अशोक मिश्र
हरियाणा में अब सड़क पर पैदल चलना भी सुरक्षित नहीं रहा। पता नहीं, कब तेज रफ्तार में बस, कार, ट्रैक्टर या ट्रक आए और कुचलता हुआ निकल जाए। गुरुग्राम में शुक्रवार की शाम को तेज रफ्तार थार ने पैदल घर लौट रहे नाना और उनके दो नातियों को उड़ा दिया। रफ्तार इतनी तेज थी कि तीनों लोग घटना स्थल से लगभग बीस मीटर दूर जा गिरे। हादसे के बाद थार चालक वाहन रोककर घायलों को अस्पताल पहुंचाने की जगह वहां से फरार हो गया।काफी देर तक जब साठ वर्षीय नाना सुभाष और उनके दस और आठ वर्षीय दोनों नाती जब घर नहीं पहुंचे, तब उनकी तलाश शुरू हुई। काफी देर बाद तीनों लोगों को खोज निकाला गया। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टर ने तीनों को मृत घोषित कर दिया। सड़क पर किनारे चल रहे इन तीनों को कहां मालूम था कि पीछे से तेज रफ्तार थार के रूप में उनकी मौत आ रही है।
हरियाणा के युवाओं में तेज रफ्तार से कार चलाना काफी शान की बात समझी जाती है। उन्हें तेज वाहन चलाने में एक किस्म का रोमांच महसूस होता है, लेकिन तेज रफ्तार से वाहन चलाने वाले युवा यह भूल जाते हैं कि उनके ऐसा करने से उनकी जान तो खतरे में रहती ही है, सड़क पर चलने वाले दूसरे लोगों की जान को भी उतना ही खतरा बना रहता है। हरियाणा यातायात पुलिस से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, 2014 से अब तक राज्य में सड़क दुर्घटनाओं में 57,901 लोगों की जान गई है।
राज्य में पिछले 11 वर्षों में लगभग 1.15 लाख सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। 2017 में 11,258 सड़क दुर्घटनाओं में 5,120 लोगों की जान गई, जो 2014 के बाद सबसे अधिक है। हरियाणा में साल 2024 के दौरान 9806 सड़क हादसे हुए। इन हादसों में करीब 4689 लोगों की मौत हो गई, 7914 लोग घायल हुए। यह आंकड़ा साल 2023 के मुकाबले काफी कम है। खास बात यह है कि पुलिस ने साल 2024 के सड़क हादसों में घायल होने वाले 5313 लोगों को फस्ट एड की सुविधा मुहैया करवाई, वहीं 7090 घायलों को तुरंत प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया। साल 2023 में 10 हजार 168 सड़क हादसे हुए, जिनमें 5092 लोगों की मौत हुई है। साल 2022 में 11 हजार 130 सड़क हादसों में 5621 लोगों की मौत हुई थी।
अधिकांश दुर्घटनाएं तेज गति, लापरवाही से गाड़ी चलाने और गलत दिशा में गाड़ी चलाने के कारण होती हैं। चालक मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हैं या नशे में होते हैं, जो इन दुर्घटनाओं के कारणों में और इजाफा करता है। सड़क हादसों में लोगों की केवल मौत ही नहीं होती है, बहुत सारे लोग घायल भी होते हैं। कुछ लोग दिव्यांग हो जाते हैं। दिव्यांगता की वजह से पीड़ित व्यक्ति को जीवन भर तकलीफ उठानी पड़ती है। कुछ मामलों में जब परिवार में कमाने वाला व्यक्ति ही दिव्यांग हो जाए, तो पूरा परिवार बिखर जाता है।

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