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Monday, September 28, 2026

चिकित्स की जरूरत वहां, बीमारियां जहां

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

गौतम बुद्ध ज्यादातर भ्रमण में ही रहते थे। वह केवल वर्षाकाल में ही एक जगह टिकते थे। वर्षाकाल में यात्रा आसान भी नहीं होती है। रास्ते जोखिम भरे और नदियां उफान पर होती हैं। ऐसी स्थिति में गौतम बुद्ध तीन महीने के लिए एक स्थान पर रुक जाते थे। जब उन्होंने भिक्षुक संघ की स्थापना की, तो उन्होंने नियम बनाया कि हर भिक्षु अपनी सुविधा और इच्छानुसार लोगों में धर्म प्रचार के लिए जा सकता है। 

वह अपनी इच्छित जगह पर जाकर लोगों को आत्म कल्याण और जीवन को सुखमय बनाए रखने के लिए प्रेरित करेगा। बौद्ध की शिक्षा का प्रचार-प्रसार करेगा। यदि वह अपने इस कार्य में विफल हो जाता है, तो उसके स्थान पर कोई नया भिक्षुक भेजा जाएगा। पहले वाले भिक्षुक को आश्रम बुला लिया जाएगा और उसे प्रशिक्षण दिया जाएगा। एक दिन सभी भिक्षुओं को अपने अपने इच्छित स्थान के लिए निकलना था। 

गौतम बुद्ध के परम प्रिय शिष्य आनंद ने उस स्थान को चुना जहां पहले भी लोग धर्म का प्रचार प्रसार करने का प्रयास कर चुके थे और विफल रहे थे। वहां मौजूद लोगों ने आश्चर्य से उन्हें देखा और कहा, वहां के लोग किसी भी साधु-संत या विचारक को टिकने नहीं देते हैं। लोग किसी को भिक्षा भी नहीं देते हैं और आपस में लड़ते ही रहते हैं। वहां जाकर आप क्या करेंगे? आपको भी हो सकता है कि कुछ दिनों बाद विफल होकर लौटना पड़े।  

इस पर आनंद ने गंभीर होकर कहा कि चिकित्सक की जरूरत वहीं सबसे ज्यादा होती है, जहां बीमारियां होती हैं। धर्म का प्रचार करने की जरूरत वहां है जहां अधार्मिक लोग रहते हों। मेरी भी सबसे ज्यादा जरूरत उसी गांव में है, जहां के लोग बुराइयों से घिरे हुए हैं। यह सुनकर सारे लोग शांत हो गए।