Tuesday, September 22, 2026

शिक्षा व्यवस्था को रोजगार, बाजार से और अधिक जोड़ने की जरूरत

 अशोक मिश्र

लाडवा इलाके के गांवों में रविवार को आयोजित जनसंवाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने दावा किया कि पिछले बारह साल में दो लाख से अधिक युवाओं को बिना पर्ची-बिना खर्ची के सरकारी नौकरी दी गई। मुख्य रूप से यह बात सत्ताधारी दल के आधिकारिक बयानों पर आधारित है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और राज्य सूचना विभाग ने बार-बार यह आंकड़ा दोहराया है। 

हालांकि विपक्ष इस दावे पर सवाल उठाता है। वे कहते हैं कि स्थायी नियमित पदों पर भर्ती अपेक्षाकृत कम हुई है और कई नियुक्तियां संविदात्मक या हरियाणा कौशल रोजगार निगम के माध्यम से हुई हैं। रोजगार एक्सचेंजों में पंजीकृत बेरोजगार युवाओं की संख्या चार लाख से अधिक बताई जाती है। इसमें बारहवीं पास युवा सबसे अधिक हैं। इसके बाद स्नातक और स्नातकोत्तर का नंबर आता है। कई जिलों जैसे हिसार, जींद, कैथल और सिरसा में पंजीकृत बेरोजगारों की संख्या विशेष रूप से ऊंची है। 

बेरोजगारी सबसे अधिक शिक्षित युवाओं में दिखती है। स्नातक और स्नातकोत्तर डिग्री धारक, खासकर कला और सामान्य विषयों वाले युवा, नौकरी बाजार में सबसे अधिक संघर्ष कर रहे हैं। इसके विपरीत तकनीकी, व्यावसायिक और कौशल आधारित कोर्स करने वाले युवा अपेक्षाकृत आसानी से रोजगार पा रहे हैं। आईटी, कंप्यूटर एप्लिकेशन, नर्सिंग, पैरामेडिकल, होटल मैनेजमेंट, लॉजिस्टिक्स, आॅटोमोबाइल और निर्माण संबंधी डिप्लोमा या सर्टिफिकेट कोर्स वाले युवाओं को उद्योगों और सेवा क्षेत्र में अवसर मिल रहे हैं। हरियाणा में उद्योग, निर्माण, लॉजिस्टिक्स और सेवा क्षेत्र के विस्तार के कारण ये कौशल मांग में हैं। 

वर्तमान में सबसे फायदेमंद पढ़ाई वही है जो डिग्री के साथ कौशल जोड़ती हो, जैसे बीसीए के साथ क्लाउड, बीएससी नर्सिंग, जर्मन या जापानी भाषा के साथ केयरगिवर कोर्स, हरियाणा में विदेश रोजगार के लिए ड्राइविंग और हॉस्पिटैलिटी प्रशिक्षण लेना लाभदायक है। केवल डिग्री हासिल करने से रोजगार की गारंटी नहीं रह गई है। बेरोजगारी का राज्य की अर्थव्यवस्था पर बहुआयामी प्रभाव पड़ रहा है। 

युवा शक्ति का सही उपयोग न होने से उत्पादकता और उपभोग दोनों प्रभावित होते हैं। साथ ही बेरोजगारी भत्ते और कल्याणकारी योजनाओं पर सरकारी खर्च बढ़ता है। कौशल आधारित शिक्षा और बाजार उन्मुख कोर्स वर्तमान समय में अधिक फायदेमंद साबित हो रहे हैं। अर्थव्यवस्था पर बेरोजगारी का दबाव तो है, लेकिन उद्योग और सेवा क्षेत्र के विस्तार से अवसर भी पैदा हो रहे हैं। योजनाएं राहत दे रही हैं, लेकिन दीर्घकालिक समाधान के लिए शिक्षा व्यवस्था को रोजगार बाजार से और अधिक जोड़ने की जरूरत है। युवाओं के जीवन में स्थिरता तभी आएगी जब मेरिट आधारित स्थायी रोजगार के अवसर और व्यावहारिक कौशल दोनों साथ-साथ बढ़ेंगे।


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