Tuesday, February 17, 2026

आग लगने पर धन-जन हानि कम करने को खुलेंगे नए फायर स्टेशन


अशोक मिश्र

अब मौसम धीरे-धीरे गरम होने लगा है। तापमान बढ़ने से लोगों ने राहत की सांस ली है। लेकिन आने वाले दिनों में यही गरमी जब प्रचंड रूप अख्तियार करेगी, तब आज सुखद लगने वाली गरमी परेशानी का सबब बन जाएगी। गरमी के मौसम में सबसे ज्यादा आगजनी की घटनाएं सामने आती हैं। मौसम गरम होने की वजह से सब चीजें सूख जाती हैं जिसकी वजह से एक हल्की सी चिन्गारी भयानक रूप धारण कर लेती है। वनों और खेतों में आग लगने की घटनाएं सबसे ज्यादा मार्च से लेकर जून महीने में होती हैं। कई बार किसी व्यक्ति की लापरवाही के चलते खेत में लगी आग कफी नुकसानदायक साबित होती है। 

गेहूं की फसल की मार्च और अप्रैल महीने से कटनी शुरू हो जाती है। कई बार खड़ी फसल में आग लग जाती है जिसको रोक पाना किसान और लोगों के वश की बात नहीं रहती है। कई सौ एकड़ फसल जलकर राख हो जाती है। किसान की मेहनत स्वाहा हो जाती है। इस स्थिति से निपटने के लिए सैनी सरकार ने प्रदेश में फायर स्टेशन की संख्या बढ़ाने का फैसला लिया है। शिवालिक क्षेत्र पंचकुला, अंबाला और यमुना नगर जैसे जिलों में नए फायर स्टेशन खोलने की योजना है। 

 वैसे पूरे प्रदेश में अभी तक केवल 89 फायर स्टेशन हैं, जो जनसंख्या और क्षेत्रफल को देखते हुए काफी कम प्रतीत होते हैं। इनमें से भी सबसे ज्यादा शहरी क्षेत्र में फायर स्टेशन हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्र में इनकी संख्या काफी कम है। प्रदेश में 59 फायर स्टेशन खोले जाएंगे जिसमें से बीस फायर स्टेशन एनसीआर इलाके में खोले जाएंगे। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी इन नए फायर स्टेशनों को खोलने की मंजूरी दे चुके हैं। फायर स्टेशन खोलने का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में फसलों में लगने वाली आग पर जल्दी  से जल्दी काबू पाना है। 

कई बार यह भी देखने में आया है कि जब किसी खेत या औद्योगिक संस्थान में  आग लग जाती है, तो फायर ब्रिगेड को पहुंचने में काफी देर लगती है। इसका कारण फायर स्टेशन का बहुत दूर होना है। जब फायर ब्रिगेड चलती है, तो रास्ते में पड़ने वाली टूटी फूटी सड़कें, संकरे रास्ते और सड़कों पर हुआ अतिक्रमण उनकी रफ्तार को काफी धीमा कर देते हैं। ऐसी स्थिति जब तक फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंचती है, तब तक फसल या सामान जलकर स्वाहा हो चुका होता है। इस स्थिति से निपटने के लिए प्रदेश सरकार ने पचास किमी के दायरे में फायर स्टेशन स्थापित करने का फैसला किया है। 

हालांकि यह भी दूरी कुछ ज्यादा ही है। दस-पंद्रह किमी के दायरे में एक फायर स्टेशन होने से आग लगने की घटनाओं पर काफी हद तक काबू पाया जा सकता है। ऐसी स्थिति में धन-जन की हानि को काफी हद तक कम किया जा सकता है। कई बार ऐसा भी देखा गया है कि आग लगने पर फायर ब्रिगेड जब तक पहुंचती है, तब तक सब कुछ जलकर राख हो चुका होता है।

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