नई औद्योगिक नीति का सबसे ज्यादा लाभ रोजगारऔर प्रति व्यक्ति आय के क्षेत्र में दिखाई देगा। सैनी सरकार नई नीचि से खुद 10 लाख नौकरियों के सृजन का लक्ष्य बता रही है, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक्स, एआई, डेटा सेंटर, फार्मा और खिलौना निर्माण जैसे नए सेक्टर शामिल हैं। इतने भारी भरकम पूंजी निवेश के बाद जब लोकल युवाओं को स्थानीय फैक्ट्रियों में स्किल्ड नौकरी मिलेगी, तो इसके पूरे प्रदेश में पलायन घटेगा। इन फैक्ट्रियों में उत्पादित माल की खपत बढ़ेगी, जो स्थानीय लोगों की आय में सीधे इजाफा करेगा। रोजगार सृजन से जहां प्रति व्यक्ति आय बढ़ेगी, वहीं दूसरे प्रदेशों और विदेश में इन उत्पादों का निर्यात करने से विदेशी मुद्रा का भंडार भी बढ़ेगा। नई औद्योगिक नीति में रोजगार को लेकर सरकार का लक्ष्य साफ है।
अगले पांच साल में 10 लाख नए रोजगार पैदा करने की दिशा में नई औद्योगिक नीति एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है। इसका सबसे ज्यादा जोर उन सेक्टरों पर है जहाँ कम पूंजी में ज्यादा लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया जा सकता है। इसमें सबसे आगे मैन्युफैक्चरिंग और आॅटोमोबाइल,इलेक्ट्रिक व्हीकल कंपोनेंट सेक्टर है। फरीदाबाद-गुरुग्राम-मानेसर बेल्ट में पहले से मौजूद फैक्ट्रियों के विस्तार और नई आईएमटी बनने से असेंबलिंग, वेल्डिंग, मेंटेनेंस जैसे कामों में बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा होगा। राज्य में दूसरा बड़ा क्षेत्र खिलौना निर्माण, फार्मा और कृषि आधारित उद्योग है।
इन क्षेत्रों में पूंजी निवेश के बाद रोजगार सृजन की अपार संभावनाएं हैं। ये सभी श्रम आधारित उद्योग हैं और एमएसएमई के जरिए गांव-कस्बों तक नौकरियों पहुंचेंगी और लोगों का जीवन स्तर अच्छा होगा। हरियाणा की नई 'मेक इन हरियाणा 2026' नीति का फोकस अब पारंपरिक उद्योग से हटकर भविष्य के उद्योगों पर ज्यादा है, इसलिए इसका फायदा चुनिंदा नहीं बल्कि एक पूरी चेन को होगा। सरकार ने इसी वजह से रोजगार सब्सिडी और एसजीएसटी रिफंड को नीति से जोड़ा है ताकि कंपनियां हरियाणा के युवाओं को ही प्राथमिकता दें। सरकार ने महिला उद्यमियों, अनुसूचित जाति, दिव्यांग, पूर्व सैनिकों जैसे तमाम लोगों के लिए विशेष प्रोत्साहन प्रावधान किए हैं।
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