बोधिवृक्ष
अशोक मिश्र
देश को आजाद कराने के लिए हजारों युवाओं ने अपना बलिदान दिया है। देश के लगभग हर जिले से लोगों ने अंग्रेजी दासता से मुक्ति के लिए अपने प्राणों को उत्सर्ग किया है। ऐसे ही एक क्रांतिकारी थे साबू लाल जैन वैसखिया। साबूलाल का जन्म 1923 मध्य प्रदेश के सागर जिले के गढ़ा कोटा में हुआ था। साबूलाल ने पांचवीं तक पढ़ाई की थी। वह आगे पढ़ना चाहते थे, लेकिन उनके पिता पूरन चंद की आर्थिक स्थिति काफी खराब थी, इसलिए उनको पढ़ाई छोड़कर कामकाज में लगना पड़ा। बचपन में ही उनके मन में देशभक्ति भावना पैदा हो गई थी। बात 1942 की है। देश में क्रांति की आग धधक रही थी। अंग्रेजों के खिलाफ पूरे देश में रोष था। उन्हीं दिनों सागर में तय किया गया कि कल अंग्रेजी शासन के विरोध में एक जुलूस निकाला जाएगा, जो कलेक्ट्रेट तक जाएगा।इस जुलूस में बाबूलाल ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। सैकड़ों आदमियों का यह जुलूस जैसे ही कलेक्ट्रेट पहुंचा, बाबू लाल कलेक्ट्रेट की छत पर चढ़ गए। उस समय नीचे मौजूद पुलिस वालों ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, लेकिन वह छत तक पहुंचने में सफल हो गए। कलेक्ट्रेट पर लगेयूनियन जैक को उतार कर साबूलाल ने नीचे फेंक दिया। इस पर पुलिस वालों ने उन्हें चेतावनी दी, लेकिन इसी बीच वह यूनियन जैक की जगह पर तिरंगा लगाने में सफल हो गए। इतने में पुलिस वालों ने गोलियां चलानी शुरू की।
एक गोली आकर साबूलाल जैन के सीने में लगी। भारत माता की जयकारे के साथ साबूलाल नीचे आ गिरे। उनकी उसी समय मौत हो गई। साबूलाल के शहीद होने की खबर सुनकर पूरा जिला शोकग्रस्त हो गया। उनकी शवयात्रा के दौरान उमड़ी भारी भीड़ को देखकर ब्रिटिश हुकूमत भी दहल गई।

No comments:
Post a Comment