Saturday, February 21, 2026

महात्मा बुद्ध ने सुप्पिया को दिलाई मुक्ति


बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

महात्मा बुद्ध के एक शिष्य थे सुप्पिया। सुप्पिया का जन्म उस जाति में हुआ जिसमें पैदा हुए लोगों को मरे हुए पशुओं की खाल उतारना और उन्हें ठिकाने लगाना था। इसकी वजह से उन्हें बहुत अपमान सहना पड़ता था। उस समय का समाज छुआछूत और जाति-पाति के विचारों को बहुत मानता था। उच्च जाति के लोग अपने से निम्न जाति के लोगों को बहुत हेय दृष्टि से देखते थे। 

उनके साथ बहुत दुर्व्यवहार भी होता था। सुप्पिया इस बात से बहुत परेशान थे। वह इस अपमान से मुक्त होना चाहते थे। एक दिन उन्होंने सुना कि उसके गांव के पास में ही महात्मा बुद्ध आए हैं, जो अपने उपदेशों से लोगों का जीवन बदल देते हैं। सुप्पिया के मन में भी इच्छा जागी कि वह उस संत से मिलें। लेकिन फिर उनके मन में आया कि लोग उन्हें उनसे मिलने नहीं देंगे। लेकिन वह अपने मन को कड़ा करके महात्मा बुद्ध से मिलने गए। 

महात्मा बुद्ध ने शांत स्वर में पूछा कि तुम कौन हो और मुझसे क्या चाहते हो। सुप्पिया ने अपनी दशा बताते हुए इन परेशानियों से मुक्ति की कामना प्रकट की। महात्मा बुद्ध  ने सुप्पिया को समझाते हुए कहा कि जब भी निर्मल मन से प्रत्येक व्यक्ति को  एक समान समझता है। लोगों के साथ दया, ममता और अहिंसक व्यवहार करता है, वह किस जाति में पैदा हुआ है, इससे कोई फर्कनहीं पड़ता है। 

मानवता का किसी जाति से कोई लेना देना नहीं है। सुप्पिया ने बुद्ध से कहा कि मैं मुक्त होना चाहता हूं। बुद्ध ने अपने संघ में भिक्षुक बना लिया। सुप्पिया ने बुद्ध के मार्गदर्शन में कठोर साधना की। वे संघ के अन्य भिक्षुओं की तरह नियमों का पालन करते थे और अपनी साधना में पूरी तरह से लीन रहते थे। 

बुद्ध ने उन्हें शिक्षा दी कि समस्त प्राणियों के प्रति करुणा और प्रेम का भाव रखना चाहिए और उनके दु:ख को समझकर उनकी मदद करनी चाहिए। धीरे-धीरे सुप्पिया ने अपनी साधना में प्रगति की और अंतत: उन्होंने निर्वाण प्राप्त किया। 

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