। बस मन में यह दृढ़ विश्वास होना चाहिए कि मुझे कोई हरा नहीं सकता है। परिस्थितियां विपरीत हो सकती हैं, लोग खिलाफ हो सकते हैं, लेकिन यदि मन में विश्वास है, तो विपरीत परिस्थितियों को भी अनुकूल बनाया जा सकता है।कभी एक समय ऐसा था कि यूनान को अजेय समझा जाता था। उसकी फौजों ने कभी हार का सामना नहीं किया था। जिस देश पर यूनान हमला करता था, उस देश का शासक या तो अधीनता स्वीकार कर लेता था या फिर राज्य छोड़कर भाग जाता था। पूरा यूरोप यूनान की फौजों के आतंक से संत्रस्त था। रोम के सेनापति सीजर यूनानी फौजों का यह भय अपने देश के सैनिकों और प्रजा के मन से निकालता चाहता था।
वह काफी दिनों से सोच रहा था कि यूनानी सैनिकों को कैसे मजा चखाया जाए। फिर उसने यूनानी फौजों की अपराजेयता को ही निशाना बनाने की बात सोची। सीजर ने अपने देश के हर शहर, हर गांव की दीवार पर यह वाक्य लिखवाया, यूनानी फौजें तभी तक अजेय हैं, जब तक हम उनके सामने घुटने टेके बैठे हैं। आओ! हम सब तनकर खड़े हो जाएं और यूनानी फौजों को उनकी करनी का मजा चखाएं।
इस वाक्य का रोम की जनता पर जादू जैसा असर हुआ। रोम की जनता उत्साहित हो गई। घर-घर युद्ध की तैयारियां हुईं। एक दिन यूनान की फौजें रोम की फौज के सामने आ खड़ी हुई। जमकर लड़ाई लड़ी गई और अजेय समझा जाने वाला यूनान परास्त हो गया। सीजर ने एक इतिहास रच दिया।

No comments:
Post a Comment