Friday, February 20, 2026

हरियाणा में वायु प्रदूषण के चलते होने वाली बीमारियां चिंताजनक


अशोक मिश्र

हरियाणा के सत्रह जिलों में बुधवार को हुई बरसात की वजह से वायु प्रदूषण पर बहुत मामूली कमी आई है। ठंडक बीत जाने के बाद भी वायु गुणवत्ता सूचकांक संतोषजनक स्तर पर नहीं आ पाया है। यह हालत तब है, जब एक्यूआई पर प्रधानमंत्री कार्यालय से भी निगाह रखी जा रही है। हरियाणा, दिल्ली, पंजाब और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में वायु प्रदूषण अब एक स्थायी समस्या बनता जा रहा है। इन राज्यों में वायु प्रदूषण के चलते होने वाली मौतों को सामान्य मानकर भुला दिया जाता है। 

अक्टूबर 2025 में जारी ग्लोबल बर्डन आॅफ डिजीज (जीबीडी) 2023 के आंकड़ों पर आधारित इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन (आईएचएमई) ने अध्ययन किया तो पाया कि हरियाणा में महीन कणों के लंबे समय तक संपर्क में रहने से मृत्यु का दूसरा प्रमुख कारण सामने आया है। अध्ययन में पाया गया कि राज्य में 27,130 मौतें खराब वायु गुणवत्ता से जुड़ी थीं, जो कुल मृत्यु दर का 13.5 प्रतिशत है। हरियाणा में रोकी जा सकने वाली मौतों का प्रमुख कारण वायु प्रदूषण है, जो उच्च सिस्टोलिक रक्तचाप के बाद दूसरे स्थान पर है, जिसके कारण 2023 में 30,197 मौतें हुईं। 

वायु प्रदूषण के चलते हर साल हृदय रोग, स्ट्रोक, फेफड़े का कैंसर और श्वांस संबंधी बीमारियों के कारण काफी मात्रा में लोगों की मौत हो जाती है। इन मौतों का कारण कहीं न कहीं वायु प्रदषण होता है। वायु प्रदूषण से लंबे समय तक संपर्क में रहने वाले लोग अपने शरीर में सूजन और आक्सीडेटिव तनाव के शिकार हो सकती हैं। जिसकी वजह से कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं।  ऐसे लोगों को तंत्रिका तंत्र संबंधी विकार और मनोदशा का शिकार होना पड़ सकता है। चिकित्सकों का मानना है कि हरियाणा में वायु प्रदूषण कोई गौण स्वास्थ्य चिंता नहीं है, बल्कि यह रोके जा सकने वाले रोगों के बोझ का प्राथमिक कारण है। 

यह सही है कि पिछले कुछ वर्षों से सरकारी तौर पर वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन उसके परिणाम उतने सकारात्मक नहीं रहे जितने की अपेक्षा थी। यह सच है कि हरियाणा में पराली को जलाने की घटनाएं कम हुई हैं, लेकिन फैक्ट्रियों, वाहनों और एयरकडीशन्स के जरिये फैलने वाला प्रदूषण नियंत्रित नहीं हो पा रहा है। प्रतिबंध के दिनों में सड़कों पर उड़ने वाली धूल और होने वाले अवैध निर्माण सारे प्रयास पर पानी फेर देते हैं। 

रोहतक, धारूहेड़ा, सोनीपत, गुरुग्राम, फरीदाबाद, और बहादुरगढ़ में वायु गुणवत्ता बेहद खराब रही है, जहाँ ज्यादातर दिनों में एआईक्यू 300-400 से ऊपर या इसके आसपास दर्ज किया गया है। यदि हरियाणा में वायु प्रदूषण पर नियंत्रण पा लिया जाए, तो प्रदूषण के चलते होने वाली बीमारियां और उससे होने वाली मौतों पर काफी हद तक काबू पाया जा सकता है।

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