Tuesday, March 31, 2026

थोड़े से लालच के लिए रिश्तों की मर्यादा को भूल रहे लोग


अशोक मिश्र

रिश्तों को हर समाज में विशेष महत्व दिया जाता रहा है। माता-पिता, भाई-बहन, सास-बहू जैसे तमाम रिश्ते ऐसे होते हैं जो जीवन को व्यवस्थित और संतुलित बनाते हैं। भारत में ही नहीं, कई देशों में संयुक्त परिवार की परंपरा रही है। आज भी बरकरार है, लेकिन संयुक्त परिवारों की संख्या में निस्संदेह भारी कमी  आई है। संयुक्त परिवारों की खूबी यह थी कि यदि परिवार का एक सदस्य आर्थिक रूप से कमजोर भी हो, तो परिवार के दूसरे लोग उसकी सहायता करते थे। 

एक साथ, एक ही घर में रहने और एक ही चूल्हे का भोजन करने की वजह से उनमें प्रेम बना रहता था। यदि कभी कोई ऊंच-नीच भी हो जाती थी तो परिवार का मुखिया समझा बुझाकर शांत कर देता था। बच्चे भी सब एक साथ खेलते-कूदते, खाते-पीते थे, अपने परिवार के बड़ों के साथ उठते-बैठते थे, तो उनमें प्रेम बना रहता था। वह रक्त संबंधों को समझते थे। भाई कितना भी बुरा हो, भाई होता था। लेकिन जैसे ही एक परिवार का चलन हुआ, रक्त संबंधों की महत्ता घटने लगी। 

अलग-अलग रहने की वजह से प्रेमभाव भी कम होते-होते लगभग खत्म हो गया। इसी वजह से अब समाज में छोटी-छोटी बातों पर भाई, बहन, देवर-भाभी, देवरानी-जिठानी जैसे रिश्तों में दरार आती जा रही है। थोड़े से फायदे के लिए लोग हत्या करने से भी हिचक नहीं रहे हैं। फरीदाबाद में ही बारह दिन पहले प्रापर्टी के पैसों की लालच में एक बहू ने अपनी सास की हत्या कर दी। 

रविवार को पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार होने के बाद आरोपी बहू ने खुलासा किया कि सास अपनी प्रापर्टी बेचने से मिले पैसे को दूसरे बेटे को देना चाहती थी। यह बात उसकी बड़ी बहू को मंजूर नहीं था। एक दिन उसने अपनी सास का गला दबा दिया। जब उसने देखा कि गला दबाने से भी सास की मौत नहीं हुई है, तो वह पेट पर बैठकर तब तक छाती पर घूंसे बरसाती रही, जब तक कि सास की मौत नहीं हो गई। सास की मौत होने के बाद उसने सबसे कहा कि उसकी सास की मौत बीमारी के चलते हो गई, लेकिन उसकी देवरानी को शक हो गया और उसने पुलिस से शिकायत कर दी। 

पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया, तब जाकर हत्या की पुष्टि हुई। यह तो हमारे समाज की एक बानगी है। ऐसी घटनाएं रोज कहीं न कहीं हो रही है। कहीं बेटा पिता की हत्या कर रहा है, तो कहीं पिता अपने बेटे की। भाई भाई का हत्यारा है, तो भाई बहन का। लोग थोड़े से लालच के लिए  रिश्तों का कत्ल करने से हिचक नहीं रहे हैं। इन घटनाओं को देखकर ऐसा लगता है कि जैसे समाज में रिश्तों की मर्यादा रह ही नहीं गई है। लेकिन इसी समाज में बहुत सारे लोग ऐसे भी हैं जो परिवार और अपने निकटतम परिजनों के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने को तैयार रहते हैं।

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