Friday, July 31, 2026

यदि सुरक्षा नहीं, तो किसी काम का नहीं है एक पेड़ मां के नाम पौधरोपण

अशोक मिश्र

मां और धरती दोनों में बड़ी साम्यता है। एक इंसान को जन्म देती है, दूसरी हवा, पानी और अनाज के जरिये जीवन को आगे बढ़ाती है। इसी नजरिये को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 जून 2024 को पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में देश भर में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान शुरू किया था। इसके माध्यम से जन्म देने वाली मां की स्मृति को बनाए रखते हुए प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा करना था। ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के माध्यम से लोगों को प्रेरित किया गया कि वह अपनी मां के नाम पर हर साल एक पौधरोपण अवश्य करें। रोपा गया पौधा जब पेड़ बन जाएगा, तो उनके मां की स्मृतियां पेड़ के माध्यम से जीवित रहेंगी। 

हरियाणा में भी लोगों ने इस मुहिम को साकार बनाने की ठान ली। हरियाणा को पहले चरण में 1.6 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य मिला था, लेकिन राज्य ने 1.87 करोड़ पौधे लगाकर सबको चकित कर दिया था। पूरे राज्य में बड़, पीपल, गुलमोहर, नीम और फलदार पौधे लगाए गए जिससे यह साफ हुआ कि लोगों ने इसे सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि भावनात्मक जिम्मेदारी मान लिया था।  

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 26 जुलाई 2026 को यमुनानगर पुलिस लाइन में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधारोपण किया। इस अवसर पर उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि पौधे सिर्फ पर्यावरण नहीं, आने वाली पीढ़ियों की धरोहर हैं। हर नागरिक से जीवन में कम से कम एक पौधा लगाने और उसकी देखभाल जरूर करनी चाहिए। सरकार ने इस मुहिम को होल आॅफ गवर्नमेंट और होल आॅफ सोसाइटी मॉडल पर चलाया। इस तरह का संदेश जब मुखिया से गांव तक जाता है तो लोगों में जिम्मेदारी का भाव आता है। सरकार ने इसे केवल अपील नहीं रहने दिया, संस्थागत बनाया है। 

वन विभाग को नोडल बनाकर मनरेगा, जल शक्ति अभियान, स्वच्छ भारत मिशन, अमृत सरोवर और राष्ट्रीय हरित राजमार्ग मिशन से जोड़ा गया है, ताकि गड्ढा खोदने से लेकर पानी देने तक की जिम्मेदारी बँटे। सबसे प्रयोगधर्मी कदम वन मित्र योजना रही, जहाँ पौधा लगाने पर 20 रुपये और उसकी देखभाल सौंपने पर 10 रुपये प्रति पौधा प्रोत्साहन दिया गया। इससे लोगों की आय बढ़ी और पौधों को सुरक्षा भी मिली। कई जिलों से यह भी खबरें आ रही हैं कि काफी संख्या में रोपे गए पौधे सूख चुके हैं या फिर अपने स्थान से गायब हैं। 

सवाल यह भी है कि क्या पौधरोपण का लक्ष्य पूरा हुआ। संख्यात्मक के लिहाज से हरियाणा ने हर चरण में अपना कोटा पूरा किया है। कई बार उससे आगे भी निकला है। नहरों, अमृत सरोवरों और स्कूल परिसरों में लगे पौधों की देखभाल अपेक्षाकृत बेहतर है, जबकि सड़क किनारे और खुले मैदानों में गर्मी और पानी की कमी से क्षति भी हुई है। कुछ मामले तो केवल फोटो खिंचवाने तक ही सीमित रहे, इसके बाद ध्यान देने की जरूरत नहीं समझी गई।

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