अशोक मिश्रफरीदाबाद के सेक्टर 24 में सोमवार की शाम लगी भीषण आग ने प्रशासन की लापरवाही की पोल खोल दी है। एक निजी कंपनी में सीएनसी से मेटल शीट कटिंग के दौरान लगी आग में 42 से अधिक लोग बुरी तरह घायल हुए हैं। इनमें से कुछ लोगोंकी हालत काफी गंभीर है। हादसे के बारे में बताया जा रहा है कि मेटल शीट कटिंग के दौरान निकली चिन्गारी ने कुछ ही दूर रखे ड्रम में आग पकड़ ली। इसके बाद तो लगातार ड्रम किसी बम की तरह फटने लगे।
चारों ओर चीख पुकार मच गई। घायल और झुलसे लोग बदहवाश होकर इधर-उधर बचने के लिए भागने लगे। इसी बीच किसी ने फायर ब्रिगेड और पुलिस को फोन करके हादसे की जानकारी दी। जानकारी मिलते ही पुलिस और फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर पहुंची और बचाव और राहत का काम शुरू किया। लोगों का कहना है कि यदि फायर ब्रिगेड की गाड़ियां तत्परता से मौके पर नहीं पहुंचती, तो शायद हादसा और भी भयानक हो सकता था। इस एक घटना ने प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
प्रशासन को यह नहीं मालूम है कि सेक्टर-24 में चल रही यह फैक्ट्री अधिकृत एरिया में चलाई जा रही थी या अनधिकृत एरिया में। पूछने पर अधिकारी यह कहकर अपना पल्ला झाड़ ले रहे हैं कि छानबीन करने के बाद ही पता चलेगा। अधिकारी यह भी कह रहे हैं कि किस केमिकल की वजह से इतना बड़ा हादसा हुआ, इसकी भी जांच की जा रही है। आशंका जताई जा रही है कि जिन ड्रमों की वजह से विस्फोट हुआ, उन ड्रमों में मशीन के पुर्जोँ को साफ करने वाले आयल के साथ-साथ कोई केमिकल भी था जिसकी वजह से इतनी तेजी से आग फैली और विस्फोट हुआ।
वैसे इंडस्ट्रियल एरिया में भी अगर कोई केमिकल रखा जाता है, तो उसके लिए कुछ नियम बनाए गए हैं। अगर किसी इंडस्ट्रियल एरिया में स्थित फैक्ट्री, वर्कशाप या दुकान में कोई केमिकल या ज्वलनशील पदार्थ रखा जाता है, तो उस केमिकल का नाम जरूर लिखा जाता है। हर ड्रम पर केमिकल का नाम, उसका विवरण, खतरे का चिन्ह और चेतावनी का चिह्न बना होना चाहिए ताकि हर व्यक्ति कार्य करते समय सतर्क रहे। ड्रम में रखे केमिकल को उपयुक्त तापमान पर ही रखा जाना चाहिए ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना की आशंका न रहे। वेंटिलेशन की भी पूरी व्यवस्था होनी चाहिए।
इतना ही नहीं, उसके आसपास पार्किंग एरिया नहीं होनी चाहिए। किसी को स्मोकिंग की इजाजत भी नहीं देनी चाहिए। फैक्ट्रियों, वर्कशापों में आग से बचने के उपाय अवश्य किए जाने चाहिए। अधिकारियों को भी चाहिए कि वह समय समय पर ऐसी फैक्ट्रियों और वर्कशापों की जांच करते रहे। थोड़ी सी भी लापरवाही दिखे, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें ताकि ऐसी घटनाओं को होने से रोका जा सके।

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